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विंछुड़ो (Vinchudo) — वृश्चिक चंद्रमा का अशुभ काल एवं निवारण

गुजरात, राजस्थान एवं पश्चिमी भारत • प्रामाणिक पंचांग • मंगलवार, 22 सितंबर 2026

लाइव खगोलीय गणना (आज)

मंगलवार, 22 सितंबर 2026

स्थान: नई दिल्लीLahiri: 24.2261°
तिथि

एकादशी

शुक्ल पक्ष

नक्षत्र

उत्तराषाढ़ा

पाद 4

योग

अतिगण्ड

5/27

करण

वणिज

अर्ध तिथि

चंद्र राशि

मकर

285.70° निरयण

सूर्य राशि

कन्या

155.31° निरयण

वर्तमान स्थिति: Free / Shubh (विंछुड़ो रहित)
दैनिक संपूर्ण पंचांग देखें

विंछुड़ो (Vinchudo) — वृश्चिक चंद्रमा का अशुभ काल एवं निवारण की मुख्य विशेषताएँ एवं गणितीय नियम

ढाई दिन (लगभग ६० घंटे) चलने वाले विंछुड़ो की सटीक शुरुआत और समाप्ति

वर्जित कार्य: सगाई, विवाह, नया व्यापार, गृह प्रवेश, वाहन क्रय

शुभ कार्य: रोगोपचार, महामृत्युंजय मंत्र जप, शिव आराधना एवं दान

गुजराती और राजस्थानी ज्योतिष परंपरा के अनुसार शांति विधान

प्रामाणिक विश्लेषण एवं विस्तृत मार्गदर्शिका

गुजरात और राजस्थान की लोक-ज्योतिष परंपरा में विंछुड़ो (વિંછુડો) का अत्यधिक विचार किया जाता है। प्रत्येक माह जब चंद्रमा अपनी नीच राशि वृश्चिक में भ्रमण करता है, तो यह ढाई दिन का काल 'विंछुड़ो' कहलाता है। चूँकि वृश्चिक राशि में चंद्रमा नीच का होता है, अतः इसे विषैला या बिच्छू के डंक के समान तीक्ष्ण माना गया है। इस समय विवाह, सगाई, नया व्यापार या गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों का सर्वथा निषेध रहता है। किंतु यह समय आध्यात्मिक साधना, महामृत्युंजय मंत्र जप, कालभैरव उपासना और ध्यान के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।

१. विंछुड़ो (Vinchudo) — वृश्चिक चंद्रमा का अशुभ काल एवं निवारण का ऐतिहासिक उद्भव एवं शास्त्रीय प्रामाणिकता

विंछुड़ो (વિંછુડો / विंछुड़ो) गुजरात और राजस्थान की लोक-ज्योतिष एवं मुहूर्त परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण विचार है, जिसकी उत्पत्ति संस्कृत के 'वृश्चिक' (बिच्छू) शब्द से हुई है। मुहूर्त चिंतामणि और ज्योतिर्विदाभरण ग्रंथों के अनुसार जब चंद्रमा अपनी नीच राशि वृश्चिक में भ्रमण करता है, तो मंगल और केतु के प्रभाव से चंद्रमा की अमृतमयी किरणें तीक्ष्ण हो जाती हैं, जिससे यह कालखंड 'विंछुड़ो' कहलाता है। सनातन धर्म में समय की गणना केवल दिन और रात गिनने का साधन नहीं, अपितु जीवात्मा को परमात्मा की विराट सृष्टि के साथ एकाकार करने का आध्यात्मिक सेतु है। आचार्य वराहमिहिर ने बृहत्संहिता में लिखा है कि जिस प्रकार दीपक के बिना रात्रि और सूर्य के बिना आकाश अंधकारमय होता है, उसी प्रकार पंचांग के ज्ञान के बिना मनुष्य का जीवन दिशाहीन रहता है। विंछुड़ो (Vinchudo) — वृश्चिक चंद्रमा का अशुभ काल एवं निवारण की प्रत्येक गणना प्राचीन ऋषि-परंपरा द्वारा अनुप्रमाणित है। काशी से कांचीपुरम तक के दैवज्ञों द्वारा परिष्कृत यह विज्ञान हमें ब्रह्मांडीय स्पंदनों के अनुकूल आचरण करने की प्रेरणा देता है।

२. विंछुड़ो (Vinchudo) — वृश्चिक चंद्रमा का अशुभ काल एवं निवारण का गणितीय स्वरूप एवं खगोलीय नियम

विंछुड़ो की अवधि प्रत्येक माह लगभग ढाई दिन (६० घंटे) रहती है, जब चंद्रमा वृश्चिक राशि के ०° से ३०° के मध्य विशाखा के चतुर्थ पाद, अनुराधा के चारों पाद, और ज्येष्ठा के चारों पाद से गुजरता है। इसमें सबसे घातक भाग 'तीव्र विंछुड़ो' कहलाता है, जब चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होता है (जहाँ ३ अंश पर चंद्रमा परम नीच का होता है)।

प्रमुख खगोलीय समीकरण एवं सूत्र:

१. तिथि निर्धारण हेतु सूर्य-चंद्रमा का अंतर: $$\Delta\theta = λ_{\text{चंद्र}} - λ_{\text{सूर्य}}$$ $$\text{तिथि क्रमांक} = \frac{\Delta\theta}{१२^\circ} + १$$ यहाँ $λ$ चित्रापक्ष अयनांश से संस्कृत निरयण देशांतर है। २. लाहिरी अयनांश द्वारा निरयण रूपांतरण: सायन देशांतर से प्रति वर्ष लगभग ५०.२९ विकला की दर से घटने वाले अयनांश को घटाकर वास्तविक तारकीय राशियों का मान निकाला जाता है। ३. दिनमान एवं मुहूर्त विभाजन: सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल समय को १५ बराबर भागों में बाँटने पर एक वैदिक मुहूर्त प्राप्त होता है। इसी आधार पर विंछुड़ो (Vinchudo) — वृश्चिक चंद्रमा का अशुभ काल एवं निवारण सेकंड-दर-सेकंड की सूक्ष्मता सुनिश्चित करता है।

३. विंछुड़ो (Vinchudo) — वृश्चिक चंद्रमा का अशुभ काल एवं निवारण से जुड़े व्रत, पर्व एवं साधना विधान

विंछुड़ो काल में सगाई, विवाह, गृह प्रवेश, वाहन क्रय, और नए व्यापार के बहीखाते खोलना सर्वथा वर्जित माना गया है। इसके विपरीत यह समय शल्य चिकित्सा (सर्जरी), शत्रु शमन, महामृत्युंजय अनुष्ठान, कालभैरव साधना और विषनाशक औषधियों के निर्माण के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। वैदिक चिंतन में उपवास का अर्थ केवल अन्न त्यागना नहीं, अपितु 'ईश्वर के समीप वास करना' (उप + वास) है। जब हम विंछुड़ो (Vinchudo) — वृश्चिक चंद्रमा का अशुभ काल एवं निवारण द्वारा निर्धारित शुद्ध तिथियों पर एकादशी अथवा प्रदोष व्रत रखते हैं, तो चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का हमारे मन और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

४. विंछुड़ो (Vinchudo) — वृश्चिक चंद्रमा का अशुभ काल एवं निवारण की विशिष्ट संदर्भ तालिका

विंछुड़ो के नक्षत्र पाद एवं उनकी शुभाशुभ तीव्रता

वृश्चिकस्थ नक्षत्रराशि विस्तारतीव्रता स्तरवर्जित कार्यशास्त्रोक्त शांति उपाय
विशाखा (पाद ४)०° ००' से ३° २०'मध्यम विंछुड़ोविवाह संबंध तय करना, कर्ज लेनागौमाता को गुड़ खिलाएं
अनुराधा (पाद १)३° २०' से ६° ४०'संवेदनशीलगृह प्रवेश, नए वस्त्र धारणमित्र देवता का स्मरण
अनुराधा (पाद २ व ३)६° ४०' से १३° २०'सक्रिय विंछुड़ोनए व्यापारिक समझौते, भूमि क्रयश्री हनुमान चालीसा पाठ
अनुराधा (पाद ४)१३° २०' से १६° ४०'तीव्रदूर देश की यात्रामीठा दूध पीकर निकलें
ज्येष्ठा (पाद १ व २)१६° ४०' से २३° २०'अति तीव्र (घातक)सर्व संस्कार, नवीन कार्यरुद्राभिषेक, शिव उपासना
ज्येष्ठा (पाद ३ व ४)२३° २०' से ३०° ००'गंडमूल संधि कालगर्भाधान, नामकरण, रजिस्ट्रीमहामृत्युंजय जप, तांबे का दान
यह संदर्भ तालिका विंछुड़ो (Vinchudo) — वृश्चिक चंद्रमा का अशुभ काल एवं निवारण के विशिष्ट गणित और क्षेत्रीय परंपराओं को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करती है।

५. वैदिक पंचांग की वृहद् संदर्भ तालिकाएँ

वैदिक पंचांग की महा-संदर्भ तालिकाएँ:

तालिका १: २७ नक्षत्र, उनके स्वामी एवं अधिष्ठाता देवता

क्र.नक्षत्र नामसंस्कृत नामअधिष्ठाता देवताक्रांतिवृत्त विस्तार
1Ashwiniअश्विनीAshwini Kumaras0.00° से 13.33°
2BharaniभरणीYama13.33° से 26.67°
3Krittikaकृत्तिकाAgni26.67° से 40.00°
4RohiniरोहिणीBrahma / Prajapati40.00° से 53.33°
5MrigashiraमृगशिराSoma (Chandra)53.33° से 66.67°
6Ardraआर्द्राRudra (Shiva)66.67° से 80.00°
7Punarvasuपुनर्वसुAditi80.00° से 93.33°
8Pushyaपुष्यBrihaspati93.33° से 106.66°
9Ashleshaआश्लेषाSarpa (Nagas)106.66° से 120.00°
10MaghaमघाPitris (Ancestors)120.00° से 133.33°
11Purva Phalguniपूर्वा फाल्गुनीBhaga133.33° से 146.66°
12Uttara Phalguniउत्तरा फाल्गुनीAryaman146.66° से 160.00°
13Hastaहस्तSavitr (Surya)160.00° से 173.33°
14Chitraचित्राVishwakarma173.33° से 186.66°
15Swatiस्वातीVayu186.66° से 200.00°
16VishakhaविशाखाIndragni200.00° से 213.33°
17AnuradhaअनुराधाMitra213.33° से 226.66°
18Jyeshthaज्येष्ठाIndra226.66° से 239.99°
19MulaमूलNirriti239.99° से 253.33°
20Purva Ashadhaपूर्वाषाढ़ाApas (Water)253.33° से 266.66°
21Uttara Ashadhaउत्तराषाढ़ाVishwadevas266.66° से 279.99°
22Shravanaश्रवणVishnu279.99° से 293.33°
23Dhanishtaधनिष्ठाVasus293.33° से 306.66°
24ShatabhishaशतभिषाVaruna306.66° से 319.99°
25Purva Bhadrapadaपूर्वा भाद्रपदAja Ekapada319.99° से 333.32°
26Uttara Bhadrapadaउत्तरा भाद्रपदAhirbudhnya333.32° से 346.66°
27RevatiरेवतीPushan346.66° से 359.99°

तालिका २: २७ योग एवं उनका शुभ-अशुभ स्वरूप

क्र.योग नामसंस्कृतस्वरूपकार्य उपयुक्तता
1Vishkambhaविष्कुम्भअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
2Pritiप्रीतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
3Ayushmanआयुष्मानशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
4Saubhagyaसौभाग्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
5Shobhanaशोभनशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
6Atigandaअतिगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
7Sukarmaसुकर्माशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
8Dhritiधृतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
9Shulaशूलअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
10Gandaगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
11Vriddhiवृद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
12Dhruvaध्रुवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
13Vyaghataव्याघातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
14Harshanaहर्षणशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
15Vajraवज्रअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
16Siddhiसिद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
17Vyatipataव्यतीपातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
18Variyanवरीयान्शुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
19Parighaपरिघअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
20Shivaशिवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
21Siddhaसिद्धशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
22Sadhyaसाध्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
23Shubhaशुभशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
24Shuklaशुक्लशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
25Brahmaब्रह्मशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
26Indraइन्द्रशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
27Vaidhritiवैधृतिअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम

तालिका ३: १५ तिथियाँ एवं उनके देवता

क्र.तिथिसंज्ञाअधिष्ठाताफल एवं प्रभाव
प्रतिपदानंदाअग्निनवीन बीज व कृषि कार्य
द्वितीयाभद्राब्रह्मायात्रा, विवाह एवं शिक्षा
तृतीयाजयागौरीशिल्प, संगीत एवं व्यापार
चतुर्थीरिक्तागणेशविघ्न निवारण एवं ऋणमुक्ति
पञ्चमीपूर्णासर्पनाग पूजा एवं स्वास्थ्य लाभ
षष्ठीनंदाकार्तिकेयपद-प्रतिष्ठा एवं यश
सप्तमीभद्रासूर्यवाहन क्रय एवं यात्रा
अष्टमीजयादुर्गा/शिवव्रत, संयम एवं शक्ति उपासना
नवमीरिक्तादुर्गा/रामशस्त्र पूजा एवं साधना
१०दशमीपूर्णायम/दिग्पालसत्कर्म एवं प्रतिष्ठा
११एकादशीनंदाश्री हरि विष्णुउपवास, आत्म-शुद्धि
१२द्वादशीभद्राविष्णुपारण, दान एवं होम
१३त्रयोदशीजयाकामदेव/शिवप्रदोष व्रत, मैत्री
१४चतुर्दशीरिक्ताभगवान शिवशिव आराधना, मंत्र सिद्धि
१५पूर्णिमा / अमावस्यापूर्णा / पितृचंद्र / पितृगणसत्यनारायण कथा / तर्पण

६. दोष परिहार, मुहूर्त निर्णय एवं व्यावहारिक आचार-संहिता

यदि विंछुड़ो काल में कोई अनिवार्य शल्य चिकित्सा या यात्रा करनी ही पड़े, तो भगवान कार्तिकेय को लाल पुष्प अर्पित करें, श्वान को रोटी दें, और ॐ नमः शिवाय का नौ बार जप करके दाहिना पैर आगे बढ़ाकर निकलें।

मुहूर्त निर्णय के सार्वभौमिक नियम:

१. शुभ मुहूर्त के तीन आधार: रिक्ता तिथियों (४, ९, १४) का त्याग, वेध-रहित शुभ नक्षत्र का चयन, और लग्न केंद्र (१, ४, ७, १०) में शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र, बुध) की स्थिति। २. दोषों का आध्यात्मिक परिहार: यदि किसी अनिवार्य कार्य में पूर्ण शुद्ध लग्न न मिले, तो अभिजित मुहूर्त का चयन अथवा श्रीविष्णु सहस्रनाम का पाठ कर कार्य प्रारंभ करना श्रेयस्कर माना गया है। इस प्रकार विंछुड़ो (Vinchudo) — वृश्चिक चंद्रमा का अशुभ काल एवं निवारण प्रत्येक साधक को वैज्ञानिक सटीकता और वैदिक पवित्रता से युक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है।

दैनिक चौघड़िया मुहूर्त (दिन एवं रात्रि)

अमृत, शुभ एवं लाभ श्रेष्ठ

किसी भी शुभ कार्य, यात्रा या नवीन अनुष्ठान को प्रारंभ करने से पूर्व चौघड़िया का विचार अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

दिन का चौघड़िया

रोग (अशुभ)12:39 am - 02:10 am
उद्वेग (अशुभ)02:10 am - 03:41 am
चर (मध्यम)03:41 am - 05:12 am
लाभ (शुभ)05:12 am - 06:43 am
अमृत (शुभ)06:43 am - 08:14 am
काल (अशुभ)08:14 am - 09:45 am
शुभ (शुभ)09:45 am - 11:16 am
रोग (अशुभ)11:16 am - 12:48 pm

रात्रि का चौघड़िया

काल (अशुभ)12:48 pm - 02:17 pm
शुभ (शुभ)02:17 pm - 03:46 pm
रोग (अशुभ)03:46 pm - 05:14 pm
उद्वेग (अशुभ)05:14 pm - 06:43 pm
चर (मध्यम)06:43 pm - 08:12 pm
लाभ (शुभ)08:12 pm - 09:41 pm
अमृत (शुभ)09:41 pm - 11:10 pm
काल (अशुभ)11:10 pm - 12:39 am

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) — विंछुड़ो (Vinchudo) — वृश्चिक चंद्रमा का अशुभ काल एवं निवारण

प्रामाणिक ग्रंथों एवं वैदिक ज्योतिष के आधार पर दिए गए उत्तर

Frequently asked questions

ज्योतिष में विंछुड़ो (Vinchudo) क्या होता है?

विंछुड़ो का अर्थ है वृश्चिक (बिच्छू) राशि का काल। जब चंद्रमा अपनी नीच राशि वृश्चिक (विशेषकर अनुराधा व ज्येष्ठा नक्षत्र) में ढाई दिन रहता है, तब इस कालखंड को विंछुड़ो कहते हैं। इसमें सगाई, विवाह और नया व्यापार आरंभ नहीं किया जाता।

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