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गुजराती पंचांग — विक्रम संवत, बेसतूं वर्ष एवं चौघड़िया

गुजरात एवं पश्चिमी भारत • प्रामाणिक पंचांग • मंगलवार, 22 सितंबर 2026

लाइव खगोलीय गणना (आज)

मंगलवार, 22 सितंबर 2026

स्थान: नई दिल्लीLahiri: 24.2261°
तिथि

द्वादशी

शुक्ल पक्ष

नक्षत्र

श्रवण

पाद 4

योग

सुकर्मा

6/27

करण

बव

अर्ध तिथि

चंद्र राशि

मकर

291.02° निरयण

सूर्य राशि

कन्या

155.74° निरयण

वैदिक मास: भाद्रपद (शुक्ल पक्ष) • विक्रम संवत 2083
दैनिक संपूर्ण पंचांग देखें

गुजराती पंचांग — विक्रम संवत, बेसतूं वर्ष एवं चौघड़िया की मुख्य विशेषताएँ एवं गणितीय नियम

कार्तिक सुद एकम (दीपावली के अगले दिन बेसतूं वर्ष) से नववर्षारंभ

अमृत, शुभ, लाभ, चर, रोग, काल, उद्वेग का संपूर्ण चौघड़िया

आसो मास की पावन नवरात्रि घटस्थापना एवं गरबा मुहूर्त

व्यापार और नवीन बहीखाते आरंभ करने हेतु लाभ पांचम

प्रामाणिक विश्लेषण एवं विस्तृत मार्गदर्शिका

गुजराती पंचांग (ગુજરાતી પંચાંગ) भारतीय ज्योतिष में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। यह विक्रम संवत अमान्त प्रणाली का पालन करता है और इसका नववर्ष (बेसतूं वर्ष) दीपावली के अगले दिन कार्तिक मास की प्रतिपदा से प्रारंभ होता है। व्यापार, उद्योग और यात्रा के लिए गुजराती समाज में चौघड़िया (अमृत, शुभ, लाभ) का विशेष महत्व है। आसो मास की नवरात्रि में माँ जगदंबा की गरबा आराधना और लाभ पांचम पर नए व्यापारिक बहीखातों का श्रीगणेश इसी पंचांग के अनुसार किया जाता है।

१. गुजराती पंचांग — विक्रम संवत, बेसतूं वर्ष एवं चौघड़िया का ऐतिहासिक उद्भव एवं शास्त्रीय प्रामाणिकता

गुजराती पंचांग (ગુજરાતી પંચાંગ) उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य द्वारा ५७ ईसा पूर्व स्थापित विक्रम संवत अमान्त प्रणाली पर आधारित है। भारत भर में गुजरात की यह अद्वितीय विशेषता है कि इसका नववर्ष (बेसतूं वर्ष) वसंत में नहीं, अपितु दीपावली के अगले दिन कार्तिक सुद एकम से प्रारंभ होता है। सनातन धर्म में समय की गणना केवल दिन और रात गिनने का साधन नहीं, अपितु जीवात्मा को परमात्मा की विराट सृष्टि के साथ एकाकार करने का आध्यात्मिक सेतु है। आचार्य वराहमिहिर ने बृहत्संहिता में लिखा है कि जिस प्रकार दीपक के बिना रात्रि और सूर्य के बिना आकाश अंधकारमय होता है, उसी प्रकार पंचांग के ज्ञान के बिना मनुष्य का जीवन दिशाहीन रहता है। गुजराती पंचांग — विक्रम संवत, बेसतूं वर्ष एवं चौघड़िया की प्रत्येक गणना प्राचीन ऋषि-परंपरा द्वारा अनुप्रमाणित है। काशी से कांचीपुरम तक के दैवज्ञों द्वारा परिष्कृत यह विज्ञान हमें ब्रह्मांडीय स्पंदनों के अनुकूल आचरण करने की प्रेरणा देता है।

२. गुजराती पंचांग — विक्रम संवत, बेसतूं वर्ष एवं चौघड़िया का गणितीय स्वरूप एवं खगोलीय नियम

गुजराती पंचांग अमान्त गणना पर चलता है जहाँ महीने का अंत अमावस्या पर होता है। अहमदाबाद, सूरत, राजकोट और वडोदरा के रेखांशों से इसमें स्थानीय लग्न संस्कार किए जाते हैं। व्यापारिक उद्यम और यात्राओं हेतु दिन और रात के चौघड़िया (अमृत, शुभ, लाभ, चर, रोग, काल, उद्वेग) की गणना इस पंचांग का मुख्य केंद्र है।

प्रमुख खगोलीय समीकरण एवं सूत्र:

१. तिथि निर्धारण हेतु सूर्य-चंद्रमा का अंतर: $$\Delta\theta = λ_{\text{चंद्र}} - λ_{\text{सूर्य}}$$ $$\text{तिथि क्रमांक} = \frac{\Delta\theta}{१२^\circ} + १$$ यहाँ $λ$ चित्रापक्ष अयनांश से संस्कृत निरयण देशांतर है। २. लाहिरी अयनांश द्वारा निरयण रूपांतरण: सायन देशांतर से प्रति वर्ष लगभग ५०.२९ विकला की दर से घटने वाले अयनांश को घटाकर वास्तविक तारकीय राशियों का मान निकाला जाता है। ३. दिनमान एवं मुहूर्त विभाजन: सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल समय को १५ बराबर भागों में बाँटने पर एक वैदिक मुहूर्त प्राप्त होता है। इसी आधार पर गुजराती पंचांग — विक्रम संवत, बेसतूं वर्ष एवं चौघड़िया सेकंड-दर-सेकंड की सूक्ष्मता सुनिश्चित करता है।

३. गुजराती पंचांग — विक्रम संवत, बेसतूं वर्ष एवं चौघड़िया से जुड़े व्रत, पर्व एवं साधना विधान

गुजराती पंचांग से गुजरात की भक्ति और व्यापारिक परंपराएँ संचालित होती हैं: आसो मास में शक्ति आराधना की ९ रात्रि नवरात्रि एवं गरबा; कार्तिक सुद ५ को व्यापार और नए बहीखाते आरंभ करने का लाभ पांचम; धनतेरस चौपड़ा पूजन; जलाराम बापा जयंती; तथा मकर संक्रांति का पावन उत्तरायण पर्व। वैदिक चिंतन में उपवास का अर्थ केवल अन्न त्यागना नहीं, अपितु 'ईश्वर के समीप वास करना' (उप + वास) है। जब हम गुजराती पंचांग — विक्रम संवत, बेसतूं वर्ष एवं चौघड़िया द्वारा निर्धारित शुद्ध तिथियों पर एकादशी अथवा प्रदोष व्रत रखते हैं, तो चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का हमारे मन और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

४. गुजराती पंचांग — विक्रम संवत, बेसतूं वर्ष एवं चौघड़िया की विशिष्ट संदर्भ तालिका

गुजराती विक्रम संवत के १२ अमान्त मास एवं प्रमुख पर्व

क्र.गुजराती मास (માસ)संस्कृत तुल्यऋतुव्यापारिक एवं सांस्कृतिक प्रमुख पर्व
कारतक (કારતક)कार्तिकशरद/हेमंतबेसतूं वर्ष (नववर्ष), भाई बीज, लाभ पांचम, देव दिवाली
मागशर (માગશર)मार्गशीर्षहेमंतगीता जयंती, मोक्षदा एकादशी, दत्त जयंती
पोष (પોષ)पौषशिशिरउत्तरायण (मकर संक्रांति पतंगोत्सव), पौष पूर्णिमा
महा (મહા)माघशिशिरमहाशिवरात्रि, भवनाथ मेला (जूनागढ़ गिरनार), वसंत पंचमी
फागण (ફાગણ)फाल्गुनवसंतहोली, धुलेटी, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन
चैत्र (ચૈત્ર)चैत्रवसंतचैत्र नवरात्रि, श्रीराम नवमी, महावीर जयंती
वैशाख (વૈશાખ)वैशाखग्रीष्मअक्षय तृतीया, नरसिंह जयंती
जेठ (જેઠ)ज्येष्ठग्रीष्मवट सावित्री व्रत, गंगा दशहरा, जलदान
अषाढ़ (અષાઢ)आषाढ़वर्षाअषाढ़ी बीज (कच्छी नववर्ष), अहमदाबाद जगन्नाथ रथयात्रा
१०श्रावण (શ્રાવણ)श्रावणवर्षाश्रावण सोमवार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शीतला सातम
११भादरवो (ભાદરવો)भाद्रपदवर्षागणेश चतुर्थी, जैन संवत्सरी, श्राद्ध पक्ष
१२आसो (આસો)आश्विनशरदपावन नवरात्रि (९ रातों का गरबा), शरद पूर्णिमा, दीपावली, धनतेरस
यह संदर्भ तालिका गुजराती पंचांग — विक्रम संवत, बेसतूं वर्ष एवं चौघड़िया के विशिष्ट गणित और क्षेत्रीय परंपराओं को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करती है।

५. वैदिक पंचांग की वृहद् संदर्भ तालिकाएँ

वैदिक पंचांग की महा-संदर्भ तालिकाएँ:

तालिका १: २७ नक्षत्र, उनके स्वामी एवं अधिष्ठाता देवता

क्र.नक्षत्र नामसंस्कृत नामअधिष्ठाता देवताक्रांतिवृत्त विस्तार
1Ashwiniअश्विनीAshwini Kumaras0.00° से 13.33°
2BharaniभरणीYama13.33° से 26.67°
3Krittikaकृत्तिकाAgni26.67° से 40.00°
4RohiniरोहिणीBrahma / Prajapati40.00° से 53.33°
5MrigashiraमृगशिराSoma (Chandra)53.33° से 66.67°
6Ardraआर्द्राRudra (Shiva)66.67° से 80.00°
7Punarvasuपुनर्वसुAditi80.00° से 93.33°
8Pushyaपुष्यBrihaspati93.33° से 106.66°
9Ashleshaआश्लेषाSarpa (Nagas)106.66° से 120.00°
10MaghaमघाPitris (Ancestors)120.00° से 133.33°
11Purva Phalguniपूर्वा फाल्गुनीBhaga133.33° से 146.66°
12Uttara Phalguniउत्तरा फाल्गुनीAryaman146.66° से 160.00°
13Hastaहस्तSavitr (Surya)160.00° से 173.33°
14Chitraचित्राVishwakarma173.33° से 186.66°
15Swatiस्वातीVayu186.66° से 200.00°
16VishakhaविशाखाIndragni200.00° से 213.33°
17AnuradhaअनुराधाMitra213.33° से 226.66°
18Jyeshthaज्येष्ठाIndra226.66° से 239.99°
19MulaमूलNirriti239.99° से 253.33°
20Purva Ashadhaपूर्वाषाढ़ाApas (Water)253.33° से 266.66°
21Uttara Ashadhaउत्तराषाढ़ाVishwadevas266.66° से 279.99°
22Shravanaश्रवणVishnu279.99° से 293.33°
23Dhanishtaधनिष्ठाVasus293.33° से 306.66°
24ShatabhishaशतभिषाVaruna306.66° से 319.99°
25Purva Bhadrapadaपूर्वा भाद्रपदAja Ekapada319.99° से 333.32°
26Uttara Bhadrapadaउत्तरा भाद्रपदAhirbudhnya333.32° से 346.66°
27RevatiरेवतीPushan346.66° से 359.99°

तालिका २: २७ योग एवं उनका शुभ-अशुभ स्वरूप

क्र.योग नामसंस्कृतस्वरूपकार्य उपयुक्तता
1Vishkambhaविष्कुम्भअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
2Pritiप्रीतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
3Ayushmanआयुष्मानशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
4Saubhagyaसौभाग्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
5Shobhanaशोभनशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
6Atigandaअतिगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
7Sukarmaसुकर्माशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
8Dhritiधृतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
9Shulaशूलअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
10Gandaगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
11Vriddhiवृद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
12Dhruvaध्रुवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
13Vyaghataव्याघातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
14Harshanaहर्षणशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
15Vajraवज्रअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
16Siddhiसिद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
17Vyatipataव्यतीपातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
18Variyanवरीयान्शुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
19Parighaपरिघअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
20Shivaशिवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
21Siddhaसिद्धशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
22Sadhyaसाध्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
23Shubhaशुभशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
24Shuklaशुक्लशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
25Brahmaब्रह्मशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
26Indraइन्द्रशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
27Vaidhritiवैधृतिअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम

तालिका ३: १५ तिथियाँ एवं उनके देवता

क्र.तिथिसंज्ञाअधिष्ठाताफल एवं प्रभाव
प्रतिपदानंदाअग्निनवीन बीज व कृषि कार्य
द्वितीयाभद्राब्रह्मायात्रा, विवाह एवं शिक्षा
तृतीयाजयागौरीशिल्प, संगीत एवं व्यापार
चतुर्थीरिक्तागणेशविघ्न निवारण एवं ऋणमुक्ति
पञ्चमीपूर्णासर्पनाग पूजा एवं स्वास्थ्य लाभ
षष्ठीनंदाकार्तिकेयपद-प्रतिष्ठा एवं यश
सप्तमीभद्रासूर्यवाहन क्रय एवं यात्रा
अष्टमीजयादुर्गा/शिवव्रत, संयम एवं शक्ति उपासना
नवमीरिक्तादुर्गा/रामशस्त्र पूजा एवं साधना
१०दशमीपूर्णायम/दिग्पालसत्कर्म एवं प्रतिष्ठा
११एकादशीनंदाश्री हरि विष्णुउपवास, आत्म-शुद्धि
१२द्वादशीभद्राविष्णुपारण, दान एवं होम
१३त्रयोदशीजयाकामदेव/शिवप्रदोष व्रत, मैत्री
१४चतुर्दशीरिक्ताभगवान शिवशिव आराधना, मंत्र सिद्धि
१५पूर्णिमा / अमावस्यापूर्णा / पितृचंद्र / पितृगणसत्यनारायण कथा / तर्पण

६. दोष परिहार, मुहूर्त निर्णय एवं व्यावहारिक आचार-संहिता

गुजराती व्यापारिक परंपरा में विंछुड़ो (वृश्चिक का चंद्रमा) और होलाष्टक के समय कोई भी नया निवेश, दुकान का उद्घाटन या सगाई नहीं की जाती। केवल अमृत, शुभ और लाभ के चौघड़िया में ही नवीन बहीखाते और सौदे किए जाते हैं।

मुहूर्त निर्णय के सार्वभौमिक नियम:

१. शुभ मुहूर्त के तीन आधार: रिक्ता तिथियों (४, ९, १४) का त्याग, वेध-रहित शुभ नक्षत्र का चयन, और लग्न केंद्र (१, ४, ७, १०) में शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र, बुध) की स्थिति। २. दोषों का आध्यात्मिक परिहार: यदि किसी अनिवार्य कार्य में पूर्ण शुद्ध लग्न न मिले, तो अभिजित मुहूर्त का चयन अथवा श्रीविष्णु सहस्रनाम का पाठ कर कार्य प्रारंभ करना श्रेयस्कर माना गया है। इस प्रकार गुजराती पंचांग — विक्रम संवत, बेसतूं वर्ष एवं चौघड़िया प्रत्येक साधक को वैज्ञानिक सटीकता और वैदिक पवित्रता से युक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है।

दैनिक चौघड़िया मुहूर्त (दिन एवं रात्रि)

अमृत, शुभ एवं लाभ श्रेष्ठ

किसी भी शुभ कार्य, यात्रा या नवीन अनुष्ठान को प्रारंभ करने से पूर्व चौघड़िया का विचार अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

दिन का चौघड़िया

लाभ (शुभ)12:39 am - 02:10 am
अमृत (शुभ)02:10 am - 03:41 am
काल (अशुभ)03:41 am - 05:12 am
शुभ (शुभ)05:12 am - 06:43 am
रोग (अशुभ)06:43 am - 08:14 am
उद्वेग (अशुभ)08:14 am - 09:45 am
चर (मध्यम)09:45 am - 11:15 am
लाभ (शुभ)11:15 am - 12:46 pm

रात्रि का चौघड़िया

उद्वेग (अशुभ)12:46 pm - 02:16 pm
चर (मध्यम)02:16 pm - 03:45 pm
लाभ (शुभ)03:45 pm - 05:14 pm
अमृत (शुभ)05:14 pm - 06:43 pm
काल (अशुभ)06:43 pm - 08:12 pm
शुभ (शुभ)08:12 pm - 09:42 pm
रोग (अशुभ)09:42 pm - 11:11 pm
उद्वेग (अशुभ)11:11 pm - 12:40 am

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) — गुजराती पंचांग — विक्रम संवत, बेसतूं वर्ष एवं चौघड़िया

प्रामाणिक ग्रंथों एवं वैदिक ज्योतिष के आधार पर दिए गए उत्तर

Frequently asked questions

गुजराती नववर्ष कब प्रारंभ होता है?

गुजराती नववर्ष दीपावली के अगले दिन 'कार्तिक सुद एकम' (बेसतूं वर्ष) से प्रारंभ होता है।

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