
कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग
कर्नाटक एवं दक्षिण भारत • प्रामाणिक पंचांग • मंगलवार, 22 सितंबर 2026
मंगलवार, 22 सितंबर 2026
एकादशी
शुक्ल पक्ष
उत्तराषाढ़ा
पाद 4
अतिगण्ड
5/27
वणिज
अर्ध तिथि
मकर
286.47° निरयण
कन्या
155.38° निरयण
कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग की मुख्य विशेषताएँ एवं गणितीय नियम
६० संवत्सर चक्र के साथ चंद्रमान पंचांग की गणना
युगादि पर्व (चैत्र शुद्ध पाड्यमि / कन्नड़ नववर्ष)
मैसूर दशहरा, जांबो सावारी (हाथी जुलूस) एवं विजयदशमी मुहूर्त
वरमहालक्ष्मी व्रत और कडलेकाई परिषे की पवित्र तिथियाँ
प्रामाणिक विश्लेषण एवं विस्तृत मार्गदर्शिका
१. कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग का ऐतिहासिक उद्भव एवं शास्त्रीय प्रामाणिकता
२. कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग का गणितीय स्वरूप एवं खगोलीय नियम
प्रमुख खगोलीय समीकरण एवं सूत्र:
१. तिथि निर्धारण हेतु सूर्य-चंद्रमा का अंतर: $$\Delta\theta = λ_{\text{चंद्र}} - λ_{\text{सूर्य}}$$ $$\text{तिथि क्रमांक} = \frac{\Delta\theta}{१२^\circ} + १$$ यहाँ $λ$ चित्रापक्ष अयनांश से संस्कृत निरयण देशांतर है। २. लाहिरी अयनांश द्वारा निरयण रूपांतरण: सायन देशांतर से प्रति वर्ष लगभग ५०.२९ विकला की दर से घटने वाले अयनांश को घटाकर वास्तविक तारकीय राशियों का मान निकाला जाता है। ३. दिनमान एवं मुहूर्त विभाजन: सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल समय को १५ बराबर भागों में बाँटने पर एक वैदिक मुहूर्त प्राप्त होता है। इसी आधार पर कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग सेकंड-दर-सेकंड की सूक्ष्मता सुनिश्चित करता है।३. कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग से जुड़े व्रत, पर्व एवं साधना विधान
४. कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग की विशिष्ट संदर्भ तालिका
कन्नड़ चंद्रमान पंचांग के १२ चांद्र मास एवं कर्नाटक के प्रमुख उत्सव
| क्र. | कन्नड़ मास (ಮಾಸ) | संस्कृत नाम | संक्रांति तुल्य | कर्नाटक के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व |
|---|---|---|---|---|
| १ | चैत्र (ಚೈತ್ರ) | चैत्र | मेष | युगादि (कन्नड़ नववर्ष), श्रीराम नवमी, हनुमान जयंती |
| २ | वैशाख (ವೈಶಾಖ) | वैशाख | वृषभ | अक्षय तृतीया, बसव जयंती, श्री शंकराचार्य जयंती (शृंगेरी) |
| ३ | ज्येष्ठ (ಜ್ಯೇಷ್ಠ) | ज्येष्ठ | मिथुन | वट पूर्णिमा, बेंगळूरु का ऐतिहासिक करगा उत्सव |
| ४ | आषाढ़ (ಆಷಾಢ) | आषाढ़ | कर्क | आषाढ़ शुक्रवार (चामुंडी हिल्स), गुरु पूर्णिमा |
| ५ | श्रावण (ಶ್ರಾವಣ) | श्रावण | सिंह | वरमहालक्ष्मी व्रत, मंगला गौरी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, उपाकर्म |
| ६ | भाद्रपद (ಭಾದ್ರಪದ) | भाद्रपद | कन्या | स्वर्ण गौरी हब्बा, गणेश चतुर्थी, अनंत पद्मनाभ व्रत |
| ७ | आश्वयुज (ಆಶ್ವಯುಜ) | आश्विन | तुला | मैसूर दशहरा (नवरात्रि), आयुध पूजा, विजयदशमी |
| ८ | कार्तिक (ಕಾರ್ತಿಕ) | कार्तिक | वृश्चिक | दीपावली, बलिपाड्यमि, कार्तिका दीपोत्सव (धर्मस्थल) |
| ९ | मार्गशिर (ಮಾರ್ಗಶಿರ) | मार्गशीर्ष | धनु | सुब्रह्मण्य षष्ठी (कुक्के सुब्रह्मण्य), दत्त जयंती |
| १० | पुष्य (ಪುಷ್ಯ) | पौष | मकर | मकर संक्रांति (एळ्ळु-बेल्ल विनिमय), गवि गंगाधरेश्वर सूर्य किरण दर्शन |
| ११ | माघ (ಮಾಘ) | माघ | कुंभ | महाशिवरात्रि, रथ सप्तमी, बनशंकरी जात्रे |
| १२ | फाल्गुण (ಫಾಲ್ಗುಣ) | फाल्गुन | मीन | कामन हब्बा (होली), मल्लेश्वरम व उडुपी ब्रह्मोत्सव |
५. वैदिक पंचांग की वृहद् संदर्भ तालिकाएँ
तालिका १: २७ नक्षत्र, उनके स्वामी एवं अधिष्ठाता देवता
| क्र. | नक्षत्र नाम | संस्कृत नाम | अधिष्ठाता देवता | क्रांतिवृत्त विस्तार |
|---|---|---|---|---|
| 1 | Ashwini | अश्विनी | Ashwini Kumaras | 0.00° से 13.33° |
| 2 | Bharani | भरणी | Yama | 13.33° से 26.67° |
| 3 | Krittika | कृत्तिका | Agni | 26.67° से 40.00° |
| 4 | Rohini | रोहिणी | Brahma / Prajapati | 40.00° से 53.33° |
| 5 | Mrigashira | मृगशिरा | Soma (Chandra) | 53.33° से 66.67° |
| 6 | Ardra | आर्द्रा | Rudra (Shiva) | 66.67° से 80.00° |
| 7 | Punarvasu | पुनर्वसु | Aditi | 80.00° से 93.33° |
| 8 | Pushya | पुष्य | Brihaspati | 93.33° से 106.66° |
| 9 | Ashlesha | आश्लेषा | Sarpa (Nagas) | 106.66° से 120.00° |
| 10 | Magha | मघा | Pitris (Ancestors) | 120.00° से 133.33° |
| 11 | Purva Phalguni | पूर्वा फाल्गुनी | Bhaga | 133.33° से 146.66° |
| 12 | Uttara Phalguni | उत्तरा फाल्गुनी | Aryaman | 146.66° से 160.00° |
| 13 | Hasta | हस्त | Savitr (Surya) | 160.00° से 173.33° |
| 14 | Chitra | चित्रा | Vishwakarma | 173.33° से 186.66° |
| 15 | Swati | स्वाती | Vayu | 186.66° से 200.00° |
| 16 | Vishakha | विशाखा | Indragni | 200.00° से 213.33° |
| 17 | Anuradha | अनुराधा | Mitra | 213.33° से 226.66° |
| 18 | Jyeshtha | ज्येष्ठा | Indra | 226.66° से 239.99° |
| 19 | Mula | मूल | Nirriti | 239.99° से 253.33° |
| 20 | Purva Ashadha | पूर्वाषाढ़ा | Apas (Water) | 253.33° से 266.66° |
| 21 | Uttara Ashadha | उत्तराषाढ़ा | Vishwadevas | 266.66° से 279.99° |
| 22 | Shravana | श्रवण | Vishnu | 279.99° से 293.33° |
| 23 | Dhanishta | धनिष्ठा | Vasus | 293.33° से 306.66° |
| 24 | Shatabhisha | शतभिषा | Varuna | 306.66° से 319.99° |
| 25 | Purva Bhadrapada | पूर्वा भाद्रपद | Aja Ekapada | 319.99° से 333.32° |
| 26 | Uttara Bhadrapada | उत्तरा भाद्रपद | Ahirbudhnya | 333.32° से 346.66° |
| 27 | Revati | रेवती | Pushan | 346.66° से 359.99° |
तालिका २: २७ योग एवं उनका शुभ-अशुभ स्वरूप
| क्र. | योग नाम | संस्कृत | स्वरूप | कार्य उपयुक्तता |
|---|---|---|---|---|
| 1 | Vishkambha | विष्कुम्भ | अशुभ (त्याज्य) | शांति कर्म एवं संयम |
| 2 | Priti | प्रीति | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 3 | Ayushman | आयुष्मान | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 4 | Saubhagya | सौभाग्य | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 5 | Shobhana | शोभन | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 6 | Atiganda | अतिगण्ड | अशुभ (त्याज्य) | शांति कर्म एवं संयम |
| 7 | Sukarma | सुकर्मा | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 8 | Dhriti | धृति | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 9 | Shula | शूल | अशुभ (त्याज्य) | शांति कर्म एवं संयम |
| 10 | Ganda | गण्ड | अशुभ (त्याज्य) | शांति कर्म एवं संयम |
| 11 | Vriddhi | वृद्धि | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 12 | Dhruva | ध्रुव | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 13 | Vyaghata | व्याघात | अशुभ (त्याज्य) | शांति कर्म एवं संयम |
| 14 | Harshana | हर्षण | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 15 | Vajra | वज्र | अशुभ (त्याज्य) | शांति कर्म एवं संयम |
| 16 | Siddhi | सिद्धि | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 17 | Vyatipata | व्यतीपात | अशुभ (त्याज्य) | शांति कर्म एवं संयम |
| 18 | Variyan | वरीयान् | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 19 | Parigha | परिघ | अशुभ (त्याज्य) | शांति कर्म एवं संयम |
| 20 | Shiva | शिव | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 21 | Siddha | सिद्ध | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 22 | Sadhya | साध्य | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 23 | Shubha | शुभ | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 24 | Shukla | शुक्ल | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 25 | Brahma | ब्रह्म | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 26 | Indra | इन्द्र | शुभ एवं कल्याणकारी | सर्व कार्य सिद्धि |
| 27 | Vaidhriti | वैधृति | अशुभ (त्याज्य) | शांति कर्म एवं संयम |
तालिका ३: १५ तिथियाँ एवं उनके देवता
| क्र. | तिथि | संज्ञा | अधिष्ठाता | फल एवं प्रभाव |
|---|---|---|---|---|
| १ | प्रतिपदा | नंदा | अग्नि | नवीन बीज व कृषि कार्य |
| २ | द्वितीया | भद्रा | ब्रह्मा | यात्रा, विवाह एवं शिक्षा |
| ३ | तृतीया | जया | गौरी | शिल्प, संगीत एवं व्यापार |
| ४ | चतुर्थी | रिक्ता | गणेश | विघ्न निवारण एवं ऋणमुक्ति |
| ५ | पञ्चमी | पूर्णा | सर्प | नाग पूजा एवं स्वास्थ्य लाभ |
| ६ | षष्ठी | नंदा | कार्तिकेय | पद-प्रतिष्ठा एवं यश |
| ७ | सप्तमी | भद्रा | सूर्य | वाहन क्रय एवं यात्रा |
| ८ | अष्टमी | जया | दुर्गा/शिव | व्रत, संयम एवं शक्ति उपासना |
| ९ | नवमी | रिक्ता | दुर्गा/राम | शस्त्र पूजा एवं साधना |
| १० | दशमी | पूर्णा | यम/दिग्पाल | सत्कर्म एवं प्रतिष्ठा |
| ११ | एकादशी | नंदा | श्री हरि विष्णु | उपवास, आत्म-शुद्धि |
| १२ | द्वादशी | भद्रा | विष्णु | पारण, दान एवं होम |
| १३ | त्रयोदशी | जया | कामदेव/शिव | प्रदोष व्रत, मैत्री |
| १४ | चतुर्दशी | रिक्ता | भगवान शिव | शिव आराधना, मंत्र सिद्धि |
| १५ | पूर्णिमा / अमावस्या | पूर्णा / पितृ | चंद्र / पितृगण | सत्यनारायण कथा / तर्पण |
६. दोष परिहार, मुहूर्त निर्णय एवं व्यावहारिक आचार-संहिता
मुहूर्त निर्णय के सार्वभौमिक नियम:
१. शुभ मुहूर्त के तीन आधार: रिक्ता तिथियों (४, ९, १४) का त्याग, वेध-रहित शुभ नक्षत्र का चयन, और लग्न केंद्र (१, ४, ७, १०) में शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र, बुध) की स्थिति। २. दोषों का आध्यात्मिक परिहार: यदि किसी अनिवार्य कार्य में पूर्ण शुद्ध लग्न न मिले, तो अभिजित मुहूर्त का चयन अथवा श्रीविष्णु सहस्रनाम का पाठ कर कार्य प्रारंभ करना श्रेयस्कर माना गया है। इस प्रकार कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग प्रत्येक साधक को वैज्ञानिक सटीकता और वैदिक पवित्रता से युक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है।दैनिक चौघड़िया मुहूर्त (दिन एवं रात्रि)
अमृत, शुभ एवं लाभ श्रेष्ठकिसी भी शुभ कार्य, यात्रा या नवीन अनुष्ठान को प्रारंभ करने से पूर्व चौघड़िया का विचार अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
दिन का चौघड़िया
रात्रि का चौघड़िया
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) — कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग
प्रामाणिक ग्रंथों एवं वैदिक ज्योतिष के आधार पर दिए गए उत्तर
Frequently asked questions
कन्नड़ पंचांग किस पद्धति पर आधारित है?
कन्नड़ पंचांग 'चंद्रमान' पद्धति पर आधारित है, जिसका नववर्ष चैत्र मास के प्रथम दिन 'युगादि' से आरंभ होता है।
अन्य क्षेत्रीय एवं विशिष्ट पंचांग
मासिक पंचांग
अखिल भारतीय / राष्ट्रीयदैनिक पंचांग
अखिल भारतीय / राष्ट्रीयअसमिया पंजिका
असम एवं पूर्वोत्तर भारतबंगाली पंजिका
पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा एवं पूर्वी भारततमिल पंचांगम
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