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कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग

कर्नाटक एवं दक्षिण भारत • प्रामाणिक पंचांग • मंगलवार, 22 सितंबर 2026

लाइव खगोलीय गणना (आज)

मंगलवार, 22 सितंबर 2026

स्थान: नई दिल्लीLahiri: 24.2261°
तिथि

एकादशी

शुक्ल पक्ष

नक्षत्र

उत्तराषाढ़ा

पाद 4

योग

अतिगण्ड

5/27

करण

वणिज

अर्ध तिथि

चंद्र राशि

मकर

286.47° निरयण

सूर्य राशि

कन्या

155.38° निरयण

वैदिक मास: भाद्रपद (शुक्ल पक्ष) • विक्रम संवत 2083
दैनिक संपूर्ण पंचांग देखें

कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग की मुख्य विशेषताएँ एवं गणितीय नियम

६० संवत्सर चक्र के साथ चंद्रमान पंचांग की गणना

युगादि पर्व (चैत्र शुद्ध पाड्यमि / कन्नड़ नववर्ष)

मैसूर दशहरा, जांबो सावारी (हाथी जुलूस) एवं विजयदशमी मुहूर्त

वरमहालक्ष्मी व्रत और कडलेकाई परिषे की पवित्र तिथियाँ

प्रामाणिक विश्लेषण एवं विस्तृत मार्गदर्शिका

कन्नड़ पंचांग (ಕನ್ನಡ ಪಂಚಾಂಗ) कर्नाटक की पावन वैदिक और सांस्कृतिक परंपरा का दर्पण है। चंद्रमान शालिवाहन शक के अनुसार चलने वाला यह पंचांग युगादि पर्व से प्रारंभ होता है, जहाँ जीवन के सुख-दुख के संतुलन का प्रतीक 'बेवु-बेल्ल' (नीम-गुड़) ग्रहण किया जाता है। श्रावण मास में सौभाग्य की देवी वरमहालक्ष्मी व्रत तथा आश्विन में माँ चामुंडेश्वरी की कृपा से संपन्न होने वाला विश्वविख्यात मैसूर दशहरा इसी पंचांग की तिथियों के आधार पर आयोजित होता है।

१. कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग का ऐतिहासिक उद्भव एवं शास्त्रीय प्रामाणिकता

कन्नड़ पंचांग (ಕನ್ನಡ ಪಂಚಾಂಗ) कर्नाटक की पावन चंद्रमान शालिवाहन शक परंपरा पर आधारित है, जिसे बादामी चालुक्य, राष्ट्रकूट, होयसल और विजयनगर साम्राज्य के आचार्यों ने पोषित किया। शृंगेरी शारदा पीठ में जगद्गुरु स्वामी विद्यारण्य द्वारा स्थापित शास्त्रोक्त नियमों के आधार पर यह पंचांग राज्य और देवालयों के अनुष्ठान संचालित करता है। सनातन धर्म में समय की गणना केवल दिन और रात गिनने का साधन नहीं, अपितु जीवात्मा को परमात्मा की विराट सृष्टि के साथ एकाकार करने का आध्यात्मिक सेतु है। आचार्य वराहमिहिर ने बृहत्संहिता में लिखा है कि जिस प्रकार दीपक के बिना रात्रि और सूर्य के बिना आकाश अंधकारमय होता है, उसी प्रकार पंचांग के ज्ञान के बिना मनुष्य का जीवन दिशाहीन रहता है। कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग की प्रत्येक गणना प्राचीन ऋषि-परंपरा द्वारा अनुप्रमाणित है। काशी से कांचीपुरम तक के दैवज्ञों द्वारा परिष्कृत यह विज्ञान हमें ब्रह्मांडीय स्पंदनों के अनुकूल आचरण करने की प्रेरणा देता है।

२. कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग का गणितीय स्वरूप एवं खगोलीय नियम

कन्नड़ पंचांग चंद्रमान गणना का पालन करता है, जहाँ नववर्ष का शुभारंभ युगादि (चैत्र शुद्ध पाड्यमि) से होता है। यह ६० संवत्सरों के चक्र (प्रभव से क्षय) का सूक्ष्म परिगणन करता है। लाहिरी अयनांश द्वारा घटि-विघटि में तिथि, नक्षत्र और ग्रह होरा का सटीक गणित निकाला जाता है।

प्रमुख खगोलीय समीकरण एवं सूत्र:

१. तिथि निर्धारण हेतु सूर्य-चंद्रमा का अंतर: $$\Delta\theta = λ_{\text{चंद्र}} - λ_{\text{सूर्य}}$$ $$\text{तिथि क्रमांक} = \frac{\Delta\theta}{१२^\circ} + १$$ यहाँ $λ$ चित्रापक्ष अयनांश से संस्कृत निरयण देशांतर है। २. लाहिरी अयनांश द्वारा निरयण रूपांतरण: सायन देशांतर से प्रति वर्ष लगभग ५०.२९ विकला की दर से घटने वाले अयनांश को घटाकर वास्तविक तारकीय राशियों का मान निकाला जाता है। ३. दिनमान एवं मुहूर्त विभाजन: सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल समय को १५ बराबर भागों में बाँटने पर एक वैदिक मुहूर्त प्राप्त होता है। इसी आधार पर कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग सेकंड-दर-सेकंड की सूक्ष्मता सुनिश्चित करता है।

३. कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग से जुड़े व्रत, पर्व एवं साधना विधान

कन्नड़ पंचांग से कर्नाटक के पावन पर्व निश्चित होते हैं: युगादि पर सुख-दुख के संतुलन का प्रतीक 'बेवु-बेल्ल' (नीम-गुड़) का आस्वादन; आश्विन में माँ चामुंडेश्वरी की कृपा से संपन्न होने वाला विश्वविख्यात मैसूर दशहरा एवं जांबो सावारी (हाथी जुलूस); श्रावण का वरमहालक्ष्मी व्रत; स्वर्ण गौरी हब्बा; तथा बेंगळूरु के बसवनगुडी का प्रसिद्ध कडलेकाई परिषे। वैदिक चिंतन में उपवास का अर्थ केवल अन्न त्यागना नहीं, अपितु 'ईश्वर के समीप वास करना' (उप + वास) है। जब हम कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग द्वारा निर्धारित शुद्ध तिथियों पर एकादशी अथवा प्रदोष व्रत रखते हैं, तो चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का हमारे मन और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

४. कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग की विशिष्ट संदर्भ तालिका

कन्नड़ चंद्रमान पंचांग के १२ चांद्र मास एवं कर्नाटक के प्रमुख उत्सव

क्र.कन्नड़ मास (ಮಾಸ)संस्कृत नामसंक्रांति तुल्यकर्नाटक के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व
चैत्र (ಚೈತ್ರ)चैत्रमेषयुगादि (कन्नड़ नववर्ष), श्रीराम नवमी, हनुमान जयंती
वैशाख (ವೈಶಾಖ)वैशाखवृषभअक्षय तृतीया, बसव जयंती, श्री शंकराचार्य जयंती (शृंगेरी)
ज्येष्ठ (ಜ್ಯೇಷ್ಠ)ज्येष्ठमिथुनवट पूर्णिमा, बेंगळूरु का ऐतिहासिक करगा उत्सव
आषाढ़ (ಆಷಾಢ)आषाढ़कर्कआषाढ़ शुक्रवार (चामुंडी हिल्स), गुरु पूर्णिमा
श्रावण (ಶ್ರಾವಣ)श्रावणसिंहवरमहालक्ष्मी व्रत, मंगला गौरी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, उपाकर्म
भाद्रपद (ಭಾದ್ರಪದ)भाद्रपदकन्यास्वर्ण गौरी हब्बा, गणेश चतुर्थी, अनंत पद्मनाभ व्रत
आश्वयुज (ಆಶ್ವಯುಜ)आश्विनतुलामैसूर दशहरा (नवरात्रि), आयुध पूजा, विजयदशमी
कार्तिक (ಕಾರ್ತಿಕ)कार्तिकवृश्चिकदीपावली, बलिपाड्यमि, कार्तिका दीपोत्सव (धर्मस्थल)
मार्गशिर (ಮಾರ್ಗಶಿರ)मार्गशीर्षधनुसुब्रह्मण्य षष्ठी (कुक्के सुब्रह्मण्य), दत्त जयंती
१०पुष्य (ಪುಷ್ಯ)पौषमकरमकर संक्रांति (एळ्ळु-बेल्ल विनिमय), गवि गंगाधरेश्वर सूर्य किरण दर्शन
११माघ (ಮಾಘ)माघकुंभमहाशिवरात्रि, रथ सप्तमी, बनशंकरी जात्रे
१२फाल्गुण (ಫಾಲ್ಗುಣ)फाल्गुनमीनकामन हब्बा (होली), मल्लेश्वरम व उडुपी ब्रह्मोत्सव
यह संदर्भ तालिका कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग के विशिष्ट गणित और क्षेत्रीय परंपराओं को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करती है।

५. वैदिक पंचांग की वृहद् संदर्भ तालिकाएँ

वैदिक पंचांग की महा-संदर्भ तालिकाएँ:

तालिका १: २७ नक्षत्र, उनके स्वामी एवं अधिष्ठाता देवता

क्र.नक्षत्र नामसंस्कृत नामअधिष्ठाता देवताक्रांतिवृत्त विस्तार
1Ashwiniअश्विनीAshwini Kumaras0.00° से 13.33°
2BharaniभरणीYama13.33° से 26.67°
3Krittikaकृत्तिकाAgni26.67° से 40.00°
4RohiniरोहिणीBrahma / Prajapati40.00° से 53.33°
5MrigashiraमृगशिराSoma (Chandra)53.33° से 66.67°
6Ardraआर्द्राRudra (Shiva)66.67° से 80.00°
7Punarvasuपुनर्वसुAditi80.00° से 93.33°
8Pushyaपुष्यBrihaspati93.33° से 106.66°
9Ashleshaआश्लेषाSarpa (Nagas)106.66° से 120.00°
10MaghaमघाPitris (Ancestors)120.00° से 133.33°
11Purva Phalguniपूर्वा फाल्गुनीBhaga133.33° से 146.66°
12Uttara Phalguniउत्तरा फाल्गुनीAryaman146.66° से 160.00°
13Hastaहस्तSavitr (Surya)160.00° से 173.33°
14Chitraचित्राVishwakarma173.33° से 186.66°
15Swatiस्वातीVayu186.66° से 200.00°
16VishakhaविशाखाIndragni200.00° से 213.33°
17AnuradhaअनुराधाMitra213.33° से 226.66°
18Jyeshthaज्येष्ठाIndra226.66° से 239.99°
19MulaमूलNirriti239.99° से 253.33°
20Purva Ashadhaपूर्वाषाढ़ाApas (Water)253.33° से 266.66°
21Uttara Ashadhaउत्तराषाढ़ाVishwadevas266.66° से 279.99°
22Shravanaश्रवणVishnu279.99° से 293.33°
23Dhanishtaधनिष्ठाVasus293.33° से 306.66°
24ShatabhishaशतभिषाVaruna306.66° से 319.99°
25Purva Bhadrapadaपूर्वा भाद्रपदAja Ekapada319.99° से 333.32°
26Uttara Bhadrapadaउत्तरा भाद्रपदAhirbudhnya333.32° से 346.66°
27RevatiरेवतीPushan346.66° से 359.99°

तालिका २: २७ योग एवं उनका शुभ-अशुभ स्वरूप

क्र.योग नामसंस्कृतस्वरूपकार्य उपयुक्तता
1Vishkambhaविष्कुम्भअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
2Pritiप्रीतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
3Ayushmanआयुष्मानशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
4Saubhagyaसौभाग्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
5Shobhanaशोभनशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
6Atigandaअतिगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
7Sukarmaसुकर्माशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
8Dhritiधृतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
9Shulaशूलअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
10Gandaगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
11Vriddhiवृद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
12Dhruvaध्रुवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
13Vyaghataव्याघातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
14Harshanaहर्षणशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
15Vajraवज्रअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
16Siddhiसिद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
17Vyatipataव्यतीपातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
18Variyanवरीयान्शुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
19Parighaपरिघअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
20Shivaशिवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
21Siddhaसिद्धशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
22Sadhyaसाध्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
23Shubhaशुभशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
24Shuklaशुक्लशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
25Brahmaब्रह्मशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
26Indraइन्द्रशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
27Vaidhritiवैधृतिअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम

तालिका ३: १५ तिथियाँ एवं उनके देवता

क्र.तिथिसंज्ञाअधिष्ठाताफल एवं प्रभाव
प्रतिपदानंदाअग्निनवीन बीज व कृषि कार्य
द्वितीयाभद्राब्रह्मायात्रा, विवाह एवं शिक्षा
तृतीयाजयागौरीशिल्प, संगीत एवं व्यापार
चतुर्थीरिक्तागणेशविघ्न निवारण एवं ऋणमुक्ति
पञ्चमीपूर्णासर्पनाग पूजा एवं स्वास्थ्य लाभ
षष्ठीनंदाकार्तिकेयपद-प्रतिष्ठा एवं यश
सप्तमीभद्रासूर्यवाहन क्रय एवं यात्रा
अष्टमीजयादुर्गा/शिवव्रत, संयम एवं शक्ति उपासना
नवमीरिक्तादुर्गा/रामशस्त्र पूजा एवं साधना
१०दशमीपूर्णायम/दिग्पालसत्कर्म एवं प्रतिष्ठा
११एकादशीनंदाश्री हरि विष्णुउपवास, आत्म-शुद्धि
१२द्वादशीभद्राविष्णुपारण, दान एवं होम
१३त्रयोदशीजयाकामदेव/शिवप्रदोष व्रत, मैत्री
१४चतुर्दशीरिक्ताभगवान शिवशिव आराधना, मंत्र सिद्धि
१५पूर्णिमा / अमावस्यापूर्णा / पितृचंद्र / पितृगणसत्यनारायण कथा / तर्पण

६. दोष परिहार, मुहूर्त निर्णय एवं व्यावहारिक आचार-संहिता

कर्नाटक पंचांग में राहु काल, गुलिक काल और यमगंड का त्याग कर अमृत घटिका में कार्य आरंभ किए जाते हैं। श्रावण मास के शुक्रवारों को वरमहालक्ष्मी पूजा हेतु ब्रह्म मुहूर्त और शुभ लग्न का विशेष ध्यान रखा जाता है।

मुहूर्त निर्णय के सार्वभौमिक नियम:

१. शुभ मुहूर्त के तीन आधार: रिक्ता तिथियों (४, ९, १४) का त्याग, वेध-रहित शुभ नक्षत्र का चयन, और लग्न केंद्र (१, ४, ७, १०) में शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र, बुध) की स्थिति। २. दोषों का आध्यात्मिक परिहार: यदि किसी अनिवार्य कार्य में पूर्ण शुद्ध लग्न न मिले, तो अभिजित मुहूर्त का चयन अथवा श्रीविष्णु सहस्रनाम का पाठ कर कार्य प्रारंभ करना श्रेयस्कर माना गया है। इस प्रकार कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग प्रत्येक साधक को वैज्ञानिक सटीकता और वैदिक पवित्रता से युक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है।

दैनिक चौघड़िया मुहूर्त (दिन एवं रात्रि)

अमृत, शुभ एवं लाभ श्रेष्ठ

किसी भी शुभ कार्य, यात्रा या नवीन अनुष्ठान को प्रारंभ करने से पूर्व चौघड़िया का विचार अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

दिन का चौघड़िया

रोग (अशुभ)12:39 am - 02:10 am
उद्वेग (अशुभ)02:10 am - 03:41 am
चर (मध्यम)03:41 am - 05:12 am
लाभ (शुभ)05:12 am - 06:43 am
अमृत (शुभ)06:43 am - 08:14 am
काल (अशुभ)08:14 am - 09:45 am
शुभ (शुभ)09:45 am - 11:16 am
रोग (अशुभ)11:16 am - 12:48 pm

रात्रि का चौघड़िया

काल (अशुभ)12:48 pm - 02:17 pm
शुभ (शुभ)02:17 pm - 03:46 pm
रोग (अशुभ)03:46 pm - 05:14 pm
उद्वेग (अशुभ)05:14 pm - 06:43 pm
चर (मध्यम)06:43 pm - 08:12 pm
लाभ (शुभ)08:12 pm - 09:41 pm
अमृत (शुभ)09:41 pm - 11:10 pm
काल (अशुभ)11:10 pm - 12:39 am

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) — कन्नड़ पंचांग — युगादि, शालीवाहन शक एवं चंद्रमान पंचांग

प्रामाणिक ग्रंथों एवं वैदिक ज्योतिष के आधार पर दिए गए उत्तर

Frequently asked questions

कन्नड़ पंचांग किस पद्धति पर आधारित है?

कन्नड़ पंचांग 'चंद्रमान' पद्धति पर आधारित है, जिसका नववर्ष चैत्र मास के प्रथम दिन 'युगादि' से आरंभ होता है।

अन्य क्षेत्रीय एवं विशिष्ट पंचांग

मासिक पंचांग

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पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा एवं पूर्वी भारत

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तमिलनाडु एवं दक्षिण भारत

ओडिया पंजिका

ओडिशा एवं पूर्वी भारत

मलयालम पंचांगम

केरल एवं दक्षिण भारत

मराठी पंचांग

महाराष्ट्र एवं गोवा

गुजराती पंचांग

गुजरात एवं पश्चिमी भारत

तेलुगु पंचांगम

आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना

नेपाली पात्रो

नेपाल एवं हिमालयी क्षेत्र

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