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ओडिया पंजिका — श्री जगन्नाथ मंदिर पंचांग एवं महाप्रभु नीति

ओडिशा एवं पूर्वी भारत • प्रामाणिक पंचांग • मंगलवार, 22 सितंबर 2026

लाइव खगोलीय गणना (आज)

मंगलवार, 22 सितंबर 2026

स्थान: नई दिल्लीLahiri: 24.2261°
तिथि

द्वादशी

शुक्ल पक्ष

नक्षत्र

श्रवण

पाद 4

योग

सुकर्मा

6/27

करण

बव

अर्ध तिथि

चंद्र राशि

मकर

290.14° निरयण

सूर्य राशि

कन्या

155.67° निरयण

ओड़िया सौर मास: आश्विन (Odia Month: Ashwina)
दैनिक संपूर्ण पंचांग देखें

ओडिया पंजिका — श्री जगन्नाथ मंदिर पंचांग एवं महाप्रभु नीति की मुख्य विशेषताएँ एवं गणितीय नियम

कोहिनूर, राधारमण एवं प्राचीन खादीरत्न पंजिका परंपराओं के अनुसार

पणा संक्रांति (महाविषुव संक्रांति / ओडिया नववर्ष)

श्री क्षेत्र पुरी की रथयात्रा, स्नान यात्रा और बहुड़ा यात्रा के सटीक मुहूर्त

मानबसा गुरुवार, प्रथमाष्टमी और रज पर्व की पावन तिथियाँ

प्रामाणिक विश्लेषण एवं विस्तृत मार्गदर्शिका

ओडिया पंजिका (ଓଡ଼ିଆ ପଞ୍ଜିକା) महाप्रभु श्री जगन्नाथ के चरणों में समर्पित ओडिशा की आध्यात्मिक धरोहर है। यह पंजिका पुरी श्रीमंदिर की सेवा-नीति से लेकर प्रत्येक ओडिया परिवार के दैनिक धार्मिक आचरण का नियमन करती है। ओडिया नववर्ष पणा संक्रांति पर आरंभ होता है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा का आयोजन इसी पंजिका के द्वारा निश्चित होता है। इसके अलावा मार्गशीर्ष में माता महालक्ष्मी की उपासना का मानबसा गुरुवार और कन्याओं का सम्मान पर्व प्रथमाष्टमी अत्यंत श्रद्धा से मनाए जाते हैं।

१. ओडिया पंजिका — श्री जगन्नाथ मंदिर पंचांग एवं महाप्रभु नीति का ऐतिहासिक उद्भव एवं शास्त्रीय प्रामाणिकता

ओडिया पंजिका (ଓଡ଼ିଆ ପଞ୍ଜିକା) श्रीक्षेत्र जगन्नाथ धाम पुरी के मुक्ति मंडप के शास्त्रीय अनुमोदन से संचालित होने वाली पावन काल-गणना है। महामहोपाध्याय चंद्रशेखर सिंह सामंत (पठानी सामंत) द्वारा रचित अमर ग्रंथ सिद्धांत दर्पण और ताड़पत्र पोथियों पर आधारित यह पंजिका महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा की दैनिक सेवा-नीति और द्वादश यात्राओं का साक्षात् आधार है। सनातन धर्म में समय की गणना केवल दिन और रात गिनने का साधन नहीं, अपितु जीवात्मा को परमात्मा की विराट सृष्टि के साथ एकाकार करने का आध्यात्मिक सेतु है। आचार्य वराहमिहिर ने बृहत्संहिता में लिखा है कि जिस प्रकार दीपक के बिना रात्रि और सूर्य के बिना आकाश अंधकारमय होता है, उसी प्रकार पंचांग के ज्ञान के बिना मनुष्य का जीवन दिशाहीन रहता है। ओडिया पंजिका — श्री जगन्नाथ मंदिर पंचांग एवं महाप्रभु नीति की प्रत्येक गणना प्राचीन ऋषि-परंपरा द्वारा अनुप्रमाणित है। काशी से कांचीपुरम तक के दैवज्ञों द्वारा परिष्कृत यह विज्ञान हमें ब्रह्मांडीय स्पंदनों के अनुकूल आचरण करने की प्रेरणा देता है।

२. ओडिया पंजिका — श्री जगन्नाथ मंदिर पंचांग एवं महाप्रभु नीति का गणितीय स्वरूप एवं खगोलीय नियम

ओडिया पंजिका सौरमान संक्रांति पर आधारित है, जिसका शुभारंभ पणा संक्रांति (महाविषुव संक्रांति / मेष संक्रमण) से होता है। पठानी सामंत ने मात्र दो बाँस की नलिकाओं (मान यंत्र) से ग्रहों के वेध लेकर जो खगोलीय सटीकता सिद्ध की थी, वह आज भी आधुनिक दूरबीनों के समकक्ष सिद्ध होती है। इसी गणना से श्रीमंदिर में द्वारफिता, मंगला आरती और पहंडी विजय के दंड-पल निर्धारित होते हैं।

प्रमुख खगोलीय समीकरण एवं सूत्र:

१. तिथि निर्धारण हेतु सूर्य-चंद्रमा का अंतर: $$\Delta\theta = λ_{\text{चंद्र}} - λ_{\text{सूर्य}}$$ $$\text{तिथि क्रमांक} = \frac{\Delta\theta}{१२^\circ} + १$$ यहाँ $λ$ चित्रापक्ष अयनांश से संस्कृत निरयण देशांतर है। २. लाहिरी अयनांश द्वारा निरयण रूपांतरण: सायन देशांतर से प्रति वर्ष लगभग ५०.२९ विकला की दर से घटने वाले अयनांश को घटाकर वास्तविक तारकीय राशियों का मान निकाला जाता है। ३. दिनमान एवं मुहूर्त विभाजन: सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल समय को १५ बराबर भागों में बाँटने पर एक वैदिक मुहूर्त प्राप्त होता है। इसी आधार पर ओडिया पंजिका — श्री जगन्नाथ मंदिर पंचांग एवं महाप्रभु नीति सेकंड-दर-सेकंड की सूक्ष्मता सुनिश्चित करता है।

३. ओडिया पंजिका — श्री जगन्नाथ मंदिर पंचांग एवं महाप्रभु नीति से जुड़े व्रत, पर्व एवं साधना विधान

ओडिया पंजिका के द्वारा ज्येष्ठ पूर्णिमा पर १०८ स्वर्ण घटों से श्री जगन्नाथ महास्नान (स्नान यात्रा), आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को विश्वविख्यात रथयात्रा, चंदन यात्रा, हेरा पंचमी, और अधिक आषाढ़ में होने वाले रहस्यमयी नवकालेवर का निर्णय होता है। प्रत्येक ओडिया गृहस्थ में मार्गशीर्ष के मानबसा गुरुवार (महालक्ष्मी व्रत), ज्येष्ठ का रज पर्व और ज्येष्ठ संतान का सम्मान पर्व प्रथमाष्टमी इसी पांजी से संपन्न होते हैं। वैदिक चिंतन में उपवास का अर्थ केवल अन्न त्यागना नहीं, अपितु 'ईश्वर के समीप वास करना' (उप + वास) है। जब हम ओडिया पंजिका — श्री जगन्नाथ मंदिर पंचांग एवं महाप्रभु नीति द्वारा निर्धारित शुद्ध तिथियों पर एकादशी अथवा प्रदोष व्रत रखते हैं, तो चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का हमारे मन और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

४. ओडिया पंजिका — श्री जगन्नाथ मंदिर पंचांग एवं महाप्रभु नीति की विशिष्ट संदर्भ तालिका

ओडिया पंजिका के १२ सौर मास एवं श्री जगन्नाथ महाप्रभु के प्रमुख उत्सव

क्र.ओडिया मास (ମାସ)संस्कृत नामसौर राशिश्रीमंदिर एवं ओडिया संस्कृति के प्रमुख महापर्व
बैशाख (ବୈଶାଖ)वैशाखमेषपणा संक्रांति (ओडिया नववर्ष), ४२ दिवसीय चंदन यात्रा
ज्येष्ठ (ଜ୍ୟେଷ୍ଠ)ज्येष्ठवृषभदेव स्नान पूर्णिमा (१०८ घट स्नान), अनवसर प्रारंभ
आषाढ़ (ଆଷାଢ଼)आषाढ़मिथुनश्रीगुंडिचा रथयात्रा, बहुड़ा यात्रा, सुना वेश (स्वर्ण दर्शन)
श्रावण (ଶ୍ରାବଣ)श्रावणकर्कचितालागी अमावस्या, झूलन यात्रा, गम्हा पूर्णिमा
भाद्रव (ଭାଦ୍ରବ)भाद्रपदसिंहश्रीकृष्ण जन्माष्टमी, नन्दोत्सव, नुआखाई (कृषि पर्व)
आश्विन (ଆଶ୍ୱିନ)आश्विनकन्यादुर्गा माधव पूजा, विजयादशमी, कुमार पूर्णिमा
कार्तिक (କାର୍ତ୍ତିକ)कार्तिकतुलाहविष्य व्रत, राधा दामोदर वेश, बोइत वंदना (सद्भव नौका पर्व)
मार्गशिर (ମାର୍ଗଶିର)मार्गशीर्षवृश्चिकमानबसा गुरुवार (लक्ष्मी पूजा), प्रथमाष्टमी
पौष (ପୌଷ)पौषधनुधनु संक्रांति (मुआँ भोग), देवाभिषेक (पुष्याभिषेक)
१०माघ (ମାଘ)माघमकरमकर संक्रांति, कोणार्क चंद्रभागा तीर्थ महास्नान
११फाल्गुन (ଫାଲ୍ଗୁନ)फाल्गुनकुंभदोल पूर्णिमा (फाग उत्सव एवं मुक्ति मंडप में नूतन पांजी पाठ)
१२चैत्र (ଚୈତ୍ର)चैत्रमीनश्रीराम नवमी, दंड नाच, वर्ष समापन स्नान
यह संदर्भ तालिका ओडिया पंजिका — श्री जगन्नाथ मंदिर पंचांग एवं महाप्रभु नीति के विशिष्ट गणित और क्षेत्रीय परंपराओं को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करती है।

५. वैदिक पंचांग की वृहद् संदर्भ तालिकाएँ

वैदिक पंचांग की महा-संदर्भ तालिकाएँ:

तालिका १: २७ नक्षत्र, उनके स्वामी एवं अधिष्ठाता देवता

क्र.नक्षत्र नामसंस्कृत नामअधिष्ठाता देवताक्रांतिवृत्त विस्तार
1Ashwiniअश्विनीAshwini Kumaras0.00° से 13.33°
2BharaniभरणीYama13.33° से 26.67°
3Krittikaकृत्तिकाAgni26.67° से 40.00°
4RohiniरोहिणीBrahma / Prajapati40.00° से 53.33°
5MrigashiraमृगशिराSoma (Chandra)53.33° से 66.67°
6Ardraआर्द्राRudra (Shiva)66.67° से 80.00°
7Punarvasuपुनर्वसुAditi80.00° से 93.33°
8Pushyaपुष्यBrihaspati93.33° से 106.66°
9Ashleshaआश्लेषाSarpa (Nagas)106.66° से 120.00°
10MaghaमघाPitris (Ancestors)120.00° से 133.33°
11Purva Phalguniपूर्वा फाल्गुनीBhaga133.33° से 146.66°
12Uttara Phalguniउत्तरा फाल्गुनीAryaman146.66° से 160.00°
13Hastaहस्तSavitr (Surya)160.00° से 173.33°
14Chitraचित्राVishwakarma173.33° से 186.66°
15Swatiस्वातीVayu186.66° से 200.00°
16VishakhaविशाखाIndragni200.00° से 213.33°
17AnuradhaअनुराधाMitra213.33° से 226.66°
18Jyeshthaज्येष्ठाIndra226.66° से 239.99°
19MulaमूलNirriti239.99° से 253.33°
20Purva Ashadhaपूर्वाषाढ़ाApas (Water)253.33° से 266.66°
21Uttara Ashadhaउत्तराषाढ़ाVishwadevas266.66° से 279.99°
22Shravanaश्रवणVishnu279.99° से 293.33°
23Dhanishtaधनिष्ठाVasus293.33° से 306.66°
24ShatabhishaशतभिषाVaruna306.66° से 319.99°
25Purva Bhadrapadaपूर्वा भाद्रपदAja Ekapada319.99° से 333.32°
26Uttara Bhadrapadaउत्तरा भाद्रपदAhirbudhnya333.32° से 346.66°
27RevatiरेवतीPushan346.66° से 359.99°

तालिका २: २७ योग एवं उनका शुभ-अशुभ स्वरूप

क्र.योग नामसंस्कृतस्वरूपकार्य उपयुक्तता
1Vishkambhaविष्कुम्भअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
2Pritiप्रीतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
3Ayushmanआयुष्मानशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
4Saubhagyaसौभाग्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
5Shobhanaशोभनशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
6Atigandaअतिगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
7Sukarmaसुकर्माशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
8Dhritiधृतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
9Shulaशूलअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
10Gandaगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
11Vriddhiवृद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
12Dhruvaध्रुवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
13Vyaghataव्याघातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
14Harshanaहर्षणशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
15Vajraवज्रअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
16Siddhiसिद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
17Vyatipataव्यतीपातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
18Variyanवरीयान्शुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
19Parighaपरिघअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
20Shivaशिवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
21Siddhaसिद्धशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
22Sadhyaसाध्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
23Shubhaशुभशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
24Shuklaशुक्लशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
25Brahmaब्रह्मशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
26Indraइन्द्रशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
27Vaidhritiवैधृतिअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम

तालिका ३: १५ तिथियाँ एवं उनके देवता

क्र.तिथिसंज्ञाअधिष्ठाताफल एवं प्रभाव
प्रतिपदानंदाअग्निनवीन बीज व कृषि कार्य
द्वितीयाभद्राब्रह्मायात्रा, विवाह एवं शिक्षा
तृतीयाजयागौरीशिल्प, संगीत एवं व्यापार
चतुर्थीरिक्तागणेशविघ्न निवारण एवं ऋणमुक्ति
पञ्चमीपूर्णासर्पनाग पूजा एवं स्वास्थ्य लाभ
षष्ठीनंदाकार्तिकेयपद-प्रतिष्ठा एवं यश
सप्तमीभद्रासूर्यवाहन क्रय एवं यात्रा
अष्टमीजयादुर्गा/शिवव्रत, संयम एवं शक्ति उपासना
नवमीरिक्तादुर्गा/रामशस्त्र पूजा एवं साधना
१०दशमीपूर्णायम/दिग्पालसत्कर्म एवं प्रतिष्ठा
११एकादशीनंदाश्री हरि विष्णुउपवास, आत्म-शुद्धि
१२द्वादशीभद्राविष्णुपारण, दान एवं होम
१३त्रयोदशीजयाकामदेव/शिवप्रदोष व्रत, मैत्री
१४चतुर्दशीरिक्ताभगवान शिवशिव आराधना, मंत्र सिद्धि
१५पूर्णिमा / अमावस्यापूर्णा / पितृचंद्र / पितृगणसत्यनारायण कथा / तर्पण

६. दोष परिहार, मुहूर्त निर्णय एवं व्यावहारिक आचार-संहिता

ओडिया पंजिका परंपरा में विष्टि (भद्रा) करण और कालवेला का विवाह व गृह निर्माण में कठोर परिहार किया जाता है। दोल पूर्णिमा की संध्या पर पुरी जगन्नाथ मंदिर के मुक्ति मंडप में विद्वत सभा द्वारा नूतन पंजिका का पाठ होता है, जहाँ आगामी संवत्सर के राजा और मंत्री ग्रहों के फलादेश का वाचन कर जन-कल्याण की कामना की जाती है।

मुहूर्त निर्णय के सार्वभौमिक नियम:

१. शुभ मुहूर्त के तीन आधार: रिक्ता तिथियों (४, ९, १४) का त्याग, वेध-रहित शुभ नक्षत्र का चयन, और लग्न केंद्र (१, ४, ७, १०) में शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र, बुध) की स्थिति। २. दोषों का आध्यात्मिक परिहार: यदि किसी अनिवार्य कार्य में पूर्ण शुद्ध लग्न न मिले, तो अभिजित मुहूर्त का चयन अथवा श्रीविष्णु सहस्रनाम का पाठ कर कार्य प्रारंभ करना श्रेयस्कर माना गया है। इस प्रकार ओडिया पंजिका — श्री जगन्नाथ मंदिर पंचांग एवं महाप्रभु नीति प्रत्येक साधक को वैज्ञानिक सटीकता और वैदिक पवित्रता से युक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है।

दैनिक चौघड़िया मुहूर्त (दिन एवं रात्रि)

अमृत, शुभ एवं लाभ श्रेष्ठ

किसी भी शुभ कार्य, यात्रा या नवीन अनुष्ठान को प्रारंभ करने से पूर्व चौघड़िया का विचार अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

दिन का चौघड़िया

लाभ (शुभ)12:39 am - 02:10 am
अमृत (शुभ)02:10 am - 03:41 am
काल (अशुभ)03:41 am - 05:12 am
शुभ (शुभ)05:12 am - 06:43 am
रोग (अशुभ)06:43 am - 08:14 am
उद्वेग (अशुभ)08:14 am - 09:45 am
चर (मध्यम)09:45 am - 11:15 am
लाभ (शुभ)11:15 am - 12:46 pm

रात्रि का चौघड़िया

उद्वेग (अशुभ)12:46 pm - 02:16 pm
चर (मध्यम)02:16 pm - 03:45 pm
लाभ (शुभ)03:45 pm - 05:14 pm
अमृत (शुभ)05:14 pm - 06:43 pm
काल (अशुभ)06:43 pm - 08:12 pm
शुभ (शुभ)08:12 pm - 09:42 pm
रोग (अशुभ)09:42 pm - 11:11 pm
उद्वेग (अशुभ)11:11 pm - 12:40 am

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) — ओडिया पंजिका — श्री जगन्नाथ मंदिर पंचांग एवं महाप्रभु नीति

प्रामाणिक ग्रंथों एवं वैदिक ज्योतिष के आधार पर दिए गए उत्तर

Frequently asked questions

ओडिया पंजिका का जगन्नाथ मंदिर से क्या संबंध है?

ओडिया पंजिका के आधार पर ही श्री जगन्नाथ मंदिर पुरी में महाप्रभु की नित्य सेवा, भोग और रथयात्रा जैसी सभी दिव्य नीतियों का समय निर्धारित होता है।

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