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बंगाली पंजिका — बांग्ला संवत, दुर्गा पूजा एवं शुद्ध निर्णय

पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा एवं पूर्वी भारत • प्रामाणिक पंचांग • मंगलवार, 22 सितंबर 2026

लाइव खगोलीय गणना (आज)

मंगलवार, 22 सितंबर 2026

स्थान: नई दिल्लीLahiri: 24.2261°
तिथि

एकादशी

शुक्ल पक्ष

नक्षत्र

उत्तराषाढ़ा

पाद 4

योग

अतिगण्ड

5/27

करण

वणिज

अर्ध तिथि

चंद्र राशि

मकर

285.83° निरयण

सूर्य राशि

कन्या

155.32° निरयण

बंगला सौर मास: आश्विन (Bengali Solar Month: Ashwin)
दैनिक संपूर्ण पंचांग देखें

बंगाली पंजिका — बांग्ला संवत, दुर्गा पूजा एवं शुद्ध निर्णय की मुख्य विशेषताएँ एवं गणितीय नियम

१२ बांग्ला मास: बैशाख से चैत्र तक की संपूर्ण पंजिका

श्री दुर्गा पूजा, महासप्तमी, महाअष्टमी, संधि पूजा एवं विजयादशमी के सटीक मुहूर्त

शुभ विवाह दिन, उपनयन एवं अन्नप्राशन के मांगलिक लग्न

काली पूजा, सरस्वती पूजा एवं पोइला बैशाख का पावन समय

प्रामाणिक विश्लेषण एवं विस्तृत मार्गदर्शिका

बंगाली पंजिका (বাংলা পঞ্জিকা) संपूर्ण विश्व के बंगाली समाज के लिए धर्म, संस्कृति और मांगलिक कर्मों का मार्गदर्शक ग्रंथ है। सूर्य सिद्धांत और दृक गणित के नियमों के आधार पर इसमें सूर्य और चंद्रमा के सूक्ष्म संचार का अंकन होता है। इस पंजिका का सबसे पावन पर्व दुर्गा पूजा है, जिसमें महासप्तमी नवपत्रिका प्रवेश, महाअष्टमी पुष्पांजलि, और ४८ मिनट की अत्यंत चमत्कारी संधि पूजा का समय पल-पल की सटीकता के साथ निकाला जाता है। इसके अतिरिक्त पोइला बैशाख, काली पूजा, और चैतन्य महाप्रभु के आविर्भाव दिवस का निर्धारण भी इसी से होता है।

१. बंगाली पंजिका — बांग्ला संवत, दुर्गा पूजा एवं शुद्ध निर्णय का ऐतिहासिक उद्भव एवं शास्त्रीय प्रामाणिकता

बंगाली पंजिका (বাংলা পঞ্জিকা) नवद्वीप के मूर्धन्य स्मार्त विद्वान रघुनंदन भट्टाचार्य (स्मृतितत्व के रचयिता) की खगोलीय परंपरा पर आधारित है। गुप्त प्रेस और मदन गुप्त पंजिका जैसी शताब्दियों पुरानी संस्थाओं द्वारा पोषित यह पंजिका सौर बंग संवत (५९४ ईस्वी) को सूर्य सिद्धांत के गणित के साथ जोड़ती है। सनातन धर्म में समय की गणना केवल दिन और रात गिनने का साधन नहीं, अपितु जीवात्मा को परमात्मा की विराट सृष्टि के साथ एकाकार करने का आध्यात्मिक सेतु है। आचार्य वराहमिहिर ने बृहत्संहिता में लिखा है कि जिस प्रकार दीपक के बिना रात्रि और सूर्य के बिना आकाश अंधकारमय होता है, उसी प्रकार पंचांग के ज्ञान के बिना मनुष्य का जीवन दिशाहीन रहता है। बंगाली पंजिका — बांग्ला संवत, दुर्गा पूजा एवं शुद्ध निर्णय की प्रत्येक गणना प्राचीन ऋषि-परंपरा द्वारा अनुप्रमाणित है। काशी से कांचीपुरम तक के दैवज्ञों द्वारा परिष्कृत यह विज्ञान हमें ब्रह्मांडीय स्पंदनों के अनुकूल आचरण करने की प्रेरणा देता है।

२. बंगाली पंजिका — बांग्ला संवत, दुर्गा पूजा एवं शुद्ध निर्णय का गणितीय स्वरूप एवं खगोलीय नियम

बंगाली पंजिका में मास परिवर्तन का नियम अत्यंत परिष्कृत है। संक्रांति यदि अपराह्न काल अथवा रात्रि में हो, तो शास्त्रोक्त नियमों के आधार पर निश्चित किया जाता है कि मास उसी दिन प्रारंभ होगा अथवा अगले दिन। दुर्गा पूजा में अष्टमी और नवमी के मिलन काल पर होने वाली ४८ मिनट की 'संधि पूजा' का निर्णय इसी सूक्ष्म गणित से होता है।

प्रमुख खगोलीय समीकरण एवं सूत्र:

१. तिथि निर्धारण हेतु सूर्य-चंद्रमा का अंतर: $$\Delta\theta = λ_{\text{चंद्र}} - λ_{\text{सूर्य}}$$ $$\text{तिथि क्रमांक} = \frac{\Delta\theta}{१२^\circ} + १$$ यहाँ $λ$ चित्रापक्ष अयनांश से संस्कृत निरयण देशांतर है। २. लाहिरी अयनांश द्वारा निरयण रूपांतरण: सायन देशांतर से प्रति वर्ष लगभग ५०.२९ विकला की दर से घटने वाले अयनांश को घटाकर वास्तविक तारकीय राशियों का मान निकाला जाता है। ३. दिनमान एवं मुहूर्त विभाजन: सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल समय को १५ बराबर भागों में बाँटने पर एक वैदिक मुहूर्त प्राप्त होता है। इसी आधार पर बंगाली पंजिका — बांग्ला संवत, दुर्गा पूजा एवं शुद्ध निर्णय सेकंड-दर-सेकंड की सूक्ष्मता सुनिश्चित करता है।

३. बंगाली पंजिका — बांग्ला संवत, दुर्गा पूजा एवं शुद्ध निर्णय से जुड़े व्रत, पर्व एवं साधना विधान

दुर्गा पूजा के सभी अंगों—षष्ठी बोधन, नवपत्रिका प्रवेश, महाअष्टमी पुष्पांजलि, कुमारी पूजा, संधि पूजा और सिंदूर खेला—का नियमन इसी पंजिका से होता है। इसके साथ ही कार्तिक अमावस्या की निशीथ काल व्यापिनी काली पूजा, सरस्वती पूजा, कोजागरी लक्ष्मी पूजा और पोइला बैशाख का निर्धारण होता है। वैदिक चिंतन में उपवास का अर्थ केवल अन्न त्यागना नहीं, अपितु 'ईश्वर के समीप वास करना' (उप + वास) है। जब हम बंगाली पंजिका — बांग्ला संवत, दुर्गा पूजा एवं शुद्ध निर्णय द्वारा निर्धारित शुद्ध तिथियों पर एकादशी अथवा प्रदोष व्रत रखते हैं, तो चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का हमारे मन और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

४. बंगाली पंजिका — बांग्ला संवत, दुर्गा पूजा एवं शुद्ध निर्णय की विशिष्ट संदर्भ तालिका

बंग संवत के १२ सौर मास एवं उनके अधिष्ठाता पर्व

क्र.बंगाली माससंस्कृत नामग्रेगोरियन समयसूर्य संक्रांतिप्रमुख उत्सव व पर्व
बैशाख (বৈশাখ)वैशाखमध्य अप्रैल - मध्य मईमेष संक्रांतिपोइला बैशाख, अक्षय तृतीया
ज्येष्ठ (জ্যৈষ্ঠ)ज्येष्ठमध्य मई - मध्य जूनवृषभ संक्रांतिजामाता षष्ठी, गंगा दशहरा
आषाढ़ (আষাঢ়)आषाढ़मध्य जून - मध्य जुलाईमिथुन संक्रांतिजगन्नाथ रथयात्रा, स्नान पूर्णिमा
श्रावण (শ্রাবণ)श्रावणमध्य जुलाई - मध्य अगस्तकर्क संक्रांतिझूलन यात्रा, मनसा पूजा
भाद्रपद (ভাদ্র)भाद्रपदमध्य अगस्त - मध्य सितंबरसिंह संक्रांतिश्रीकृष्ण जन्माष्टमी, नन्दोत्सव
आश्विन (আশ্বিন)आश्विनमध्य सितंबर - मध्य अक्टूबरकन्या संक्रांतिमहालया, श्रीदुर्गा पूजा, कोजागरी
कार्तिक (কার্তিক)कार्तिकमध्य अक्टूबर - मध्य नवंबरतुला संक्रांतिश्यामा (काली) पूजा, भ्रातृ द्वितीया
अग्रहायण (অগ্রহায়ণ)मार्गशीर्षमध्य नवंबर - मध्य दिसंबरवृश्चिक संक्रांतिनवान्न उत्सव, रास यात्रा
पौष (পৌষ)पौषमध्य दिसंबर - मध्य जनवरीधनु संक्रांतिपौष संक्रांति, गंगासागर मेला
१०माघ (মাঘ)माघमध्य जनवरी - मध्य फरवरीमकर संक्रांतिसरस्वती पूजा (श्रीपंचमी)
११फाल्गुन (ফাল্গুন)फाल्गुनमध्य फरवरी - मध्य मार्चकुंभ संक्रांतिदोल यात्रा (गौर पूर्णिमा), शिवरात्रि
१२चैत्र (চৈত্র)चैत्रमध्य मार्च - मध्य अप्रैलमीन संक्रांतिबसंती पूजा, गाजन, चरक पूजा
यह संदर्भ तालिका बंगाली पंजिका — बांग्ला संवत, दुर्गा पूजा एवं शुद्ध निर्णय के विशिष्ट गणित और क्षेत्रीय परंपराओं को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करती है।

५. वैदिक पंचांग की वृहद् संदर्भ तालिकाएँ

वैदिक पंचांग की महा-संदर्भ तालिकाएँ:

तालिका १: २७ नक्षत्र, उनके स्वामी एवं अधिष्ठाता देवता

क्र.नक्षत्र नामसंस्कृत नामअधिष्ठाता देवताक्रांतिवृत्त विस्तार
1Ashwiniअश्विनीAshwini Kumaras0.00° से 13.33°
2BharaniभरणीYama13.33° से 26.67°
3Krittikaकृत्तिकाAgni26.67° से 40.00°
4RohiniरोहिणीBrahma / Prajapati40.00° से 53.33°
5MrigashiraमृगशिराSoma (Chandra)53.33° से 66.67°
6Ardraआर्द्राRudra (Shiva)66.67° से 80.00°
7Punarvasuपुनर्वसुAditi80.00° से 93.33°
8Pushyaपुष्यBrihaspati93.33° से 106.66°
9Ashleshaआश्लेषाSarpa (Nagas)106.66° से 120.00°
10MaghaमघाPitris (Ancestors)120.00° से 133.33°
11Purva Phalguniपूर्वा फाल्गुनीBhaga133.33° से 146.66°
12Uttara Phalguniउत्तरा फाल्गुनीAryaman146.66° से 160.00°
13Hastaहस्तSavitr (Surya)160.00° से 173.33°
14Chitraचित्राVishwakarma173.33° से 186.66°
15Swatiस्वातीVayu186.66° से 200.00°
16VishakhaविशाखाIndragni200.00° से 213.33°
17AnuradhaअनुराधाMitra213.33° से 226.66°
18Jyeshthaज्येष्ठाIndra226.66° से 239.99°
19MulaमूलNirriti239.99° से 253.33°
20Purva Ashadhaपूर्वाषाढ़ाApas (Water)253.33° से 266.66°
21Uttara Ashadhaउत्तराषाढ़ाVishwadevas266.66° से 279.99°
22Shravanaश्रवणVishnu279.99° से 293.33°
23Dhanishtaधनिष्ठाVasus293.33° से 306.66°
24ShatabhishaशतभिषाVaruna306.66° से 319.99°
25Purva Bhadrapadaपूर्वा भाद्रपदAja Ekapada319.99° से 333.32°
26Uttara Bhadrapadaउत्तरा भाद्रपदAhirbudhnya333.32° से 346.66°
27RevatiरेवतीPushan346.66° से 359.99°

तालिका २: २७ योग एवं उनका शुभ-अशुभ स्वरूप

क्र.योग नामसंस्कृतस्वरूपकार्य उपयुक्तता
1Vishkambhaविष्कुम्भअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
2Pritiप्रीतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
3Ayushmanआयुष्मानशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
4Saubhagyaसौभाग्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
5Shobhanaशोभनशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
6Atigandaअतिगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
7Sukarmaसुकर्माशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
8Dhritiधृतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
9Shulaशूलअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
10Gandaगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
11Vriddhiवृद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
12Dhruvaध्रुवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
13Vyaghataव्याघातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
14Harshanaहर्षणशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
15Vajraवज्रअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
16Siddhiसिद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
17Vyatipataव्यतीपातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
18Variyanवरीयान्शुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
19Parighaपरिघअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
20Shivaशिवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
21Siddhaसिद्धशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
22Sadhyaसाध्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
23Shubhaशुभशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
24Shuklaशुक्लशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
25Brahmaब्रह्मशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
26Indraइन्द्रशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
27Vaidhritiवैधृतिअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम

तालिका ३: १५ तिथियाँ एवं उनके देवता

क्र.तिथिसंज्ञाअधिष्ठाताफल एवं प्रभाव
प्रतिपदानंदाअग्निनवीन बीज व कृषि कार्य
द्वितीयाभद्राब्रह्मायात्रा, विवाह एवं शिक्षा
तृतीयाजयागौरीशिल्प, संगीत एवं व्यापार
चतुर्थीरिक्तागणेशविघ्न निवारण एवं ऋणमुक्ति
पञ्चमीपूर्णासर्पनाग पूजा एवं स्वास्थ्य लाभ
षष्ठीनंदाकार्तिकेयपद-प्रतिष्ठा एवं यश
सप्तमीभद्रासूर्यवाहन क्रय एवं यात्रा
अष्टमीजयादुर्गा/शिवव्रत, संयम एवं शक्ति उपासना
नवमीरिक्तादुर्गा/रामशस्त्र पूजा एवं साधना
१०दशमीपूर्णायम/दिग्पालसत्कर्म एवं प्रतिष्ठा
११एकादशीनंदाश्री हरि विष्णुउपवास, आत्म-शुद्धि
१२द्वादशीभद्राविष्णुपारण, दान एवं होम
१३त्रयोदशीजयाकामदेव/शिवप्रदोष व्रत, मैत्री
१४चतुर्दशीरिक्ताभगवान शिवशिव आराधना, मंत्र सिद्धि
१५पूर्णिमा / अमावस्यापूर्णा / पितृचंद्र / पितृगणसत्यनारायण कथा / तर्पण

६. दोष परिहार, मुहूर्त निर्णय एवं व्यावहारिक आचार-संहिता

बंगाली विवाह में पंजिका के 'शुभ विवाह लग्न' का परीक्षण कालवेला, वारवेला और नक्षत्र वेध को देखकर किया जाता है। गुरु या शुक्र के अस्त होने पर कोई भी शुभ विवाह आयोजित नहीं किया जा सकता।

मुहूर्त निर्णय के सार्वभौमिक नियम:

१. शुभ मुहूर्त के तीन आधार: रिक्ता तिथियों (४, ९, १४) का त्याग, वेध-रहित शुभ नक्षत्र का चयन, और लग्न केंद्र (१, ४, ७, १०) में शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र, बुध) की स्थिति। २. दोषों का आध्यात्मिक परिहार: यदि किसी अनिवार्य कार्य में पूर्ण शुद्ध लग्न न मिले, तो अभिजित मुहूर्त का चयन अथवा श्रीविष्णु सहस्रनाम का पाठ कर कार्य प्रारंभ करना श्रेयस्कर माना गया है। इस प्रकार बंगाली पंजिका — बांग्ला संवत, दुर्गा पूजा एवं शुद्ध निर्णय प्रत्येक साधक को वैज्ञानिक सटीकता और वैदिक पवित्रता से युक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है।

दैनिक चौघड़िया मुहूर्त (दिन एवं रात्रि)

अमृत, शुभ एवं लाभ श्रेष्ठ

किसी भी शुभ कार्य, यात्रा या नवीन अनुष्ठान को प्रारंभ करने से पूर्व चौघड़िया का विचार अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

दिन का चौघड़िया

रोग (अशुभ)12:39 am - 02:10 am
उद्वेग (अशुभ)02:10 am - 03:41 am
चर (मध्यम)03:41 am - 05:12 am
लाभ (शुभ)05:12 am - 06:43 am
अमृत (शुभ)06:43 am - 08:14 am
काल (अशुभ)08:14 am - 09:45 am
शुभ (शुभ)09:45 am - 11:16 am
रोग (अशुभ)11:16 am - 12:48 pm

रात्रि का चौघड़िया

काल (अशुभ)12:48 pm - 02:17 pm
शुभ (शुभ)02:17 pm - 03:46 pm
रोग (अशुभ)03:46 pm - 05:14 pm
उद्वेग (अशुभ)05:14 pm - 06:43 pm
चर (मध्यम)06:43 pm - 08:12 pm
लाभ (शुभ)08:12 pm - 09:41 pm
अमृत (शुभ)09:41 pm - 11:10 pm
काल (अशुभ)11:10 pm - 12:39 am

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) — बंगाली पंजिका — बांग्ला संवत, दुर्गा पूजा एवं शुद्ध निर्णय

प्रामाणिक ग्रंथों एवं वैदिक ज्योतिष के आधार पर दिए गए उत्तर

Frequently asked questions

बंगाली पंजिका में संधि पूजा का क्या महत्व है?

अष्टमी तिथि के अंतिम २४ मिनट और नवमी तिथि के प्रथम २४ मिनट का संगम 'संधि काल' कहलाता है। इसी समय माँ दुर्गा ने चामुंडा रूप धारण कर चंड-मुंड का संहार किया था।

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