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पंचांग उपयोगिताएँ — राहु काल, चौघड़िया, होरा एवं दिशाशूल कैलकुलेटर

अखिल भारतीय / सार्वभौमिक • प्रामाणिक पंचांग • मंगलवार, 22 सितंबर 2026

लाइव खगोलीय गणना (आज)

मंगलवार, 22 सितंबर 2026

स्थान: नई दिल्लीLahiri: 24.2261°
तिथि

एकादशी

शुक्ल पक्ष

नक्षत्र

उत्तराषाढ़ा

पाद 4

योग

अतिगण्ड

5/27

करण

वणिज

अर्ध तिथि

चंद्र राशि

मकर

285.70° निरयण

सूर्य राशि

कन्या

155.31° निरयण

वैदिक मास: भाद्रपद (शुक्ल पक्ष) • विक्रम संवत 2083
दैनिक संपूर्ण पंचांग देखें

पंचांग उपयोगिताएँ — राहु काल, चौघड़िया, होरा एवं दिशाशूल कैलकुलेटर की मुख्य विशेषताएँ एवं गणितीय नियम

आपके शहर के अनुसार सटीक राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल

दिन और रात का पूर्ण चौघड़िया चक्र (अमृत, शुभ, लाभ, चर, रोग, काल, उद्वेग)

२४ घंटे की ग्रह होरा तालिका (सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु, मंगल)

दिशाशूल निर्देश: वार अनुसार वर्जित यात्रा दिशाएँ और शास्त्रोक्त उपाय

प्रामाणिक विश्लेषण एवं विस्तृत मार्गदर्शिका

पंचांग उपयोगिताएँ (पंचांग उपयोगिताएँ) वैदिक ऋषियों के काल-ज्ञान को दैनिक व्यावहारिक जीवन में उतारने का साधन हैं। ये समय-विभाजन प्रकृति और ग्रहों के उन चक्रीय प्रभावों पर आधारित हैं जो मानव मन और कार्य-परिणामों को प्रभावित करते हैं। इस पृष्ठ पर आप पाएंगे: १. राहु काल एवं यमगण्ड: अशुभ समय जब नवीन कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। २. चौघड़िया: अमृत, शुभ, लाभ, चर, रोग, काल और उद्वेग का समय। ३. ग्रह होरा: २४ घंटों में प्रत्येक ग्रह की विशिष्ट ऊर्जा का लाभ उठाकर कार्यों को सफल बनाना। ४. दिशाशूल परिहार: किस दिन किस दिशा में यात्रा वर्जित है और आवश्यक होने पर क्या उपाय (जैसे दही, गुड़, पान या धनिया) खाकर निकलना चाहिए।

१. पंचांग उपयोगिताएँ — राहु काल, चौघड़िया, होरा एवं दिशाशूल कैलकुलेटर का ऐतिहासिक उद्भव एवं शास्त्रीय प्रामाणिकता

पंचांग उपयोगिताएँ (पंचांग उपयोगिताएँ) वैदिक काल-विज्ञान के व्यावहारिक गणना-मॉड्यूल—जैसे राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल, दिन-रात का चौघड़िया, ग्रह होरा, और दिशाशूल—का प्रामाणिक संग्रह हैं। मुहूर्त चिंतामणि, कलामृत और नारद संहिता जैसे शास्त्रीय ग्रंथों पर आधारित ये उपकरण खगोलीय सिद्धांतों को दैनिक जीवन में सहजता से लागू करने की सुविधा देते हैं। सनातन धर्म में समय की गणना केवल दिन और रात गिनने का साधन नहीं, अपितु जीवात्मा को परमात्मा की विराट सृष्टि के साथ एकाकार करने का आध्यात्मिक सेतु है। आचार्य वराहमिहिर ने बृहत्संहिता में लिखा है कि जिस प्रकार दीपक के बिना रात्रि और सूर्य के बिना आकाश अंधकारमय होता है, उसी प्रकार पंचांग के ज्ञान के बिना मनुष्य का जीवन दिशाहीन रहता है। पंचांग उपयोगिताएँ — राहु काल, चौघड़िया, होरा एवं दिशाशूल कैलकुलेटर की प्रत्येक गणना प्राचीन ऋषि-परंपरा द्वारा अनुप्रमाणित है। काशी से कांचीपुरम तक के दैवज्ञों द्वारा परिष्कृत यह विज्ञान हमें ब्रह्मांडीय स्पंदनों के अनुकूल आचरण करने की प्रेरणा देता है।

२. पंचांग उपयोगिताएँ — राहु काल, चौघड़िया, होरा एवं दिशाशूल कैलकुलेटर का गणितीय स्वरूप एवं खगोलीय नियम

इन उपयोगिताओं का गणित स्थानीय दिनमान (सूर्यास्त - सूर्योदय) और रात्रिमान (अगले सूर्योदय - सूर्यास्त) के यथार्थ विभाजन पर आधारित है। दिनमान को ८ बराबर भागों में बाँटकर राहुकाल, यमगण्ड और चौघड़िया निकाले जाते हैं, तथा १२ बराबर भागों में बाँटकर दिन और रात की ग्रह होराओं की गणना की जाती है।

प्रमुख खगोलीय समीकरण एवं सूत्र:

१. तिथि निर्धारण हेतु सूर्य-चंद्रमा का अंतर: $$\Delta\theta = λ_{\text{चंद्र}} - λ_{\text{सूर्य}}$$ $$\text{तिथि क्रमांक} = \frac{\Delta\theta}{१२^\circ} + १$$ यहाँ $λ$ चित्रापक्ष अयनांश से संस्कृत निरयण देशांतर है। २. लाहिरी अयनांश द्वारा निरयण रूपांतरण: सायन देशांतर से प्रति वर्ष लगभग ५०.२९ विकला की दर से घटने वाले अयनांश को घटाकर वास्तविक तारकीय राशियों का मान निकाला जाता है। ३. दिनमान एवं मुहूर्त विभाजन: सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल समय को १५ बराबर भागों में बाँटने पर एक वैदिक मुहूर्त प्राप्त होता है। इसी आधार पर पंचांग उपयोगिताएँ — राहु काल, चौघड़िया, होरा एवं दिशाशूल कैलकुलेटर सेकंड-दर-सेकंड की सूक्ष्मता सुनिश्चित करता है।

३. पंचांग उपयोगिताएँ — राहु काल, चौघड़िया, होरा एवं दिशाशूल कैलकुलेटर से जुड़े व्रत, पर्व एवं साधना विधान

करोड़ों साधक और व्यवसायी इन उपकरणों का नित्य उपयोग करते हैं: राहु काल में कोई नवीन अनुबंध न करना; लाभ और अमृत चौघड़िया में व्यापारिक लेन-देन करना; सूर्य की होरा में प्रशासनिक कार्य और गुरु की होरा में विद्या-अध्ययन आरंभ करना; तथा दिशाशूल का विचार कर यात्रा के दोषों का शास्त्रोक्त परिहार करना। वैदिक चिंतन में उपवास का अर्थ केवल अन्न त्यागना नहीं, अपितु 'ईश्वर के समीप वास करना' (उप + वास) है। जब हम पंचांग उपयोगिताएँ — राहु काल, चौघड़िया, होरा एवं दिशाशूल कैलकुलेटर द्वारा निर्धारित शुद्ध तिथियों पर एकादशी अथवा प्रदोष व्रत रखते हैं, तो चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का हमारे मन और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

४. पंचांग उपयोगिताएँ — राहु काल, चौघड़िया, होरा एवं दिशाशूल कैलकुलेटर की विशिष्ट संदर्भ तालिका

सप्ताह के सातों दिनों का दिशाशूल एवं शास्त्रोक्त परिहार तालिका

वारस्वामी ग्रहवर्जित दिशा (दिशाशूल)दिशाशूल का प्रभावअनिवार्य यात्रा हेतु शास्त्रोक्त परिहार (खाकर निकलें)
रविवारसूर्यपश्चिम दिशानैर्ऋत्य / पश्चिमपान अथवा घी खाकर प्रस्थान करें
सोमवारचंद्रमापूर्व दिशाईशान / पूर्वदर्पण में अपना मुख देखकर अथवा दूध पीकर निकलें
मंगलवारमंगलउत्तर दिशावायव्य / उत्तरगुड़ अथवा धनिया खाकर प्रस्थान करें
बुधवारबुधउत्तर दिशाउत्तर / ईशानतिल अथवा हरी इलायची खाकर प्रस्थान करें
गुरुवारगुरुदक्षिण दिशाआग्नेय / दक्षिणपीली सरसों अथवा दही खाकर निकलें
शुक्रवारशुक्रपश्चिम दिशापश्चिम / नैर्ऋत्यजौ अथवा ताजा दही खाकर प्रस्थान करें
शनिवारशनिपूर्व दिशापूर्व / आग्नेयअदरक अथवा काली मिर्च का सेवन करके निकलें
यह संदर्भ तालिका पंचांग उपयोगिताएँ — राहु काल, चौघड़िया, होरा एवं दिशाशूल कैलकुलेटर के विशिष्ट गणित और क्षेत्रीय परंपराओं को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करती है।

५. वैदिक पंचांग की वृहद् संदर्भ तालिकाएँ

वैदिक पंचांग की महा-संदर्भ तालिकाएँ:

तालिका १: २७ नक्षत्र, उनके स्वामी एवं अधिष्ठाता देवता

क्र.नक्षत्र नामसंस्कृत नामअधिष्ठाता देवताक्रांतिवृत्त विस्तार
1Ashwiniअश्विनीAshwini Kumaras0.00° से 13.33°
2BharaniभरणीYama13.33° से 26.67°
3Krittikaकृत्तिकाAgni26.67° से 40.00°
4RohiniरोहिणीBrahma / Prajapati40.00° से 53.33°
5MrigashiraमृगशिराSoma (Chandra)53.33° से 66.67°
6Ardraआर्द्राRudra (Shiva)66.67° से 80.00°
7Punarvasuपुनर्वसुAditi80.00° से 93.33°
8Pushyaपुष्यBrihaspati93.33° से 106.66°
9Ashleshaआश्लेषाSarpa (Nagas)106.66° से 120.00°
10MaghaमघाPitris (Ancestors)120.00° से 133.33°
11Purva Phalguniपूर्वा फाल्गुनीBhaga133.33° से 146.66°
12Uttara Phalguniउत्तरा फाल्गुनीAryaman146.66° से 160.00°
13Hastaहस्तSavitr (Surya)160.00° से 173.33°
14Chitraचित्राVishwakarma173.33° से 186.66°
15Swatiस्वातीVayu186.66° से 200.00°
16VishakhaविशाखाIndragni200.00° से 213.33°
17AnuradhaअनुराधाMitra213.33° से 226.66°
18Jyeshthaज्येष्ठाIndra226.66° से 239.99°
19MulaमूलNirriti239.99° से 253.33°
20Purva Ashadhaपूर्वाषाढ़ाApas (Water)253.33° से 266.66°
21Uttara Ashadhaउत्तराषाढ़ाVishwadevas266.66° से 279.99°
22Shravanaश्रवणVishnu279.99° से 293.33°
23Dhanishtaधनिष्ठाVasus293.33° से 306.66°
24ShatabhishaशतभिषाVaruna306.66° से 319.99°
25Purva Bhadrapadaपूर्वा भाद्रपदAja Ekapada319.99° से 333.32°
26Uttara Bhadrapadaउत्तरा भाद्रपदAhirbudhnya333.32° से 346.66°
27RevatiरेवतीPushan346.66° से 359.99°

तालिका २: २७ योग एवं उनका शुभ-अशुभ स्वरूप

क्र.योग नामसंस्कृतस्वरूपकार्य उपयुक्तता
1Vishkambhaविष्कुम्भअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
2Pritiप्रीतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
3Ayushmanआयुष्मानशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
4Saubhagyaसौभाग्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
5Shobhanaशोभनशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
6Atigandaअतिगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
7Sukarmaसुकर्माशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
8Dhritiधृतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
9Shulaशूलअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
10Gandaगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
11Vriddhiवृद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
12Dhruvaध्रुवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
13Vyaghataव्याघातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
14Harshanaहर्षणशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
15Vajraवज्रअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
16Siddhiसिद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
17Vyatipataव्यतीपातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
18Variyanवरीयान्शुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
19Parighaपरिघअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
20Shivaशिवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
21Siddhaसिद्धशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
22Sadhyaसाध्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
23Shubhaशुभशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
24Shuklaशुक्लशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
25Brahmaब्रह्मशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
26Indraइन्द्रशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
27Vaidhritiवैधृतिअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम

तालिका ३: १५ तिथियाँ एवं उनके देवता

क्र.तिथिसंज्ञाअधिष्ठाताफल एवं प्रभाव
प्रतिपदानंदाअग्निनवीन बीज व कृषि कार्य
द्वितीयाभद्राब्रह्मायात्रा, विवाह एवं शिक्षा
तृतीयाजयागौरीशिल्प, संगीत एवं व्यापार
चतुर्थीरिक्तागणेशविघ्न निवारण एवं ऋणमुक्ति
पञ्चमीपूर्णासर्पनाग पूजा एवं स्वास्थ्य लाभ
षष्ठीनंदाकार्तिकेयपद-प्रतिष्ठा एवं यश
सप्तमीभद्रासूर्यवाहन क्रय एवं यात्रा
अष्टमीजयादुर्गा/शिवव्रत, संयम एवं शक्ति उपासना
नवमीरिक्तादुर्गा/रामशस्त्र पूजा एवं साधना
१०दशमीपूर्णायम/दिग्पालसत्कर्म एवं प्रतिष्ठा
११एकादशीनंदाश्री हरि विष्णुउपवास, आत्म-शुद्धि
१२द्वादशीभद्राविष्णुपारण, दान एवं होम
१३त्रयोदशीजयाकामदेव/शिवप्रदोष व्रत, मैत्री
१४चतुर्दशीरिक्ताभगवान शिवशिव आराधना, मंत्र सिद्धि
१५पूर्णिमा / अमावस्यापूर्णा / पितृचंद्र / पितृगणसत्यनारायण कथा / तर्पण

६. दोष परिहार, मुहूर्त निर्णय एवं व्यावहारिक आचार-संहिता

यदि दिशाशूल वाली दिशा में आपातकालीन यात्रा करनी पड़े, तो अपने इष्ट देव का स्मरण करते हुए पांच कदम पीछे हटें, भगवान गणेश का स्मरण करें, और निर्दिष्ट वस्तु (जैसे मंगलवार को गुड़ या गुरुवार को दही) ग्रहण कर प्रस्थान करें।

मुहूर्त निर्णय के सार्वभौमिक नियम:

१. शुभ मुहूर्त के तीन आधार: रिक्ता तिथियों (४, ९, १४) का त्याग, वेध-रहित शुभ नक्षत्र का चयन, और लग्न केंद्र (१, ४, ७, १०) में शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र, बुध) की स्थिति। २. दोषों का आध्यात्मिक परिहार: यदि किसी अनिवार्य कार्य में पूर्ण शुद्ध लग्न न मिले, तो अभिजित मुहूर्त का चयन अथवा श्रीविष्णु सहस्रनाम का पाठ कर कार्य प्रारंभ करना श्रेयस्कर माना गया है। इस प्रकार पंचांग उपयोगिताएँ — राहु काल, चौघड़िया, होरा एवं दिशाशूल कैलकुलेटर प्रत्येक साधक को वैज्ञानिक सटीकता और वैदिक पवित्रता से युक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है।

दैनिक चौघड़िया मुहूर्त (दिन एवं रात्रि)

अमृत, शुभ एवं लाभ श्रेष्ठ

किसी भी शुभ कार्य, यात्रा या नवीन अनुष्ठान को प्रारंभ करने से पूर्व चौघड़िया का विचार अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

दिन का चौघड़िया

रोग (अशुभ)12:39 am - 02:10 am
उद्वेग (अशुभ)02:10 am - 03:41 am
चर (मध्यम)03:41 am - 05:12 am
लाभ (शुभ)05:12 am - 06:43 am
अमृत (शुभ)06:43 am - 08:14 am
काल (अशुभ)08:14 am - 09:45 am
शुभ (शुभ)09:45 am - 11:16 am
रोग (अशुभ)11:16 am - 12:48 pm

रात्रि का चौघड़िया

काल (अशुभ)12:48 pm - 02:17 pm
शुभ (शुभ)02:17 pm - 03:46 pm
रोग (अशुभ)03:46 pm - 05:14 pm
उद्वेग (अशुभ)05:14 pm - 06:43 pm
चर (मध्यम)06:43 pm - 08:12 pm
लाभ (शुभ)08:12 pm - 09:41 pm
अमृत (शुभ)09:41 pm - 11:10 pm
काल (अशुभ)11:10 pm - 12:39 am

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) — पंचांग उपयोगिताएँ — राहु काल, चौघड़िया, होरा एवं दिशाशूल कैलकुलेटर

प्रामाणिक ग्रंथों एवं वैदिक ज्योतिष के आधार पर दिए गए उत्तर

Frequently asked questions

वैदिक ज्योतिष में 'ग्रह होरा' क्या है?

दिन और रात को १२-१२ भागों में विभाजित कर प्रत्येक घंटे का स्वामित्व एक ग्रह को सौंपा जाता है, जिसे 'होरा' कहते हैं। गुरु की होरा में विद्या, शुक्र की होरा में व्यापार और सूर्य की होरा में प्रशासनिक कार्य सिद्ध होते हैं।

अन्य क्षेत्रीय एवं विशिष्ट पंचांग

मासिक पंचांग

अखिल भारतीय / राष्ट्रीय

दैनिक पंचांग

अखिल भारतीय / राष्ट्रीय

असमिया पंजिका

असम एवं पूर्वोत्तर भारत

बंगाली पंजिका

पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा एवं पूर्वी भारत

तमिल पंचांगम

तमिलनाडु एवं दक्षिण भारत

ओडिया पंजिका

ओडिशा एवं पूर्वी भारत

मलयालम पंचांगम

केरल एवं दक्षिण भारत

मराठी पंचांग

महाराष्ट्र एवं गोवा

गुजराती पंचांग

गुजरात एवं पश्चिमी भारत

कन्नड़ पंचांग

कर्नाटक एवं दक्षिण भारत

तेलुगु पंचांगम

आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना

नेपाली पात्रो

नेपाल एवं हिमालयी क्षेत्र

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चंद्रबलम

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विंछुड़ो (Vinchudo)

गुजरात, राजस्थान एवं पश्चिमी भारत

नक्षत्र

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