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चंद्रबलम — आपकी जन्म राशि से चंद्रमा का शुभ-अशुभ बल

वैदिक ज्योतिष / गोचर फल • प्रामाणिक पंचांग • मंगलवार, 22 सितंबर 2026

लाइव खगोलीय गणना (आज)

मंगलवार, 22 सितंबर 2026

स्थान: नई दिल्लीLahiri: 24.2261°
तिथि

एकादशी

शुक्ल पक्ष

नक्षत्र

उत्तराषाढ़ा

पाद 4

योग

अतिगण्ड

5/27

करण

वणिज

अर्ध तिथि

चंद्र राशि

मकर

287.69° निरयण

सूर्य राशि

कन्या

155.47° निरयण

वर्तमान गोचर चंद्र: मकर राशि (Native Moon 1, 3, 6, 7, 10, 11 are Auspicious)
दैनिक संपूर्ण पंचांग देखें

चंद्रबलम — आपकी जन्म राशि से चंद्रमा का शुभ-अशुभ बल की मुख्य विशेषताएँ एवं गणितीय नियम

जन्म राशि से गोचरस्थ चंद्रमा की स्थिति का सूक्ष्म विश्लेषण (१ से १२ भाव)

शुभ चंद्रबल भाव: १, ३, ६, ७, १०, ११

सावधानी भाव: अष्टम चंद्रमा (अष्टम चंद्र दोष) एवं द्वादश चंद्रमा

चंद्रबल कमजोर होने पर शुभ कार्य करने हेतु शास्त्रोक्त उपाय एवं होरा ज्ञान

प्रामाणिक विश्लेषण एवं विस्तृत मार्गदर्शिका

चंद्रबलम (चंद्रबलम) किसी भी दिन व्यक्ति के मानसिक सामर्थ्य, उत्साह और भाग्य का आकलन करने का वैदिक पैमाना है। आचार्य वराहमिहिर के अनुसार सूर्य जहाँ बाह्य अधिकार देता है, वहीं चंद्रमा आंतरिक शांति और निर्णय क्षमता का स्वामी है। जब गोचर का चंद्रमा आपकी जन्म राशि से १, ३, ६, ७, १० या ११वें भाव में होता है, तब पूर्ण चंद्रबल मिलता है। इस समय किए गए कार्य शीघ्र फलित होते हैं। इसके विपरीत जब चंद्रमा जन्म राशि से आठवें भाव (अष्टम चंद्रमा) में हो, तो नया जोखिम न लेकर भगवान शिव या हनुमान जी की आराधना करना श्रेयस्कर होता है।

१. चंद्रबलम — आपकी जन्म राशि से चंद्रमा का शुभ-अशुभ बल का ऐतिहासिक उद्भव एवं शास्त्रीय प्रामाणिकता

चंद्रबलम (चंद्रबलम) वैदिक मुहूर्त एवं प्रश्न ज्योतिष का आधार स्तंभ है, जिसका विस्तृत विवेचन आचार्य वराहमिहिर ने बृहज्जातक और कालिदास ने कलामृत में किया है। 'चंद्रमा मनसो जातः' के वैदिक सिद्धांत के अनुसार चंद्रमा मनुष्य के मन, अंतःकरण और निर्णय क्षमता का अधिष्ठाता है। चंद्रबल यह मापता है कि गोचरस्थ चंद्रमा आज आपके मन का पोषण कर रहा है अथवा उसमें भटकाव ला रहा है। सनातन धर्म में समय की गणना केवल दिन और रात गिनने का साधन नहीं, अपितु जीवात्मा को परमात्मा की विराट सृष्टि के साथ एकाकार करने का आध्यात्मिक सेतु है। आचार्य वराहमिहिर ने बृहत्संहिता में लिखा है कि जिस प्रकार दीपक के बिना रात्रि और सूर्य के बिना आकाश अंधकारमय होता है, उसी प्रकार पंचांग के ज्ञान के बिना मनुष्य का जीवन दिशाहीन रहता है। चंद्रबलम — आपकी जन्म राशि से चंद्रमा का शुभ-अशुभ बल की प्रत्येक गणना प्राचीन ऋषि-परंपरा द्वारा अनुप्रमाणित है। काशी से कांचीपुरम तक के दैवज्ञों द्वारा परिष्कृत यह विज्ञान हमें ब्रह्मांडीय स्पंदनों के अनुकूल आचरण करने की प्रेरणा देता है।

२. चंद्रबलम — आपकी जन्म राशि से चंद्रमा का शुभ-अशुभ बल का गणितीय स्वरूप एवं खगोलीय नियम

चंद्रबल की गणना जन्म राशि से गोचरस्थ चंद्रमा की भाव स्थिति ($N$) गिनकर की जाती है। यदि गोचर का चंद्रमा जन्म राशि से १, ३, ६, ७, १० या ११वें भाव में हो, तो पूर्ण शुभ चंद्रबल प्राप्त होता है। जब चंद्रमा जन्म राशि से ८वें भाव में (अष्टम चंद्रमा) गोचर करता है, तो यह मानसिक अशांति, दुर्घटना और कार्यों में अवरोध लाता है, अतः इसमें कोई भी नया अनुबंध या यात्रा वर्जित होती है।

प्रमुख खगोलीय समीकरण एवं सूत्र:

१. तिथि निर्धारण हेतु सूर्य-चंद्रमा का अंतर: $$\Delta\theta = λ_{\text{चंद्र}} - λ_{\text{सूर्य}}$$ $$\text{तिथि क्रमांक} = \frac{\Delta\theta}{१२^\circ} + १$$ यहाँ $λ$ चित्रापक्ष अयनांश से संस्कृत निरयण देशांतर है। २. लाहिरी अयनांश द्वारा निरयण रूपांतरण: सायन देशांतर से प्रति वर्ष लगभग ५०.२९ विकला की दर से घटने वाले अयनांश को घटाकर वास्तविक तारकीय राशियों का मान निकाला जाता है। ३. दिनमान एवं मुहूर्त विभाजन: सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल समय को १५ बराबर भागों में बाँटने पर एक वैदिक मुहूर्त प्राप्त होता है। इसी आधार पर चंद्रबलम — आपकी जन्म राशि से चंद्रमा का शुभ-अशुभ बल सेकंड-दर-सेकंड की सूक्ष्मता सुनिश्चित करता है।

३. चंद्रबलम — आपकी जन्म राशि से चंद्रमा का शुभ-अशुभ बल से जुड़े व्रत, पर्व एवं साधना विधान

चंद्रबल का विचार नवीन व्यापार, रजिस्ट्री, गृह-प्रवेश, सर्जरी, यात्रा और विवाह लग्न के निर्धारण में अनिवार्य रूप से किया जाता है। यदि आपातकाल में चंद्रबल कमजोर हो, तो भगवान शिव का दुग्धाभिषेक, ॐ सों सोमाय नमः मंत्र का जप, अथवा चावल-शक्कर का दान करने से चंद्र दोष का शमन होता है। वैदिक चिंतन में उपवास का अर्थ केवल अन्न त्यागना नहीं, अपितु 'ईश्वर के समीप वास करना' (उप + वास) है। जब हम चंद्रबलम — आपकी जन्म राशि से चंद्रमा का शुभ-अशुभ बल द्वारा निर्धारित शुद्ध तिथियों पर एकादशी अथवा प्रदोष व्रत रखते हैं, तो चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का हमारे मन और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

४. चंद्रबलम — आपकी जन्म राशि से चंद्रमा का शुभ-अशुभ बल की विशिष्ट संदर्भ तालिका

जन्म राशि से गोचरस्थ चंद्रमा के १२ भावों का संपूर्ण शुभाशुभ फल

जन्म राशि से गोचर स्थितिशुभाशुभ संज्ञाशास्त्रीय ज्योतिषीय फलअनुशंसित कार्य एवं आचरण
प्रथम भाव (जन्म चंद्र)मिश्रित / शुभशारीरिक कांति, सम्मान, स्वादिष्ट भोजन, भावुकताव्यक्तिगत भेंट, कला, आमोद-प्रमोद
द्वितीय भावमध्यम / सावधानीव्यर्थ व्यय, कटु वाणी का भय, नेत्र कष्टशांति, आंतरिक चिंतन, आर्थिक नियंत्रण
तृतीय भावपरम शुभ (विजय)पराक्रम वृद्धि, शत्रुओं पर विजय, धन लाभ, सफल यात्रानवीन व्यापार प्रारंभ, यात्रा, अनुबंध
चतुर्थ भावअशुभ / अवरोधगृह कलह, वाहन कष्ट, मन में अशांतिविश्राम, ध्यान, गृह में मौन रहना
पंचम भावसावधानीबुद्धि भ्रम, संतान से मतभेद, सट्टे में हानिमंत्र जप, स्वाध्याय, ईष्ट आराधना
षष्ठ भावअत्यंत शुभ (आरोग्य)रोग-ऋण-शत्रु का नाश, शारीरिक स्फूर्ति, कार्य सिद्धिऋण मुक्ति, कोर्ट-कचहरी में विजय, रोगोपचार
सप्तम भावपरम शुभ (सौख्य)दांपत्य सुख, मधुर यात्राएँ, व्यापारिक लाभविवाह, साझेदारी, महत्वपूर्ण वार्ता
अष्टम भाव (अष्टम चंद्र)घोर अशुभ (कष्ट)मानसिक संत्रास, धन हानि, दुर्घटना, कार्यों में बाधानए कार्य सर्वथा टालें; केवल महामृत्युंजय जप करें
नवम भावमध्यमभाग्य में विलंब, वरिष्ठों से मतभेद, थकावटतीर्थ यात्रा, गुरु सेवा, दान-पुण्य
दशम भावअत्यंत शुभ (प्रतिष्ठा)पदोन्नति, राज-सम्मान, व्यवसाय में भारी सफलतानवीन पदभार ग्रहण, साक्षात्कार, व्यापार विस्तार
एकादश भावसर्वोत्तम (लाभ)विपुल धन लाभ, मित्रों का सहयोग, सर्व मनोकामना सिद्धिबड़े निवेश, गृह प्रवेश, भव्य शुभारंभ
द्वादश भावव्यय / शिथिलताअनिद्रा, धन व्यय, शारीरिक थकावटदान, आध्यात्मिक एकांत, विदेशी कार्य
यह संदर्भ तालिका चंद्रबलम — आपकी जन्म राशि से चंद्रमा का शुभ-अशुभ बल के विशिष्ट गणित और क्षेत्रीय परंपराओं को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करती है।

५. वैदिक पंचांग की वृहद् संदर्भ तालिकाएँ

वैदिक पंचांग की महा-संदर्भ तालिकाएँ:

तालिका १: २७ नक्षत्र, उनके स्वामी एवं अधिष्ठाता देवता

क्र.नक्षत्र नामसंस्कृत नामअधिष्ठाता देवताक्रांतिवृत्त विस्तार
1Ashwiniअश्विनीAshwini Kumaras0.00° से 13.33°
2BharaniभरणीYama13.33° से 26.67°
3Krittikaकृत्तिकाAgni26.67° से 40.00°
4RohiniरोहिणीBrahma / Prajapati40.00° से 53.33°
5MrigashiraमृगशिराSoma (Chandra)53.33° से 66.67°
6Ardraआर्द्राRudra (Shiva)66.67° से 80.00°
7Punarvasuपुनर्वसुAditi80.00° से 93.33°
8Pushyaपुष्यBrihaspati93.33° से 106.66°
9Ashleshaआश्लेषाSarpa (Nagas)106.66° से 120.00°
10MaghaमघाPitris (Ancestors)120.00° से 133.33°
11Purva Phalguniपूर्वा फाल्गुनीBhaga133.33° से 146.66°
12Uttara Phalguniउत्तरा फाल्गुनीAryaman146.66° से 160.00°
13Hastaहस्तSavitr (Surya)160.00° से 173.33°
14Chitraचित्राVishwakarma173.33° से 186.66°
15Swatiस्वातीVayu186.66° से 200.00°
16VishakhaविशाखाIndragni200.00° से 213.33°
17AnuradhaअनुराधाMitra213.33° से 226.66°
18Jyeshthaज्येष्ठाIndra226.66° से 239.99°
19MulaमूलNirriti239.99° से 253.33°
20Purva Ashadhaपूर्वाषाढ़ाApas (Water)253.33° से 266.66°
21Uttara Ashadhaउत्तराषाढ़ाVishwadevas266.66° से 279.99°
22Shravanaश्रवणVishnu279.99° से 293.33°
23Dhanishtaधनिष्ठाVasus293.33° से 306.66°
24ShatabhishaशतभिषाVaruna306.66° से 319.99°
25Purva Bhadrapadaपूर्वा भाद्रपदAja Ekapada319.99° से 333.32°
26Uttara Bhadrapadaउत्तरा भाद्रपदAhirbudhnya333.32° से 346.66°
27RevatiरेवतीPushan346.66° से 359.99°

तालिका २: २७ योग एवं उनका शुभ-अशुभ स्वरूप

क्र.योग नामसंस्कृतस्वरूपकार्य उपयुक्तता
1Vishkambhaविष्कुम्भअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
2Pritiप्रीतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
3Ayushmanआयुष्मानशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
4Saubhagyaसौभाग्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
5Shobhanaशोभनशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
6Atigandaअतिगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
7Sukarmaसुकर्माशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
8Dhritiधृतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
9Shulaशूलअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
10Gandaगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
11Vriddhiवृद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
12Dhruvaध्रुवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
13Vyaghataव्याघातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
14Harshanaहर्षणशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
15Vajraवज्रअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
16Siddhiसिद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
17Vyatipataव्यतीपातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
18Variyanवरीयान्शुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
19Parighaपरिघअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
20Shivaशिवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
21Siddhaसिद्धशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
22Sadhyaसाध्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
23Shubhaशुभशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
24Shuklaशुक्लशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
25Brahmaब्रह्मशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
26Indraइन्द्रशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
27Vaidhritiवैधृतिअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम

तालिका ३: १५ तिथियाँ एवं उनके देवता

क्र.तिथिसंज्ञाअधिष्ठाताफल एवं प्रभाव
प्रतिपदानंदाअग्निनवीन बीज व कृषि कार्य
द्वितीयाभद्राब्रह्मायात्रा, विवाह एवं शिक्षा
तृतीयाजयागौरीशिल्प, संगीत एवं व्यापार
चतुर्थीरिक्तागणेशविघ्न निवारण एवं ऋणमुक्ति
पञ्चमीपूर्णासर्पनाग पूजा एवं स्वास्थ्य लाभ
षष्ठीनंदाकार्तिकेयपद-प्रतिष्ठा एवं यश
सप्तमीभद्रासूर्यवाहन क्रय एवं यात्रा
अष्टमीजयादुर्गा/शिवव्रत, संयम एवं शक्ति उपासना
नवमीरिक्तादुर्गा/रामशस्त्र पूजा एवं साधना
१०दशमीपूर्णायम/दिग्पालसत्कर्म एवं प्रतिष्ठा
११एकादशीनंदाश्री हरि विष्णुउपवास, आत्म-शुद्धि
१२द्वादशीभद्राविष्णुपारण, दान एवं होम
१३त्रयोदशीजयाकामदेव/शिवप्रदोष व्रत, मैत्री
१४चतुर्दशीरिक्ताभगवान शिवशिव आराधना, मंत्र सिद्धि
१५पूर्णिमा / अमावस्यापूर्णा / पितृचंद्र / पितृगणसत्यनारायण कथा / तर्पण

६. दोष परिहार, मुहूर्त निर्णय एवं व्यावहारिक आचार-संहिता

यदि अष्टम चंद्रमा के समय कोई अपरिहार्य यात्रा या कार्य करना पड़े, तो चांदी का चौकोर टुकड़ा अपने पास रखें, घर से निकलते समय दही-शक्कर ग्रहण करें, और ॐ नमः शिवाय का ११ बार जप कर प्रस्थान करें।

मुहूर्त निर्णय के सार्वभौमिक नियम:

१. शुभ मुहूर्त के तीन आधार: रिक्ता तिथियों (४, ९, १४) का त्याग, वेध-रहित शुभ नक्षत्र का चयन, और लग्न केंद्र (१, ४, ७, १०) में शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र, बुध) की स्थिति। २. दोषों का आध्यात्मिक परिहार: यदि किसी अनिवार्य कार्य में पूर्ण शुद्ध लग्न न मिले, तो अभिजित मुहूर्त का चयन अथवा श्रीविष्णु सहस्रनाम का पाठ कर कार्य प्रारंभ करना श्रेयस्कर माना गया है। इस प्रकार चंद्रबलम — आपकी जन्म राशि से चंद्रमा का शुभ-अशुभ बल प्रत्येक साधक को वैज्ञानिक सटीकता और वैदिक पवित्रता से युक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है।

दैनिक चौघड़िया मुहूर्त (दिन एवं रात्रि)

अमृत, शुभ एवं लाभ श्रेष्ठ

किसी भी शुभ कार्य, यात्रा या नवीन अनुष्ठान को प्रारंभ करने से पूर्व चौघड़िया का विचार अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

दिन का चौघड़िया

रोग (अशुभ)12:39 am - 02:10 am
उद्वेग (अशुभ)02:10 am - 03:41 am
चर (मध्यम)03:41 am - 05:12 am
लाभ (शुभ)05:12 am - 06:43 am
अमृत (शुभ)06:43 am - 08:14 am
काल (अशुभ)08:14 am - 09:45 am
शुभ (शुभ)09:45 am - 11:16 am
रोग (अशुभ)11:16 am - 12:48 pm

रात्रि का चौघड़िया

काल (अशुभ)12:48 pm - 02:17 pm
शुभ (शुभ)02:17 pm - 03:46 pm
रोग (अशुभ)03:46 pm - 05:14 pm
उद्वेग (अशुभ)05:14 pm - 06:43 pm
चर (मध्यम)06:43 pm - 08:12 pm
लाभ (शुभ)08:12 pm - 09:41 pm
अमृत (शुभ)09:41 pm - 11:10 pm
काल (अशुभ)11:10 pm - 12:39 am

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) — चंद्रबलम — आपकी जन्म राशि से चंद्रमा का शुभ-अशुभ बल

प्रामाणिक ग्रंथों एवं वैदिक ज्योतिष के आधार पर दिए गए उत्तर

Frequently asked questions

मुहूर्त में चंद्रबल का क्या महत्व है?

शास्त्रों में 'चंद्रमा मनसो जातः' कहा गया है। यदि गोचर में चंद्रबल कमजोर हो (विशेषकर जन्म राशि से आठवें भाव में 'अष्टम चंद्रमा'), तो मानसिक भ्रम और विघ्न की संभावना रहती है। शुभ चंद्रबल कार्य की सिद्धि सुनिश्चित करता है।

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