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नक्षत्र — २७ वैदिक नक्षत्र, देवता, पाद एवं ताराबलम

वैदिक ज्योतिष • प्रामाणिक पंचांग • मंगलवार, 22 सितंबर 2026

लाइव खगोलीय गणना (आज)

मंगलवार, 22 सितंबर 2026

स्थान: नई दिल्लीLahiri: 24.2261°
तिथि

द्वादशी

शुक्ल पक्ष

नक्षत्र

श्रवण

पाद 4

योग

सुकर्मा

6/27

करण

बव

अर्ध तिथि

चंद्र राशि

मकर

289.19° निरयण

सूर्य राशि

कन्या

155.59° निरयण

वैदिक मास: भाद्रपद (शुक्ल पक्ष) • विक्रम संवत 2083
दैनिक संपूर्ण पंचांग देखें

नक्षत्र — २७ वैदिक नक्षत्र, देवता, पाद एवं ताराबलम की मुख्य विशेषताएँ एवं गणितीय नियम

चंद्रमा की सटीक स्थिति के आधार पर वर्तमान नक्षत्र और पाद (१, २, ३, ४)

प्रत्येक नक्षत्र के इष्ट देवता, स्वामी ग्रह और गण (देव, मनुष्य, राक्षस)

दैनिक ताराबल (जन्म, संपत, विपत, क्षेम, प्रत्यक, साधन, नैधन, मित्र, परम मित्र)

नक्षत्र अनुसार शुभ कार्यों की सूची (पुष्य, रोहिणी, स्वाती, श्रवण आदि)

प्रामाणिक विश्लेषण एवं विस्तृत मार्गदर्शिका

२७ नक्षत्र (नक्षत्र) वैदिक ज्योतिष की सबसे सूक्ष्म और दिव्य धारा हैं। जहाँ पाश्चात्य ज्योतिष मात्र १२ सूर्य राशियों तक सीमित है, वहीं वेद-पुराणों में चंद्रमा की २७ नक्षत्र-पत्नियों के प्रभाव को मानव जीवन का नियामक माना गया है। प्रत्येक नक्षत्र के चार पाद होते हैं। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा गया है, जिसमें किया गया कोई भी शुभ कार्य चिरस्थायी समृद्धि देता है। प्रतिदिन के नक्षत्र से अपना ताराबल (संपत, क्षेम, साधन, मित्र) जानकर आप अपने व्यापार, साधना और परिवार के लिए सर्वोत्तम समय का चयन कर सकते हैं।

१. नक्षत्र — २७ वैदिक नक्षत्र, देवता, पाद एवं ताराबलम का ऐतिहासिक उद्भव एवं शास्त्रीय प्रामाणिकता

वैदिक नक्षत्र विज्ञान ऋग्वेद, यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता) और अथर्ववेद में वर्णित भारतीय ज्योतिष का सर्वाधिक सूक्ष्म अंग है। क्रांतिवृत्त के ३६० अंशों को २७ दिव्य तारा-समूहों (एवं २८वें अभिजित) में विभाजित करने वाला यह विज्ञान चंद्र देव की २७ पत्नियों के रूप में मानवीय चेतना और प्रारब्ध के गूढ़ रहस्यों को उद्घाटित करता है। सनातन धर्म में समय की गणना केवल दिन और रात गिनने का साधन नहीं, अपितु जीवात्मा को परमात्मा की विराट सृष्टि के साथ एकाकार करने का आध्यात्मिक सेतु है। आचार्य वराहमिहिर ने बृहत्संहिता में लिखा है कि जिस प्रकार दीपक के बिना रात्रि और सूर्य के बिना आकाश अंधकारमय होता है, उसी प्रकार पंचांग के ज्ञान के बिना मनुष्य का जीवन दिशाहीन रहता है। नक्षत्र — २७ वैदिक नक्षत्र, देवता, पाद एवं ताराबलम की प्रत्येक गणना प्राचीन ऋषि-परंपरा द्वारा अनुप्रमाणित है। काशी से कांचीपुरम तक के दैवज्ञों द्वारा परिष्कृत यह विज्ञान हमें ब्रह्मांडीय स्पंदनों के अनुकूल आचरण करने की प्रेरणा देता है।

२. नक्षत्र — २७ वैदिक नक्षत्र, देवता, पाद एवं ताराबलम का गणितीय स्वरूप एवं खगोलीय नियम

प्रत्येक नक्षत्र क्रांतिवृत्त के ठीक १३ अंश २० कला (८०० कला) का विस्तार रखता है। प्रत्येक नक्षत्र को चार पाद (प्रत्येक ३ अंश २० कला) में बाँटा गया है, जिससे संपूर्ण राशि चक्र में कुल १०८ पाद बनते हैं—यही १०८ की संख्या हमारी जप माला के मनकों का आधार है। इसमें जन्म नक्षत्र से दैनिक ताराबल (९ ताराओं का चक्र) की गणना की जाती है।

प्रमुख खगोलीय समीकरण एवं सूत्र:

१. तिथि निर्धारण हेतु सूर्य-चंद्रमा का अंतर: $$\Delta\theta = λ_{\text{चंद्र}} - λ_{\text{सूर्य}}$$ $$\text{तिथि क्रमांक} = \frac{\Delta\theta}{१२^\circ} + १$$ यहाँ $λ$ चित्रापक्ष अयनांश से संस्कृत निरयण देशांतर है। २. लाहिरी अयनांश द्वारा निरयण रूपांतरण: सायन देशांतर से प्रति वर्ष लगभग ५०.२९ विकला की दर से घटने वाले अयनांश को घटाकर वास्तविक तारकीय राशियों का मान निकाला जाता है। ३. दिनमान एवं मुहूर्त विभाजन: सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल समय को १५ बराबर भागों में बाँटने पर एक वैदिक मुहूर्त प्राप्त होता है। इसी आधार पर नक्षत्र — २७ वैदिक नक्षत्र, देवता, पाद एवं ताराबलम सेकंड-दर-सेकंड की सूक्ष्मता सुनिश्चित करता है।

३. नक्षत्र — २७ वैदिक नक्षत्र, देवता, पाद एवं ताराबलम से जुड़े व्रत, पर्व एवं साधना विधान

वैदिक संस्कारों में नक्षत्रों का सर्वोच्च स्थान है: पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा गया है, जिसमें स्वर्ण क्रय, गृह प्रवेश और विद्यारंभ अक्षय फल देता है; रोहिणी विवाह एवं कृषि हेतु; स्वाती यात्रा एवं व्यापार हेतु; तथा श्रवण गुरु दीक्षा एवं भागवत श्रवण हेतु श्रेष्ठ है। दैनिक ताराबल से व्यक्ति जान सकता है कि आज का नक्षत्र उसके लिए संपत, क्षेम, साधन या नैधन तारा है। वैदिक चिंतन में उपवास का अर्थ केवल अन्न त्यागना नहीं, अपितु 'ईश्वर के समीप वास करना' (उप + वास) है। जब हम नक्षत्र — २७ वैदिक नक्षत्र, देवता, पाद एवं ताराबलम द्वारा निर्धारित शुद्ध तिथियों पर एकादशी अथवा प्रदोष व्रत रखते हैं, तो चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का हमारे मन और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

४. नक्षत्र — २७ वैदिक नक्षत्र, देवता, पाद एवं ताराबलम की विशिष्ट संदर्भ तालिका

९ ताराबल चक्र एवं उनका दैनिक शुभाशुभ फल

तारा क्रमतारा नामअर्थफल स्वरूपव्यावहारिक निर्देश एवं कार्य उपयुक्तता
प्रथम ताराजन्मदेह/शरीरसंवेदनशीलयात्रा से बचें, स्वास्थ्य रक्षा एवं आत्म-चिंतन करें
द्वितीय तारासम्पतधन-समृद्धिपरम शुभआर्थिक निवेश, नया व्यापार, आभूषण क्रय हेतु उत्तम
तृतीय ताराविपतआपदा/विघ्नअशुभ (त्याज्य)जोखिम भरे कार्य, अनुबंध और वाद-विवाद टालें
चतुर्थ ताराक्षेमकल्याण/सुरक्षापरम शुभयात्रा, वाहन क्रय, पारिवारिक मांगलिक कार्य करें
पंचम ताराप्रत्यकअवरोध/शत्रुताअशुभमहत्वपूर्ण वार्तालाप और कोर्ट-कचहरी से बचें
षष्ठ तारासाधनसिद्धि/साधनाअत्यंत शुभपरीक्षा, प्रतियोगिता, मंत्र साधना, कार्य सिद्धि
सप्तम तारानैधनविनाश/कष्टघोर अशुभकोई भी नया कार्य न करें; केवल शिव/हनुमान आराधना करें
अष्टम तारामित्रसुख-मैत्रीशुभमैत्री, मनोरंजन, व्यापारिक साझेदारी हेतु उत्तम
नवम तारापरम मित्रअत्यंत कल्याणकारीसर्वोत्तमसर्व कार्य सिद्धि, विवाह, गृह प्रवेश एवं बड़े निर्णय
यह संदर्भ तालिका नक्षत्र — २७ वैदिक नक्षत्र, देवता, पाद एवं ताराबलम के विशिष्ट गणित और क्षेत्रीय परंपराओं को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करती है।

५. वैदिक पंचांग की वृहद् संदर्भ तालिकाएँ

वैदिक पंचांग की महा-संदर्भ तालिकाएँ:

तालिका १: २७ नक्षत्र, उनके स्वामी एवं अधिष्ठाता देवता

क्र.नक्षत्र नामसंस्कृत नामअधिष्ठाता देवताक्रांतिवृत्त विस्तार
1Ashwiniअश्विनीAshwini Kumaras0.00° से 13.33°
2BharaniभरणीYama13.33° से 26.67°
3Krittikaकृत्तिकाAgni26.67° से 40.00°
4RohiniरोहिणीBrahma / Prajapati40.00° से 53.33°
5MrigashiraमृगशिराSoma (Chandra)53.33° से 66.67°
6Ardraआर्द्राRudra (Shiva)66.67° से 80.00°
7Punarvasuपुनर्वसुAditi80.00° से 93.33°
8Pushyaपुष्यBrihaspati93.33° से 106.66°
9Ashleshaआश्लेषाSarpa (Nagas)106.66° से 120.00°
10MaghaमघाPitris (Ancestors)120.00° से 133.33°
11Purva Phalguniपूर्वा फाल्गुनीBhaga133.33° से 146.66°
12Uttara Phalguniउत्तरा फाल्गुनीAryaman146.66° से 160.00°
13Hastaहस्तSavitr (Surya)160.00° से 173.33°
14Chitraचित्राVishwakarma173.33° से 186.66°
15Swatiस्वातीVayu186.66° से 200.00°
16VishakhaविशाखाIndragni200.00° से 213.33°
17AnuradhaअनुराधाMitra213.33° से 226.66°
18Jyeshthaज्येष्ठाIndra226.66° से 239.99°
19MulaमूलNirriti239.99° से 253.33°
20Purva Ashadhaपूर्वाषाढ़ाApas (Water)253.33° से 266.66°
21Uttara Ashadhaउत्तराषाढ़ाVishwadevas266.66° से 279.99°
22Shravanaश्रवणVishnu279.99° से 293.33°
23Dhanishtaधनिष्ठाVasus293.33° से 306.66°
24ShatabhishaशतभिषाVaruna306.66° से 319.99°
25Purva Bhadrapadaपूर्वा भाद्रपदAja Ekapada319.99° से 333.32°
26Uttara Bhadrapadaउत्तरा भाद्रपदAhirbudhnya333.32° से 346.66°
27RevatiरेवतीPushan346.66° से 359.99°

तालिका २: २७ योग एवं उनका शुभ-अशुभ स्वरूप

क्र.योग नामसंस्कृतस्वरूपकार्य उपयुक्तता
1Vishkambhaविष्कुम्भअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
2Pritiप्रीतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
3Ayushmanआयुष्मानशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
4Saubhagyaसौभाग्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
5Shobhanaशोभनशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
6Atigandaअतिगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
7Sukarmaसुकर्माशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
8Dhritiधृतिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
9Shulaशूलअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
10Gandaगण्डअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
11Vriddhiवृद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
12Dhruvaध्रुवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
13Vyaghataव्याघातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
14Harshanaहर्षणशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
15Vajraवज्रअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
16Siddhiसिद्धिशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
17Vyatipataव्यतीपातअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
18Variyanवरीयान्शुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
19Parighaपरिघअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम
20Shivaशिवशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
21Siddhaसिद्धशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
22Sadhyaसाध्यशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
23Shubhaशुभशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
24Shuklaशुक्लशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
25Brahmaब्रह्मशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
26Indraइन्द्रशुभ एवं कल्याणकारीसर्व कार्य सिद्धि
27Vaidhritiवैधृतिअशुभ (त्याज्य)शांति कर्म एवं संयम

तालिका ३: १५ तिथियाँ एवं उनके देवता

क्र.तिथिसंज्ञाअधिष्ठाताफल एवं प्रभाव
प्रतिपदानंदाअग्निनवीन बीज व कृषि कार्य
द्वितीयाभद्राब्रह्मायात्रा, विवाह एवं शिक्षा
तृतीयाजयागौरीशिल्प, संगीत एवं व्यापार
चतुर्थीरिक्तागणेशविघ्न निवारण एवं ऋणमुक्ति
पञ्चमीपूर्णासर्पनाग पूजा एवं स्वास्थ्य लाभ
षष्ठीनंदाकार्तिकेयपद-प्रतिष्ठा एवं यश
सप्तमीभद्रासूर्यवाहन क्रय एवं यात्रा
अष्टमीजयादुर्गा/शिवव्रत, संयम एवं शक्ति उपासना
नवमीरिक्तादुर्गा/रामशस्त्र पूजा एवं साधना
१०दशमीपूर्णायम/दिग्पालसत्कर्म एवं प्रतिष्ठा
११एकादशीनंदाश्री हरि विष्णुउपवास, आत्म-शुद्धि
१२द्वादशीभद्राविष्णुपारण, दान एवं होम
१३त्रयोदशीजयाकामदेव/शिवप्रदोष व्रत, मैत्री
१४चतुर्दशीरिक्ताभगवान शिवशिव आराधना, मंत्र सिद्धि
१५पूर्णिमा / अमावस्यापूर्णा / पितृचंद्र / पितृगणसत्यनारायण कथा / तर्पण

६. दोष परिहार, मुहूर्त निर्णय एवं व्यावहारिक आचार-संहिता

विपत, प्रत्यक अथवा नैधन तारा के दिन आवश्यक कार्य होने पर नक्षत्र के स्वामी ग्रह के अनुसार दान करें (सूर्य के नक्षत्र में गेहूं, चंद्र के नक्षत्र में चावल, शनि के नक्षत्र में तिल का दान) और गायत्री मंत्र का १०८ बार जप करें।

मुहूर्त निर्णय के सार्वभौमिक नियम:

१. शुभ मुहूर्त के तीन आधार: रिक्ता तिथियों (४, ९, १४) का त्याग, वेध-रहित शुभ नक्षत्र का चयन, और लग्न केंद्र (१, ४, ७, १०) में शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र, बुध) की स्थिति। २. दोषों का आध्यात्मिक परिहार: यदि किसी अनिवार्य कार्य में पूर्ण शुद्ध लग्न न मिले, तो अभिजित मुहूर्त का चयन अथवा श्रीविष्णु सहस्रनाम का पाठ कर कार्य प्रारंभ करना श्रेयस्कर माना गया है। इस प्रकार नक्षत्र — २७ वैदिक नक्षत्र, देवता, पाद एवं ताराबलम प्रत्येक साधक को वैज्ञानिक सटीकता और वैदिक पवित्रता से युक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है।

दैनिक चौघड़िया मुहूर्त (दिन एवं रात्रि)

अमृत, शुभ एवं लाभ श्रेष्ठ

किसी भी शुभ कार्य, यात्रा या नवीन अनुष्ठान को प्रारंभ करने से पूर्व चौघड़िया का विचार अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

दिन का चौघड़िया

लाभ (शुभ)12:39 am - 02:10 am
अमृत (शुभ)02:10 am - 03:41 am
काल (अशुभ)03:41 am - 05:12 am
शुभ (शुभ)05:12 am - 06:43 am
रोग (अशुभ)06:43 am - 08:14 am
उद्वेग (अशुभ)08:14 am - 09:45 am
चर (मध्यम)09:45 am - 11:15 am
लाभ (शुभ)11:15 am - 12:46 pm

रात्रि का चौघड़िया

उद्वेग (अशुभ)12:46 pm - 02:16 pm
चर (मध्यम)02:16 pm - 03:45 pm
लाभ (शुभ)03:45 pm - 05:14 pm
अमृत (शुभ)05:14 pm - 06:43 pm
काल (अशुभ)06:43 pm - 08:12 pm
शुभ (शुभ)08:12 pm - 09:42 pm
रोग (अशुभ)09:42 pm - 11:11 pm
उद्वेग (अशुभ)11:11 pm - 12:40 am

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) — नक्षत्र — २७ वैदिक नक्षत्र, देवता, पाद एवं ताराबलम

प्रामाणिक ग्रंथों एवं वैदिक ज्योतिष के आधार पर दिए गए उत्तर

Frequently asked questions

वैदिक ज्योतिष में कुल कितने नक्षत्र होते हैं?

वैदिक ज्योतिष में मुख्य रूप से २७ नक्षत्र होते हैं (प्रत्येक १३ अंश २० कला का)। विशेष अनुष्ठानों में २८वें नक्षत्र 'अभिजित' की भी गणना की जाती है।

अन्य क्षेत्रीय एवं विशिष्ट पंचांग

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ओडिया पंजिका

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नेपाल एवं हिमालयी क्षेत्र

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