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विवाह शुभ मुहूर्त 2026 — पाणिग्रहण एवं लग्न तिथियाँ

विवाह सनातन धर्म के १६ संस्कारों में सबसे प्रधान संस्कार है। वर-वधू की त्रिबल शुद्धि (सूर्य, चंद्र व गुरु बल) और शुद्ध लग्न का विचार करके ही दाम्पत्य जीवन में अनंत प्रेम और सामंजस्य स्थापित होता है।

आराध्य देवता: भगवान शिव एवं माता पार्वती
शुद्ध वैदिक पंचांग गणना (दृक सिद्धांत)
57 शुभ दिन
वर्ष 2026 में कुल सर्वोत्तम मुहूर्त
6 शुभ दिन
जनवरी 2026 में
12 महीने
पंचांग आधारित संपूर्ण वार्षिक चक्र

जनवरी 2026 कैलेंडर

हरे रंग की तिथियाँ शुभ मुहूर्त दर्शाती हैं, किसी भी दिन पर क्लिक करके विवरण देखें

शुभवर्जित / सामान्य
रवि
सोम
मंगल
बुध
गुरु
शुक्र
शनि
प्रत्येक दिन के नीचे नक्षत्र का संक्षिप्त नाम दिया गया है।गणना मानक: नई दिल्ली समय

जनवरी 2026 के सभी शुभ दिन

16 जनवरी(शुक्रवार)
सायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न में
मूलत्रयोदशी (कृष्ण पक्ष)
19 जनवरी(सोमवार)
सायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न में
उत्तराषाढ़ाप्रतिपदा (शुक्ल पक्ष)
24 जनवरी(शनिवार)
सायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न में
उत्तरा भाद्रपदषष्ठी (शुक्ल पक्ष)
25 जनवरी(रविवार)
सायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न में
रेवतीसप्तमी (शुक्ल पक्ष)
28 जनवरी(बुधवार)
सायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न में
रोहिणीदशमी (शुक्ल पक्ष)
29 जनवरी(गुरुवार)
सायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न में
मृगशिराएकादशी (शुक्ल पक्ष)
वैदिक लग्न एवं ताराबल शुद्धि निर्देशशुभ तिथियों में भी जातक की अपनी जन्म राशि के अनुसार चंद्रबलम तथा उस दिन का राहुकाल टालकर कार्य करना सर्वोत्तम सिद्धिदायक होता है।

वर्ष 2026 के संपूर्ण शुभ मुहूर्त तिथियों की विस्तृत तालिका

महीना-दर-महीना शुभ दिनों की सूची, नक्षत्र, तिथि और श्रेष्ठ समयावधि

दिनांक व वारशुभ मुहूर्त समयनक्षत्रतिथि (पक्ष)स्थिति
16 जनवरी 2026शुक्रवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमूलत्रयोदशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
19 जनवरी 2026सोमवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तराषाढ़ाप्रतिपदा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
24 जनवरी 2026शनिवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तरा भाद्रपदषष्ठी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
25 जनवरी 2026रविवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंरेवतीसप्तमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
28 जनवरी 2026बुधवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंरोहिणीदशमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
29 जनवरी 2026गुरुवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमृगशिराएकादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
3 फरवरी 2026मंगलवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमघाद्वितीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
6 फरवरी 2026शुक्रवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंहस्तपञ्चमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
8 फरवरी 2026रविवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंस्वातीसप्तमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
13 फरवरी 2026शुक्रवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमूलएकादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
15 फरवरी 2026रविवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तराषाढ़ात्रयोदशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
20 फरवरी 2026शुक्रवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तरा भाद्रपदतृतीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
26 फरवरी 2026गुरुवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमृगशिरादशमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
4 मार्च 2026बुधवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तरा फाल्गुनीप्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
5 मार्च 2026गुरुवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंहस्तद्वितीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
8 मार्च 2026रविवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंस्वातीपञ्चमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
10 मार्च 2026मंगलवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंअनुराधासप्तमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
14 मार्च 2026शनिवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तराषाढ़ाएकादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
21 अप्रैल 2026मंगलवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमृगशिरापञ्चमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
26 अप्रैल 2026रविवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमघादशमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
28 अप्रैल 2026मंगलवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तरा फाल्गुनीद्वादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
29 अप्रैल 2026बुधवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंहस्तत्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
1 मई 2026शुक्रवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंस्वातीपूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
3 मई 2026रविवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंअनुराधाद्वितीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
6 मई 2026बुधवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमूलपञ्चमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
8 मई 2026शुक्रवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तराषाढ़ाषष्ठी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
13 मई 2026बुधवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तरा भाद्रपदएकादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
14 मई 2026गुरुवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंरेवतीत्रयोदशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
18 मई 2026सोमवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंरोहिणीद्वितीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
23 मई 2026शनिवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमघाअष्टमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
25 मई 2026सोमवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तरा फाल्गुनीदशमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
26 मई 2026मंगलवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंहस्तएकादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
28 मई 2026गुरुवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंस्वातीत्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
31 मई 2026रविवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंअनुराधापूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
2 जून 2026मंगलवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमूलद्वितीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
10 जून 2026बुधवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंरेवतीदशमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
15 जून 2026सोमवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमृगशिराप्रतिपदा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
19 जून 2026शुक्रवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमघापञ्चमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
21 जून 2026रविवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तरा फाल्गुनीसप्तमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
22 जून 2026सोमवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंहस्तअष्टमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
25 जून 2026गुरुवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंस्वातीएकादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
27 जून 2026शनिवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंअनुराधात्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
29 जून 2026सोमवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमूलपूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
5 नवंबर 2026गुरुवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तरा फाल्गुनीद्वादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
6 नवंबर 2026शुक्रवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंहस्तत्रयोदशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
10 नवंबर 2026मंगलवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंअनुराधाप्रतिपदा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
11 नवंबर 2026बुधवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंअनुराधाद्वितीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
15 नवंबर 2026रविवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तराषाढ़ाषष्ठी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
20 नवंबर 2026शुक्रवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तरा भाद्रपदएकादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
21 नवंबर 2026शनिवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंरेवतीद्वादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
25 नवंबर 2026बुधवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंरोहिणीप्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
26 नवंबर 2026गुरुवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमृगशिराद्वितीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
30 नवंबर 2026सोमवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमघासप्तमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
3 दिसंबर 2026गुरुवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंहस्तदशमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
6 दिसंबर 2026रविवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंस्वातीत्रयोदशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
10 दिसंबर 2026गुरुवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंमूलद्वितीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
12 दिसंबर 2026शनिवारसायं गोधूलि एवं रात्रि निशीथ लग्न मेंउत्तराषाढ़ातृतीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला

संस्कार / क्रय हेतु मंगलकारी वैदिक मंत्र

मंगलम् भगवान विष्णुः मंगलम् गरुड़ध्वजः • मंगलम् पुण्डरीकाक्षो मंगलाय तनो हरिः

कार्य शुभारंभ के समय इस मंत्र का ११ अथवा २१ बार एकाग्रचित्त होकर जप करें। इससे विघ्नहर्ता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

महत्वपूर्ण शास्त्रीय नियम एवं सावधानियां

1

गुरु और शुक्र का अस्त काल (तारा डूबना) टालें।

2

पितृपक्ष, होलाष्टक और भद्रा का परिहार अनिवार्य है।

3

३६ गुण मिलान के साथ शुभ लग्न मुहूर्त का चयन करें।

विवाह शुभ मुहूर्त 2026 — पाणिग्रहण एवं लग्न तिथियाँ — सम्पूर्ण आध्यात्मिक, ज्योतिषीय एवं शास्त्रीय विवेचना

वैदिक ज्योतिष, मुहूर्तमार्तण्ड एवं धर्मसिंधु के प्रामाणिक संदर्भों सहित विस्तृत निर्देश

१. शुभ मुहूर्त का सनातन संस्कृति में महत्व एवं उद्देश्य

सनातन वैदिक धर्म में किसी भी शुभ कार्य, नवीन वस्तु के क्रय, भूमि व भवन के अधिग्रहण अथवा जीवन के षोडश संस्कारों की शुरुआत से पूर्व शुभ मुहूर्त का विचार अनिवार्य माना गया है। काल अथवा समय केवल भौतिक सेकंडों या घंटों की इकाई नहीं है, अपितु यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रत्यक्ष प्रवाह है जिसे भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में "कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो" कहकर साक्षात् ईश्वर का स्वरूप बतलाया है।

मुहूर्त का अर्थ है समय का वह दिव्य खंड जिसमें सौरमंडल के नवग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु) तथा २७ नक्षत्र जातक के कल्याणार्थ अनुकूल एवं सामंजस्यपूर्ण स्थिति में संचरण कर रहे हों। जब कोई व्यक्ति किसी शुभ मुहूर्त में नया वाहन खरीदता है, गृह प्रवेश करता है, विवाह बंधन में बंधता है अथवा संतान का नामकरण व मुंडन कराता है, तो उस कार्य को प्रकृति तथा देवशक्तियों का स्वाभाविक संरक्षण प्राप्त होता है। इसके विपरीत, अशुभ काल जैसे राहुकाल, यमगण्ड, विष्टि (भद्रा) अथवा रिक्ता तिथियों में किया गया कार्य अनेक विघ्नों, मानसिक संताप तथा आर्थिक हानि का कारण बन सकता है।

२. पंचांग के पाँच मूलभूत अंग और मुहूर्त निर्धारण की प्रक्रिया

"पंचांग" शब्द की उत्पत्ति "पंच" (पाँच) और "अंग" (अंगों) से हुई है। किसी भी शुभ मुहूर्त की प्रामाणिकता इन पाँचों घटकों की शुद्धि पर निर्भर करती है:

  • तिथि (Tithi): चंद्रमा और सूर्य के बीच के १२ अंशों के कोणीय अंतर को एक तिथि कहते हैं। शुभ कार्यों के लिए नंदा, भद्रा, जया और पूर्णा तिथियां श्रेष्ठ होती हैं, जबकि रिक्ता तिथियां (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) त्याज्य मानी गई हैं।
  • वार (Day/Vara): सप्ताह के सातों दिनों के अधिपति अलग-अलग ग्रह हैं। वाहन और भौतिक सुख के लिए शुक्रवार व गुरुवार अत्यंत श्रेष्ठ हैं, जबकि मंगल और शनि उग्र माने गए हैं।
  • नक्षत्र (Nakshatra): आकाशमंडल के २७ नक्षत्रों का स्वभाव अलग-अलग होता है। वाहन के लिए चर व लघु नक्षत्र, गृह प्रवेश के लिए स्थिर नक्षत्र (रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद) तथा विवाह के लिए त्रिबल शुद्ध नक्षत्र आवश्यक होते हैं।
  • योग (Yoga): सूर्य और चंद्र के भोगांशों का योग २७ योगों का निर्माण करता है। इनमें विष्कुंभ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ और वैधृति जैसे अशुभ योगों में कोई भी नवीन उपक्रम प्रारंभ नहीं करना चाहिए।
  • करण (Karana): तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। ११ करणों में से "विष्टि करण" को भद्रा कहा जाता है। भद्रा काल में किया गया कोई भी मांगलिक कार्य निष्फल अथवा अनिष्टकारी माना गया है।

३. व्यक्तिगत कुंडली शुद्धि — चंद्रबलम और ताराबलम का विचार

यद्यपि पंचांग में दिए गए मुहूर्त सामान्य रूप से सभी जातकों के लिए प्रशस्त होते हैं, किंतु शास्त्रकारों ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी बड़े निर्णय (जैसे वाहन क्रय, गृह प्रवेश या भूमि रजिस्ट्री) के पूर्व व्यक्ति को अपनी चंद्र राशि के अनुसार चंद्रबलम अवश्य देखना चाहिए।

गोचर में चंद्रमा यदि जातक की जन्म राशि से चौथे, आठवें या बारहवें भाव में संचरण कर रहा हो, तो उस समय को "अनिष्ट चंद्र" माना जाता है। ऐसे दिन भले ही पंचांग में शुभ योग बन रहा हो, जातक को वाहन की चाबी लेने या रजिस्ट्री के हस्ताक्षर करने से बचना चाहिए। इसी प्रकार ताराबलम में जन्म नक्षत्र से संपत, क्षेम, साधक, मित्र और परममित्र ताराएं अत्यंत शुभ फल प्रदान करती हैं, जबकि विपत, प्रत्यरि और वध ताराएं त्यागने योग्य हैं।

४. वर्जित काल — भद्रा, राहुकाल, यमगण्ड एवं खरमास

शुभ मुहूर्त का चयन करते समय निम्नलिखित अशुभ समयावधियों का पूर्ण परित्याग करना आवश्यक है:

राहुकाल (Rahu Kaal):प्रत्येक दिन लगभग डेढ़ घंटे का समय राहु का होता है। इसमें किया गया कार्य मानसिक अशांति, कानूनी अड़चन या दुर्घटना को जन्म दे सकता है।
विष्टि / भद्रा (Bhadra):सूर्य पुत्री और शनि देव की बहन भद्रा के मुख काल में वाहन क्रय, विवाह, गृह प्रवेश आदि सर्वथा वर्जित हैं।
खरमास एवं मलमास:जब सूर्य देव गुरु की राशियों (धनु एवं मीन) में प्रवेश करते हैं, तो उस काल को खरमास कहा जाता है। इसमें सभी मांगलिक संस्कार निषिद्ध होते हैं।
पंचक विचार:धनिष्ठा नक्षत्र के उत्तरार्ध से लेकर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद एवं रेवती नक्षत्रों तक पंचक रहता है।

५. दैनिक चौघड़िया और अभिजित मुहूर्त का सर्वोत्तम उपयोग

यदि किसी अपरिहार्य कारणवश आपको पंचांग में निर्धारित मुख्य मुहूर्त तिथि पर कार्य करने का अवसर न मिल सके, तो ज्योतिष शास्त्र "अभिजित मुहूर्त" और "अमृत/शुभ चौघड़िया" का आश्रय लेने का विधान करता है। भगवान सूर्य जब आकाश के ठीक मध्य में (मध्याह्न काल में) होते हैं, तब लगभग ४८ मिनट का अभिजित मुहूर्त प्रभावी होता है। भगवान श्री राम का जन्म भी अभिजित मुहूर्त में ही हुआ था। यह मुहूर्त चौबीसों प्रकार के दोषों का शमन करने में समर्थ माना गया है (केवल बुधवार को छोड़कर)।

इसी प्रकार दिन और रात्रि के आठ-आठ भागों में विभक्त चौघड़िया चक्र में अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया किसी भी नए सौदे, चाबी ग्रहण, पूजा एवं यात्रा के लिए सर्वथा प्रशस्त माने गए हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

चातुर्मास में विवाह क्यों नहीं होते हैं?

आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी) तक भगवान श्री विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, अतः इस काल में मांगलिक विवाह नहीं किए जाते।