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संपत्ति एवं भूमि रजिस्ट्री शुभ मुहूर्त 2026

भूमि, भवन या अचल संपत्ति का क्रय जीवन का सबसे बड़ा निवेश होता है। भूमिपुत्र मंगल और स्थिर नक्षत्रों की कृपा से खरीदी गई संपत्ति वंश वृद्धि और स्थाई समृद्धि प्रदान करती है।

आराध्य देवता: भूदेवी एवं भगवान श्री वराह
शुद्ध वैदिक पंचांग गणना (दृक सिद्धांत)
122 शुभ दिन
वर्ष 2026 में कुल सर्वोत्तम मुहूर्त
13 शुभ दिन
जनवरी 2026 में
12 महीने
पंचांग आधारित संपूर्ण वार्षिक चक्र

जनवरी 2026 कैलेंडर

हरे रंग की तिथियाँ शुभ मुहूर्त दर्शाती हैं, किसी भी दिन पर क्लिक करके विवरण देखें

शुभवर्जित / सामान्य
रवि
सोम
मंगल
बुध
गुरु
शुक्र
शनि
प्रत्येक दिन के नीचे नक्षत्र का संक्षिप्त नाम दिया गया है।गणना मानक: नई दिल्ली समय

जनवरी 2026 के सभी शुभ दिन

1 जनवरी(गुरुवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
रोहिणीत्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)
4 जनवरी(रविवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
पुनर्वसुप्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)
7 जनवरी(बुधवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
मघापञ्चमी (कृष्ण पक्ष)
9 जनवरी(शुक्रवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
उत्तरा फाल्गुनीसप्तमी (कृष्ण पक्ष)
10 जनवरी(शनिवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
हस्तअष्टमी (कृष्ण पक्ष)
14 जनवरी(बुधवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
अनुराधाएकादशी (कृष्ण पक्ष)
16 जनवरी(शुक्रवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
मूलत्रयोदशी (कृष्ण पक्ष)
19 जनवरी(सोमवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
उत्तराषाढ़ाप्रतिपदा (शुक्ल पक्ष)
20 जनवरी(मंगलवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
श्रवणद्वितीया (शुक्ल पक्ष)
24 जनवरी(शनिवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
उत्तरा भाद्रपदषष्ठी (शुक्ल पक्ष)
25 जनवरी(रविवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
रेवतीसप्तमी (शुक्ल पक्ष)
28 जनवरी(बुधवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
रोहिणीदशमी (शुक्ल पक्ष)
29 जनवरी(गुरुवार)
प्रातः 09:15 से सायं 04:30 तक
मृगशिराएकादशी (शुक्ल पक्ष)
वैदिक लग्न एवं ताराबल शुद्धि निर्देशशुभ तिथियों में भी जातक की अपनी जन्म राशि के अनुसार चंद्रबलम तथा उस दिन का राहुकाल टालकर कार्य करना सर्वोत्तम सिद्धिदायक होता है।

वर्ष 2026 के संपूर्ण शुभ मुहूर्त तिथियों की विस्तृत तालिका

महीना-दर-महीना शुभ दिनों की सूची, नक्षत्र, तिथि और श्रेष्ठ समयावधि

दिनांक व वारशुभ मुहूर्त समयनक्षत्रतिथि (पक्ष)स्थिति
1 जनवरी 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरोहिणीत्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
4 जनवरी 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकपुनर्वसुप्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
7 जनवरी 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमघापञ्चमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
9 जनवरी 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा फाल्गुनीसप्तमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
10 जनवरी 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकहस्तअष्टमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
14 जनवरी 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकअनुराधाएकादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
16 जनवरी 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमूलत्रयोदशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
19 जनवरी 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तराषाढ़ाप्रतिपदा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
20 जनवरी 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकश्रवणद्वितीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
24 जनवरी 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा भाद्रपदषष्ठी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
25 जनवरी 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरेवतीसप्तमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
28 जनवरी 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरोहिणीदशमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
29 जनवरी 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमृगशिराएकादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
3 फरवरी 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमघाद्वितीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
6 फरवरी 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकहस्तपञ्चमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
13 फरवरी 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमूलएकादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
15 फरवरी 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तराषाढ़ात्रयोदशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
20 फरवरी 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा भाद्रपदतृतीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
26 फरवरी 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमृगशिरादशमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
27 फरवरी 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकपुनर्वसुएकादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
4 मार्च 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा फाल्गुनीप्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
5 मार्च 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकहस्तद्वितीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
10 मार्च 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकअनुराधासप्तमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
14 मार्च 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तराषाढ़ाएकादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
15 मार्च 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकश्रवणद्वादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
19 मार्च 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा भाद्रपदप्रतिपदा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
20 मार्च 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरेवतीद्वितीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
24 मार्च 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरोहिणीषष्ठी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
25 मार्च 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमृगशिरासप्तमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
27 मार्च 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकपुनर्वसुदशमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
30 मार्च 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमघात्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
1 अप्रैल 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा फाल्गुनीपूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
2 अप्रैल 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकहस्तप्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
8 अप्रैल 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमूलषष्ठी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
10 अप्रैल 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तराषाढ़ाअष्टमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
12 अप्रैल 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकश्रवणदशमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
21 अप्रैल 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमृगशिरापञ्चमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
23 अप्रैल 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकपुनर्वसुसप्तमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
26 अप्रैल 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमघादशमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
28 अप्रैल 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा फाल्गुनीद्वादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
29 अप्रैल 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकहस्तत्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
3 मई 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकअनुराधाद्वितीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
6 मई 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमूलपञ्चमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
8 मई 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तराषाढ़ाषष्ठी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
9 मई 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकश्रवणसप्तमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
13 मई 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा भाद्रपदएकादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
14 मई 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरेवतीत्रयोदशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
18 मई 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरोहिणीद्वितीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
20 मई 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकपुनर्वसुपञ्चमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
23 मई 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमघाअष्टमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
25 मई 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा फाल्गुनीदशमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
26 मई 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकहस्तएकादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
31 मई 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकअनुराधापूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
2 जून 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमूलद्वितीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
5 जून 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकश्रवणपञ्चमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
10 जून 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरेवतीदशमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
15 जून 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमृगशिराप्रतिपदा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
17 जून 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकपुनर्वसुतृतीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
19 जून 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमघापञ्चमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
21 जून 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा फाल्गुनीसप्तमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
22 जून 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकहस्तअष्टमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
27 जून 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकअनुराधात्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
29 जून 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमूलपूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
1 जुलाई 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तराषाढ़ाद्वितीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
2 जुलाई 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकश्रवणतृतीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
7 जुलाई 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा भाद्रपदसप्तमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
8 जुलाई 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरेवतीअष्टमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
11 जुलाई 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरोहिणीद्वादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
12 जुलाई 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमृगशिरात्रयोदशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
19 जुलाई 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा फाल्गुनीषष्ठी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
20 जुलाई 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकहस्तसप्तमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
24 जुलाई 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकअनुराधाएकादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
26 जुलाई 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमूलद्वादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
29 जुलाई 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तराषाढ़ापूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
30 जुलाई 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकश्रवणप्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
3 अगस्त 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा भाद्रपदपञ्चमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
4 अगस्त 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरेवतीषष्ठी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
8 अगस्त 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरोहिणीदशमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
9 अगस्त 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमृगशिराद्वादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
13 अगस्त 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमघाप्रतिपदा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
15 अगस्त 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा फाल्गुनीतृतीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
20 अगस्त 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकअनुराधाअष्टमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
23 अगस्त 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमूलएकादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
25 अगस्त 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तराषाढ़ात्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
30 अगस्त 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा भाद्रपदतृतीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
4 सितंबर 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरोहिणीअष्टमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
7 सितंबर 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकपुनर्वसुएकादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
12 सितंबर 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा फाल्गुनीद्वितीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
13 सितंबर 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकहस्ततृतीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
17 सितंबर 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकअनुराधासप्तमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
19 सितंबर 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमूलअष्टमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
21 सितंबर 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तराषाढ़ादशमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
22 सितंबर 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकश्रवणएकादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
27 सितंबर 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरेवतीप्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
1 अक्टूबर 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरोहिणीपञ्चमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
2 अक्टूबर 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमृगशिरासप्तमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
7 अक्टूबर 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमघाद्वादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
16 अक्टूबर 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमूलषष्ठी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
24 अक्टूबर 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा भाद्रपदत्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
31 अक्टूबर 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकपुनर्वसुषष्ठी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
5 नवंबर 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा फाल्गुनीद्वादशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
6 नवंबर 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकहस्तत्रयोदशी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
10 नवंबर 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकअनुराधाप्रतिपदा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
11 नवंबर 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकअनुराधाद्वितीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
15 नवंबर 2026रविवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तराषाढ़ाषष्ठी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
16 नवंबर 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकश्रवणसप्तमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
20 नवंबर 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा भाद्रपदएकादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
21 नवंबर 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरेवतीद्वादशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
25 नवंबर 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरोहिणीप्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
26 नवंबर 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमृगशिराद्वितीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
28 नवंबर 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकपुनर्वसुपञ्चमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
30 नवंबर 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमघासप्तमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
3 दिसंबर 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकहस्तदशमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
10 दिसंबर 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमूलद्वितीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
12 दिसंबर 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तराषाढ़ातृतीया (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
19 दिसंबर 2026शनिवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरेवतीदशमी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
22 दिसंबर 2026मंगलवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकरोहिणीत्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
23 दिसंबर 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमृगशिरापूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)शुभ वेला
25 दिसंबर 2026शुक्रवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकपुनर्वसुद्वितीया (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
28 दिसंबर 2026सोमवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकमघापञ्चमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
30 दिसंबर 2026बुधवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकउत्तरा फाल्गुनीसप्तमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला
31 दिसंबर 2026गुरुवारप्रातः 09:15 से सायं 04:30 तकहस्तअष्टमी (कृष्ण पक्ष)शुभ वेला

संस्कार / क्रय हेतु मंगलकारी वैदिक मंत्र

ॐ नमो भगवते वराहरूपाय भूमिधारणाय स्वाहा

कार्य शुभारंभ के समय इस मंत्र का ११ अथवा २१ बार एकाग्रचित्त होकर जप करें। इससे विघ्नहर्ता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

महत्वपूर्ण शास्त्रीय नियम एवं सावधानियां

1

दीर्घकालिक लाभ के लिए स्थिर नक्षत्रों (रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी आदि) का चयन करें।

2

ग्रहण काल और पितृपक्ष में रजिस्ट्री कराने से बचें।

3

नींव खुदाई से पूर्व ईशान कोण में भू-पूजन अवश्य संपन्न करें।

संपत्ति एवं भूमि रजिस्ट्री शुभ मुहूर्त 2026 — सम्पूर्ण आध्यात्मिक, ज्योतिषीय एवं शास्त्रीय विवेचना

वैदिक ज्योतिष, मुहूर्तमार्तण्ड एवं धर्मसिंधु के प्रामाणिक संदर्भों सहित विस्तृत निर्देश

१. शुभ मुहूर्त का सनातन संस्कृति में महत्व एवं उद्देश्य

सनातन वैदिक धर्म में किसी भी शुभ कार्य, नवीन वस्तु के क्रय, भूमि व भवन के अधिग्रहण अथवा जीवन के षोडश संस्कारों की शुरुआत से पूर्व शुभ मुहूर्त का विचार अनिवार्य माना गया है। काल अथवा समय केवल भौतिक सेकंडों या घंटों की इकाई नहीं है, अपितु यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रत्यक्ष प्रवाह है जिसे भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में "कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो" कहकर साक्षात् ईश्वर का स्वरूप बतलाया है।

मुहूर्त का अर्थ है समय का वह दिव्य खंड जिसमें सौरमंडल के नवग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु) तथा २७ नक्षत्र जातक के कल्याणार्थ अनुकूल एवं सामंजस्यपूर्ण स्थिति में संचरण कर रहे हों। जब कोई व्यक्ति किसी शुभ मुहूर्त में नया वाहन खरीदता है, गृह प्रवेश करता है, विवाह बंधन में बंधता है अथवा संतान का नामकरण व मुंडन कराता है, तो उस कार्य को प्रकृति तथा देवशक्तियों का स्वाभाविक संरक्षण प्राप्त होता है। इसके विपरीत, अशुभ काल जैसे राहुकाल, यमगण्ड, विष्टि (भद्रा) अथवा रिक्ता तिथियों में किया गया कार्य अनेक विघ्नों, मानसिक संताप तथा आर्थिक हानि का कारण बन सकता है।

२. पंचांग के पाँच मूलभूत अंग और मुहूर्त निर्धारण की प्रक्रिया

"पंचांग" शब्द की उत्पत्ति "पंच" (पाँच) और "अंग" (अंगों) से हुई है। किसी भी शुभ मुहूर्त की प्रामाणिकता इन पाँचों घटकों की शुद्धि पर निर्भर करती है:

  • तिथि (Tithi): चंद्रमा और सूर्य के बीच के १२ अंशों के कोणीय अंतर को एक तिथि कहते हैं। शुभ कार्यों के लिए नंदा, भद्रा, जया और पूर्णा तिथियां श्रेष्ठ होती हैं, जबकि रिक्ता तिथियां (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) त्याज्य मानी गई हैं।
  • वार (Day/Vara): सप्ताह के सातों दिनों के अधिपति अलग-अलग ग्रह हैं। वाहन और भौतिक सुख के लिए शुक्रवार व गुरुवार अत्यंत श्रेष्ठ हैं, जबकि मंगल और शनि उग्र माने गए हैं।
  • नक्षत्र (Nakshatra): आकाशमंडल के २७ नक्षत्रों का स्वभाव अलग-अलग होता है। वाहन के लिए चर व लघु नक्षत्र, गृह प्रवेश के लिए स्थिर नक्षत्र (रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद) तथा विवाह के लिए त्रिबल शुद्ध नक्षत्र आवश्यक होते हैं।
  • योग (Yoga): सूर्य और चंद्र के भोगांशों का योग २७ योगों का निर्माण करता है। इनमें विष्कुंभ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ और वैधृति जैसे अशुभ योगों में कोई भी नवीन उपक्रम प्रारंभ नहीं करना चाहिए।
  • करण (Karana): तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। ११ करणों में से "विष्टि करण" को भद्रा कहा जाता है। भद्रा काल में किया गया कोई भी मांगलिक कार्य निष्फल अथवा अनिष्टकारी माना गया है।

३. व्यक्तिगत कुंडली शुद्धि — चंद्रबलम और ताराबलम का विचार

यद्यपि पंचांग में दिए गए मुहूर्त सामान्य रूप से सभी जातकों के लिए प्रशस्त होते हैं, किंतु शास्त्रकारों ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी बड़े निर्णय (जैसे वाहन क्रय, गृह प्रवेश या भूमि रजिस्ट्री) के पूर्व व्यक्ति को अपनी चंद्र राशि के अनुसार चंद्रबलम अवश्य देखना चाहिए।

गोचर में चंद्रमा यदि जातक की जन्म राशि से चौथे, आठवें या बारहवें भाव में संचरण कर रहा हो, तो उस समय को "अनिष्ट चंद्र" माना जाता है। ऐसे दिन भले ही पंचांग में शुभ योग बन रहा हो, जातक को वाहन की चाबी लेने या रजिस्ट्री के हस्ताक्षर करने से बचना चाहिए। इसी प्रकार ताराबलम में जन्म नक्षत्र से संपत, क्षेम, साधक, मित्र और परममित्र ताराएं अत्यंत शुभ फल प्रदान करती हैं, जबकि विपत, प्रत्यरि और वध ताराएं त्यागने योग्य हैं।

४. वर्जित काल — भद्रा, राहुकाल, यमगण्ड एवं खरमास

शुभ मुहूर्त का चयन करते समय निम्नलिखित अशुभ समयावधियों का पूर्ण परित्याग करना आवश्यक है:

राहुकाल (Rahu Kaal):प्रत्येक दिन लगभग डेढ़ घंटे का समय राहु का होता है। इसमें किया गया कार्य मानसिक अशांति, कानूनी अड़चन या दुर्घटना को जन्म दे सकता है।
विष्टि / भद्रा (Bhadra):सूर्य पुत्री और शनि देव की बहन भद्रा के मुख काल में वाहन क्रय, विवाह, गृह प्रवेश आदि सर्वथा वर्जित हैं।
खरमास एवं मलमास:जब सूर्य देव गुरु की राशियों (धनु एवं मीन) में प्रवेश करते हैं, तो उस काल को खरमास कहा जाता है। इसमें सभी मांगलिक संस्कार निषिद्ध होते हैं।
पंचक विचार:धनिष्ठा नक्षत्र के उत्तरार्ध से लेकर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद एवं रेवती नक्षत्रों तक पंचक रहता है।

५. दैनिक चौघड़िया और अभिजित मुहूर्त का सर्वोत्तम उपयोग

यदि किसी अपरिहार्य कारणवश आपको पंचांग में निर्धारित मुख्य मुहूर्त तिथि पर कार्य करने का अवसर न मिल सके, तो ज्योतिष शास्त्र "अभिजित मुहूर्त" और "अमृत/शुभ चौघड़िया" का आश्रय लेने का विधान करता है। भगवान सूर्य जब आकाश के ठीक मध्य में (मध्याह्न काल में) होते हैं, तब लगभग ४८ मिनट का अभिजित मुहूर्त प्रभावी होता है। भगवान श्री राम का जन्म भी अभिजित मुहूर्त में ही हुआ था। यह मुहूर्त चौबीसों प्रकार के दोषों का शमन करने में समर्थ माना गया है (केवल बुधवार को छोड़कर)।

इसी प्रकार दिन और रात्रि के आठ-आठ भागों में विभक्त चौघड़िया चक्र में अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया किसी भी नए सौदे, चाबी ग्रहण, पूजा एवं यात्रा के लिए सर्वथा प्रशस्त माने गए हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के लिए कौन-सा वार सबसे अच्छा है?

गुरुवार, शुक्रवार और सोमवार को शुभ तिथियों में की गई रजिस्ट्री अत्यंत कल्याणकारी होती है।