
प्रिंट योग्य हिन्दू दीवार कैलेंडर
अपने पूजा घर अथवा दीवार के लिए प्रामाणिक मासिक सनातन पंचांग कैलेंडर।
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॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः ॥
यह पावन कैलेंडर आपके घर में सकारात्मकता, भक्ति और सुख-शांति का संचार करे।
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
विक्रम संवत्: 2083
शक संवत्: 1948
सितंबर 2026
सनातन पंचांग एवं हिन्दू दीवार कैलेंडर — नई दिल्ली
BhaktiVoice.com
स्थान: नई दिल्ली
28.61°N, 77.21°E
| Sunरविवार | Monसोमवार | Tueमंगलवार | Wedबुधवार | Thuगुरुवार | Friशुक्रवार | Satशनिवार |
|---|---|---|---|---|---|---|
30 | 31 | 1Kr चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी | 2Kr पञ्चमी | 3Kr सप्तमी | 4Kr अष्टमी | 5Kr नवमी |
6Kr दशमी | 7Kr एकादशी एकादशीVaruthini Ekadashi व्रत सावन सोमवार व्रत | 8Kr द्वादशी | 9Kr त्रयोदशी Budha प्रदोष व्रत | 10Kr चतुर्दशी | 11Kr अमावस्या अमावस्याअमावस्या (पितृ तर्पण) | 12Sh प्रतिपदा |
13Sh द्वितीया | 14Sh तृतीया | 15Sh चतुर्थी विनायक चतुर्थी गणेश चतुर्थी | 16Sh पञ्चमी | 17Sh षष्ठी | 18Sh सप्तमी | 19Sh अष्टमी |
20Sh नवमी | 21Sh दशमी | 22Sh एकादशी एकादशीNirjala Ekadashi व्रत | 23Sh द्वादशी | 24Sh त्रयोदशी Guru प्रदोष व्रत | 25Sh चतुर्दशी | 26Sh पूर्णिमा पूर्णिमापूर्णिमा व्रत / सत्यनारायण पूजा |
27Kr प्रतिपदा | 28Kr द्वितीया | 29Kr तृतीया | 30Kr चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी | 1 | 2 | 3 |
कैलेंडर मार्गदर्शिका
मुख्य बातें एवं आवश्यक नियम
एक कैलेंडर केवल दिनों की सूची नहीं, बल्कि आपकी आध्यात्मिक यात्रा का एक पावन साथी है।
सितंबर 2026 — प्रमुख व्रत, पर्व एवं त्यौहार
संकष्टी चतुर्थी
चतुर्थी
Varuthini Ekadashi व्रत
एकादशी
सावन सोमवार व्रत
एकादशी
Budha प्रदोष व्रत
त्रयोदशी
अमावस्या (पितृ तर्पण)
अमावस्या
विनायक चतुर्थी
चतुर्थी
गणेश चतुर्थी
चतुर्थी
सनातन हिन्दू दीवार कैलेंडर एवं दैनिक पंचांग संपूर्ण दिग्दर्शिका
हिन्दू कैलेंडर मात्र तारीखों का संग्रह नहीं, बल्कि सूर्य-चंद्रमा की गति, ऋतु-परिवर्तन और कालचक्र के साथ जीवन को संतुलित करने का पवित्र साधन है।
पंचांग के पंच-अंग: काल गणना के पाँच दिव्य स्तंभ
तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — वैदिक कालचक्र के मूल तत्व
तिथि (Tithi)
सूर्य एवं चन्द्रमा के बीच 12 अंश के कोणीय अंतर को एक तिथि कहा जाता है। एक मास में 30 तिथियाँ होती हैं (15 शुक्ल पक्ष व 15 कृष्ण पक्ष)। सूर्योदय कालीन तिथि (उदयातिथि) सर्वमान्य मानी जाती है।
वार (Vara)
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि को 'वार' कहते हैं। सातों वार नवग्रहों के आधिपत्य में हैं (रविवार: सूर्य, सोमवार: चन्द्र, मंगलवार: मंगल आदि), जो दिन की ऊर्जा का नियमन करते हैं।
नक्षत्र (Nakshatra)
360 अंश के भचक्र को 27 समान भागों (प्रत्येक 13°20') में बाँटा गया है जिन्हें नक्षत्र कहते हैं। चन्द्रमा जिस नक्षत्र में विचरण करता है, वही उस दिन का नक्षत्र होता है।
योग (Yoga)
सूर्य और चन्द्रमा के भोगांशों के योग से बनने वाले 27 विशेष संयोगों को 'योग' कहते हैं। विष्कम्भ से लेकर वैधृति तक 27 योगों में शुभ-अशुभ मुहूर्तों का निर्णय होता है।
करण (Karana)
तिथि के आधे भाग (6 अंश) को 'करण' कहते हैं। कुल 11 करण होते हैं (7 चर और 4 स्थिर)। इनमें 'विष्टि करण' को 'भद्रा' कहा जाता है जिसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
उदयातिथि का महत्व
सनातन धर्म में 'सूर्योदये या तिथिः सा दिनव्यापिनी' के अनुसार सूर्योदय कालीन तिथि पूरे दिन फलदायी मानी जाती है। इसलिए स्थानीय अक्षांश-देशांतर के आधार पर पंचांग देखना आवश्यक है।
शुक्ल पक्ष (Shu) एवं कृष्ण पक्ष (Kri) का रहस्य
चंद्रमा की 15-15 दिनों की कलाएँ
शुक्ल पक्ष (शु / Shu)
अमावस्या के अगले दिन से पूर्णिमा तक का 15 दिवसीय समय, जिसमें चंद्रमा का प्रकाश प्रतिदिन बढ़ता है। इसे देव पक्ष माना जाता है; नवीन गृहप्रवेश, व्यापारारम्भ व विवाह हेतु यह सर्वोत्तम है।
कृष्ण पक्ष (कृ / Kri)
पूर्णिमा के अगले दिन से अमावस्या तक का 15 दिवसीय समय, जब चंद्रकलाएँ घटती हैं। यह पक्ष आत्म-चिंतन, तपस्या, पितृ तर्पण एवं संकष्टी चतुर्थी जैसे तप-व्रतों के लिए विशेष रूप से फलदायी है।
विक्रम संवत् (2083) एवं शक संवत् (1948) का इतिहास
वैदिक संवत्सर एवं सौर वर्ष का संबंध
विक्रम संवत् की स्थापना 57 ईसा पूर्व (BCE) में मालव सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर ऐतिहासिक विजय के उपलक्ष्य में की थी। यही कारण है कि विक्रम संवत् ईस्वी सन् से 57 वर्ष आगे चलता है (जैसे 2026 में संवत् 2083)।
शक संवत् का आरंभ 78 ईस्वी में राजा शालिवाहन ने किया था, जिसे भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय संवत् घोषित किया गया है (ईस्वी सन् से 78 वर्ष पीछे, जैसे 2026 में शक 1948)।
पूजा घर व दीवार पर कैलेंडर लगाने के वास्तु नियम
ईशान कोण एवं शुभ दिशा निर्देश
- •ईशान कोण (उत्तर-पूर्व): पंचांग कैलेंडर को सदैव पूजा कक्ष की पूर्व या उत्तर दिशा की दीवार पर लगाना चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- •प्रातः नित्य दर्शन: प्रतिदिन स्नान-ध्यान के पश्चात आज की तिथि, वार व नक्षत्र का स्मरण करने से मानसिक शांति व एकाग्रता प्राप्त होती है।
- •यहाँ न लगाएं: दक्षिण दिशा, मुख्य द्वार के ठीक ऊपर अथवा सीढ़ियों के नीचे पवित्र कैलेंडर लगाने से बचें।
A4 प्रिंट एवं सर्वश्रेष्ठ कागज़ हेतु निर्देश
रंग, मार्जिन एवं लैमिनेशन सुझाव
- •कागज़ की मोटाई (GSM): दीवार पर टिकाऊपन के लिए 120 से 180 GSM का मैट फोटो पेपर या आइवरी कार्डशीट चुनें, जो धूप और अगरबत्ती के धुएं से सुरक्षित रहे।
- •प्रिंटर सेटिंग: प्रिंट संवाद में Orientation: Landscape, Margins: Default और 'Background graphics' विकल्प को चालू (On) रखें।
- •लैमिनेशन व फ्रेमिंग: प्रिंट निकालने के बाद साधारण लैमिनेशन करवा लें या फोटो फ्रेम में लगा लें, जिससे पूरे वर्ष तिथि स्पष्ट व स्वच्छ रहे।
