
गृह प्रवेश एवं वास्तु शांति मुहूर्त 2026
नए घर में गृह प्रवेश केवल भौतिक निवास नहीं, अपितु वास्तु पुरुष और कुलदेवता की पावन प्रतिष्ठा है। उत्तरायण सूर्य में शुभ लग्न में प्रवेश करने से घर में सुख-शांति का वास होता है।
जनवरी 2026 कैलेंडर
हरे रंग की तिथियाँ शुभ मुहूर्त दर्शाती हैं, किसी भी दिन पर क्लिक करके विवरण देखें
जनवरी 2026 के सभी शुभ दिन
वर्ष 2026 के संपूर्ण शुभ मुहूर्त तिथियों की विस्तृत तालिका
महीना-दर-महीना शुभ दिनों की सूची, नक्षत्र, तिथि और श्रेष्ठ समयावधि
| दिनांक व वार | शुभ मुहूर्त समय | नक्षत्र | तिथि (पक्ष) | स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| 19 जनवरी 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तराषाढ़ा | प्रतिपदा (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 21 जनवरी 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | धनिष्ठा | तृतीया (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 22 जनवरी 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | शतभिषा | चतुर्थी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 24 जनवरी 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा भाद्रपद | षष्ठी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 28 जनवरी 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रोहिणी | दशमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 29 जनवरी 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | मृगशिरा | एकादशी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 5 फरवरी 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा फाल्गुनी | चतुर्थी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 7 फरवरी 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | चित्रा | षष्ठी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 16 फरवरी 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | श्रवण | चतुर्दशी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 18 फरवरी 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | शतभिषा | प्रतिपदा (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 20 फरवरी 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा भाद्रपद | तृतीया (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 21 फरवरी 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रेवती | चतुर्थी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 25 फरवरी 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रोहिणी | नवमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 26 फरवरी 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | मृगशिरा | दशमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 4 मार्च 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा फाल्गुनी | प्रतिपदा (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 6 मार्च 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | चित्रा | तृतीया (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 14 मार्च 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तराषाढ़ा | एकादशी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 16 अप्रैल 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा भाद्रपद | चतुर्दशी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 17 अप्रैल 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रेवती | अमावस्या (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 20 अप्रैल 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रोहिणी | चतुर्थी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 30 अप्रैल 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | चित्रा | चतुर्दशी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 8 मई 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तराषाढ़ा | षष्ठी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 9 मई 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | श्रवण | सप्तमी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 11 मई 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | शतभिषा | नवमी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 13 मई 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा भाद्रपद | एकादशी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 14 मई 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रेवती | त्रयोदशी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 18 मई 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रोहिणी | द्वितीया (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 25 मई 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा फाल्गुनी | दशमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 27 मई 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | चित्रा | द्वादशी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 4 जून 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तराषाढ़ा | चतुर्थी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 5 जून 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | श्रवण | पञ्चमी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 6 जून 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | धनिष्ठा | षष्ठी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 10 जून 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रेवती | दशमी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 15 जून 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | मृगशिरा | प्रतिपदा (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 24 जून 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | चित्रा | दशमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 27 जून 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | अनुराधा | त्रयोदशी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 1 जुलाई 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तराषाढ़ा | द्वितीया (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 2 जुलाई 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | श्रवण | तृतीया (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 3 जुलाई 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | श्रवण | चतुर्थी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 4 जुलाई 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | धनिष्ठा | चतुर्थी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 8 जुलाई 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रेवती | अष्टमी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 11 जुलाई 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रोहिणी | द्वादशी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 24 जुलाई 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | अनुराधा | एकादशी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 29 जुलाई 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तराषाढ़ा | पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 30 जुलाई 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | श्रवण | प्रतिपदा (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 31 जुलाई 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | धनिष्ठा | द्वितीया (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 1 अगस्त 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | शतभिषा | तृतीया (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 3 अगस्त 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा भाद्रपद | पञ्चमी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 8 अगस्त 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रोहिणी | दशमी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 15 अगस्त 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा फाल्गुनी | तृतीया (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 17 अगस्त 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | चित्रा | पञ्चमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 20 अगस्त 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | अनुराधा | अष्टमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 21 अगस्त 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | अनुराधा | नवमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 26 अगस्त 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | श्रवण | चतुर्दशी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 27 अगस्त 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | धनिष्ठा | पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 28 अगस्त 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | शतभिषा | प्रतिपदा (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 31 अगस्त 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रेवती | चतुर्थी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 4 सितंबर 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रोहिणी | अष्टमी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 5 सितंबर 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | मृगशिरा | नवमी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 12 सितंबर 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा फाल्गुनी | द्वितीया (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 14 सितंबर 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | चित्रा | चतुर्थी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 17 सितंबर 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | अनुराधा | सप्तमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 21 सितंबर 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तराषाढ़ा | दशमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 23 सितंबर 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | धनिष्ठा | द्वादशी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 24 सितंबर 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | शतभिषा | त्रयोदशी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 1 अक्टूबर 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रोहिणी | पञ्चमी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 2 अक्टूबर 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | मृगशिरा | सप्तमी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 9 अक्टूबर 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा फाल्गुनी | चतुर्दशी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 14 अक्टूबर 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | अनुराधा | चतुर्थी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 19 अक्टूबर 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तराषाढ़ा | नवमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 21 अक्टूबर 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | धनिष्ठा | दशमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 22 अक्टूबर 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | शतभिषा | एकादशी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 24 अक्टूबर 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा भाद्रपद | त्रयोदशी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 29 अक्टूबर 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | मृगशिरा | चतुर्थी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 5 नवंबर 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा फाल्गुनी | द्वादशी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 7 नवंबर 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | चित्रा | चतुर्दशी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 11 नवंबर 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | अनुराधा | द्वितीया (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 16 नवंबर 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | श्रवण | सप्तमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 18 नवंबर 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | शतभिषा | नवमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 20 नवंबर 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा भाद्रपद | एकादशी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 21 नवंबर 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रेवती | द्वादशी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 25 नवंबर 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | रोहिणी | प्रतिपदा (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 26 नवंबर 2026गुरुवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | मृगशिरा | द्वितीया (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 2 दिसंबर 2026बुधवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तरा फाल्गुनी | नवमी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 4 दिसंबर 2026शुक्रवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | चित्रा | एकादशी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 5 दिसंबर 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | चित्रा | द्वादशी (कृष्ण पक्ष) | शुभ वेला |
| 12 दिसंबर 2026शनिवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | उत्तराषाढ़ा | तृतीया (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
| 14 दिसंबर 2026सोमवार | प्रातः 06:15 से 11:45 तक (अभिजित एवं स्थिर लग्न) | धनिष्ठा | पञ्चमी (शुक्ल पक्ष) | शुभ वेला |
संस्कार / क्रय हेतु मंगलकारी वैदिक मंत्र
ॐ वास्तुपुरुषाय नमः • ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
कार्य शुभारंभ के समय इस मंत्र का ११ अथवा २१ बार एकाग्रचित्त होकर जप करें। इससे विघ्नहर्ता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
महत्वपूर्ण शास्त्रीय नियम एवं सावधानियां
दाहिना पैर आगे रखकर मंगल कलश के साथ गृह प्रवेश करें।
रसोई में सबसे पहले दूध उबालें ताकि समृद्धि का प्रवाह निरंतर बना रहे।
गृह प्रवेश के उपरांत कम से कम तीन रातों तक घर को सूना न छोड़ें।
गृह प्रवेश एवं वास्तु शांति मुहूर्त 2026 — सम्पूर्ण आध्यात्मिक, ज्योतिषीय एवं शास्त्रीय विवेचना
वैदिक ज्योतिष, मुहूर्तमार्तण्ड एवं धर्मसिंधु के प्रामाणिक संदर्भों सहित विस्तृत निर्देश
१. शुभ मुहूर्त का सनातन संस्कृति में महत्व एवं उद्देश्य
सनातन वैदिक धर्म में किसी भी शुभ कार्य, नवीन वस्तु के क्रय, भूमि व भवन के अधिग्रहण अथवा जीवन के षोडश संस्कारों की शुरुआत से पूर्व शुभ मुहूर्त का विचार अनिवार्य माना गया है। काल अथवा समय केवल भौतिक सेकंडों या घंटों की इकाई नहीं है, अपितु यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रत्यक्ष प्रवाह है जिसे भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में "कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो" कहकर साक्षात् ईश्वर का स्वरूप बतलाया है।
मुहूर्त का अर्थ है समय का वह दिव्य खंड जिसमें सौरमंडल के नवग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु) तथा २७ नक्षत्र जातक के कल्याणार्थ अनुकूल एवं सामंजस्यपूर्ण स्थिति में संचरण कर रहे हों। जब कोई व्यक्ति किसी शुभ मुहूर्त में नया वाहन खरीदता है, गृह प्रवेश करता है, विवाह बंधन में बंधता है अथवा संतान का नामकरण व मुंडन कराता है, तो उस कार्य को प्रकृति तथा देवशक्तियों का स्वाभाविक संरक्षण प्राप्त होता है। इसके विपरीत, अशुभ काल जैसे राहुकाल, यमगण्ड, विष्टि (भद्रा) अथवा रिक्ता तिथियों में किया गया कार्य अनेक विघ्नों, मानसिक संताप तथा आर्थिक हानि का कारण बन सकता है।
२. पंचांग के पाँच मूलभूत अंग और मुहूर्त निर्धारण की प्रक्रिया
"पंचांग" शब्द की उत्पत्ति "पंच" (पाँच) और "अंग" (अंगों) से हुई है। किसी भी शुभ मुहूर्त की प्रामाणिकता इन पाँचों घटकों की शुद्धि पर निर्भर करती है:
- तिथि (Tithi): चंद्रमा और सूर्य के बीच के १२ अंशों के कोणीय अंतर को एक तिथि कहते हैं। शुभ कार्यों के लिए नंदा, भद्रा, जया और पूर्णा तिथियां श्रेष्ठ होती हैं, जबकि रिक्ता तिथियां (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) त्याज्य मानी गई हैं।
- वार (Day/Vara): सप्ताह के सातों दिनों के अधिपति अलग-अलग ग्रह हैं। वाहन और भौतिक सुख के लिए शुक्रवार व गुरुवार अत्यंत श्रेष्ठ हैं, जबकि मंगल और शनि उग्र माने गए हैं।
- नक्षत्र (Nakshatra): आकाशमंडल के २७ नक्षत्रों का स्वभाव अलग-अलग होता है। वाहन के लिए चर व लघु नक्षत्र, गृह प्रवेश के लिए स्थिर नक्षत्र (रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद) तथा विवाह के लिए त्रिबल शुद्ध नक्षत्र आवश्यक होते हैं।
- योग (Yoga): सूर्य और चंद्र के भोगांशों का योग २७ योगों का निर्माण करता है। इनमें विष्कुंभ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ और वैधृति जैसे अशुभ योगों में कोई भी नवीन उपक्रम प्रारंभ नहीं करना चाहिए।
- करण (Karana): तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। ११ करणों में से "विष्टि करण" को भद्रा कहा जाता है। भद्रा काल में किया गया कोई भी मांगलिक कार्य निष्फल अथवा अनिष्टकारी माना गया है।
३. व्यक्तिगत कुंडली शुद्धि — चंद्रबलम और ताराबलम का विचार
यद्यपि पंचांग में दिए गए मुहूर्त सामान्य रूप से सभी जातकों के लिए प्रशस्त होते हैं, किंतु शास्त्रकारों ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी बड़े निर्णय (जैसे वाहन क्रय, गृह प्रवेश या भूमि रजिस्ट्री) के पूर्व व्यक्ति को अपनी चंद्र राशि के अनुसार चंद्रबलम अवश्य देखना चाहिए।
गोचर में चंद्रमा यदि जातक की जन्म राशि से चौथे, आठवें या बारहवें भाव में संचरण कर रहा हो, तो उस समय को "अनिष्ट चंद्र" माना जाता है। ऐसे दिन भले ही पंचांग में शुभ योग बन रहा हो, जातक को वाहन की चाबी लेने या रजिस्ट्री के हस्ताक्षर करने से बचना चाहिए। इसी प्रकार ताराबलम में जन्म नक्षत्र से संपत, क्षेम, साधक, मित्र और परममित्र ताराएं अत्यंत शुभ फल प्रदान करती हैं, जबकि विपत, प्रत्यरि और वध ताराएं त्यागने योग्य हैं।
४. वर्जित काल — भद्रा, राहुकाल, यमगण्ड एवं खरमास
शुभ मुहूर्त का चयन करते समय निम्नलिखित अशुभ समयावधियों का पूर्ण परित्याग करना आवश्यक है:
५. दैनिक चौघड़िया और अभिजित मुहूर्त का सर्वोत्तम उपयोग
यदि किसी अपरिहार्य कारणवश आपको पंचांग में निर्धारित मुख्य मुहूर्त तिथि पर कार्य करने का अवसर न मिल सके, तो ज्योतिष शास्त्र "अभिजित मुहूर्त" और "अमृत/शुभ चौघड़िया" का आश्रय लेने का विधान करता है। भगवान सूर्य जब आकाश के ठीक मध्य में (मध्याह्न काल में) होते हैं, तब लगभग ४८ मिनट का अभिजित मुहूर्त प्रभावी होता है। भगवान श्री राम का जन्म भी अभिजित मुहूर्त में ही हुआ था। यह मुहूर्त चौबीसों प्रकार के दोषों का शमन करने में समर्थ माना गया है (केवल बुधवार को छोड़कर)।
इसी प्रकार दिन और रात्रि के आठ-आठ भागों में विभक्त चौघड़िया चक्र में अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया किसी भी नए सौदे, चाबी ग्रहण, पूजा एवं यात्रा के लिए सर्वथा प्रशस्त माने गए हैं।
अन्य महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्त कैलेंडर
सभी प्रमुख संस्कारों व क्रय-विक्रय की मासिक तिथियाँ एक क्लिक पर
वाहन क्रय शुभ मुहूर्त 2026 (कार व बाइक)
मासिक कैलेंडर व तालिकासंपत्ति एवं भूमि रजिस्ट्री शुभ मुहूर्त 2026
मासिक कैलेंडर व तालिकाविवाह शुभ मुहूर्त 2026 — पाणिग्रहण एवं लग्न तिथियाँ
मासिक कैलेंडर व तालिकानामकरण शुभ मुहूर्त 2026 — शिशु नामकरण संस्कार
मासिक कैलेंडर व तालिकामुंडन शुभ मुहूर्त 2026 — चूड़ाकरण संस्कार तिथियाँ
मासिक कैलेंडर व तालिकानवीन व्यापार, दुकान एवं प्रतिष्ठान मुहूर्त 2026
मासिक कैलेंडर व तालिकास्वर्ण एवं आभूषण क्रय शुभ मुहूर्त 2026
मासिक कैलेंडर व तालिकाविद्यारंभ एवं अक्षराभ्यास शुभ मुहूर्त 2026
मासिक कैलेंडर व तालिकाकर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त 2026 (कान छेदन)
मासिक कैलेंडर व तालिकाअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्या खरमास में गृह प्रवेश किया जा सकता है?
नहीं। सूर्य जब धनु या मीन राशि में होते हैं तो खरमास माना जाता है, जिसमें गृह प्रवेश पूर्णतः वर्जित है।
