
एकादशी व्रत एवं पारणा समय 2026
शास्त्रोक्त सटीक पारणा मुहूर्त, हरिवासर समाप्ति, द्वादशी समय एवं स्मार्त-वैष्णव व्रत सूची।
एकादशी व्रत एवं पारणा कैलेंडर 2026
स्मार्त व वैष्णव व्रत तारीखें, हरिवासर समाप्ति एवं सटीक प्रातःकालीन पारणा मुहूर्त
श्रावण पुत्रदा एकादशी (पवित्रोपना)
संतान सुख और गृह शांति प्रदान करने वाली तथा सभी पापों को हरने वाली एकादशी।
हरिवासर समाप्त होने के बाद प्रातः 04:01 am से 10:24 am के मध्य पारणा करें।
वर्ष 2026 की सभी 24 एकादशियां एवं पारणा मुहूर्त
नई दिल्ली के स्थानीय सूर्योदय व पंचांग गणित अनुसार
| एकादशी नाम | माह / पक्ष | व्रत दिनांक | विहित पारणा समय | हरिवासर अंत | द्वादशी अंत |
|---|---|---|---|---|---|
सफला एकादशी Lord Narayana | पौष कृष्ण पक्ष | 2026-01-14 | 07:15 am से 10:55 am | 12:29 am | 08:17 pm |
पौष पुत्रदा एकादशी Lord Vishnu | पौष शुक्ल पक्ष | 2026-01-29 | 07:10 am से 11:10 am | 07:14 pm | 11:10 am |
सफला एकादशी Lord Narayana | पौष कृष्ण पक्ष | 2026-02-13 | 07:00 am से 10:54 am | 08:51 pm | 04:02 pm |
पौष पुत्रदा एकादशी Lord Vishnu | पौष शुक्ल पक्ष | 2026-02-27 | 06:47 am से 10:49 am | 04:06 am | 08:44 pm |
विजया एकादशी Lord Rama / Vishnu | फाल्गुन कृष्ण पक्ष | 2026-03-15 | 06:30 am से 09:41 am | 03:23 pm | 09:41 am |
जया एकादशी Lord Vishnu / Madhava | माघ शुक्ल पक्ष | 2026-03-29 | 06:13 am से 07:10 am | 01:38 pm | 07:10 am |
पापमोचिनी एकादशी Lord Vishnu | चैत्र कृष्ण पक्ष | 2026-04-13 | 06:55 am से 10:26 am | 06:55 am | 12:13 am |
आमलकी एकादशी Lord Vishnu & Amla Tree | फाल्गुन शुक्ल पक्ष | 2026-04-27 | 05:43 am से 10:20 am | 12:26 am | 06:52 pm |
वरूथिनी एकादशी Lord Vamana | वैशाख कृष्ण पक्ष | 2026-05-13 | 05:31 am से 10:15 am | 06:58 pm | 11:21 am |
कामदा एकादशी Lord Krishna / Vasudeva | चैत्र शुक्ल पक्ष | 2026-05-27 | 05:24 am से 07:58 am | 12:46 pm | 07:58 am |
अपरा एकादशी Lord Trivikrama | ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष | 2026-06-11 | 05:22 am से 10:15 am | 03:52 am | 07:37 pm |
मोहिनी एकादशी Lord Vishnu (Mohini Avatar) | वैशाख शुक्ल पक्ष | 2026-06-25 | 05:25 am से 10:18 am | 02:43 am | 10:23 pm |
निर्जला एकादशी (भीमसेनी) Lord Vishnu | ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष | 2026-07-25 | 05:39 am से 10:25 am | 06:11 pm | 01:58 pm |
कामिका एकादशी Lord Sridhara | श्रावण कृष्ण पक्ष | 2026-08-09 | 05:47 am से 08:01 am | 04:19 pm | 08:01 am |
देवशयनी एकादशी (आषाढ़ी) Lord Vishnu | आषाढ़ शुक्ल पक्ष | 2026-08-23 | 10:50 am से 12:20 pm | 10:50 am | 06:21 am |
अजा एकादशी (अन्नदा) Lord Hrishikesha | भाद्रपद कृष्ण पक्ष | 2026-09-07 | 06:02 am से 10:25 am | 10:29 pm | 02:43 pm |
श्रावण पुत्रदा एकादशी (पवित्रोपना) Lord Vishnu | श्रावण शुक्ल पक्ष | 2026-09-22 | 06:09 am से 10:24 am | 04:01 am | 10:51 pm |
इन्दिरा एकादशी (पितृ पक्ष) Lord Shaligram / Vishnu | आश्विन कृष्ण पक्ष | 2026-10-06 | 06:17 am से 10:23 am | 06:16 am | 11:17 pm |
परिवर्तिनी एकादशी (पार्श्व) Lord Vamana | भाद्रपद शुक्ल पक्ष | 2026-10-22 | 06:26 am से 10:23 am | 08:46 pm | 02:36 pm |
रमा एकादशी Mata Lakshmi & Lord Keshav | कार्तिक कृष्ण पक्ष | 2026-11-05 | 06:36 am से 10:31 am | 04:35 pm | 10:31 am |
उत्पन्ना एकादशी Ekadashi Devi & Lord Vishnu | मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष | 2026-12-04 | 06:59 am से 10:37 am | 06:02 am | 12:53 am |
देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी / तुलसी विवाह) Lord Vishnu | कार्तिक शुक्ल पक्ष | 2026-12-20 | 07:09 am से 10:46 am | 01:36 am | 05:37 pm |
शास्त्रसम्मत एकादशी व्रत एवं पारणा नियम (Nirnayasindhu & Dharmasindhu)
पारणा का सही समय कब होता है?
एकादशी व्रत का पारणा अगले दिन (द्वादशी तिथि) सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व किया जाता है। यदि द्वादशी सूर्योदय से पूर्व समाप्त हो रही हो, तो भी सूर्योदय के बाद ही पारणा करें।
हरिवासर काल में पारणा क्यों वर्जित है?
द्वादशी तिथि के प्रथम एक-चौथाई (25%) भाग को 'हरिवासर' कहते हैं। पद्म पुराण के अनुसार हरिवासर में पारणा करने से एकादशी व्रत का पुण्य नष्ट हो जाता है। अतः हरिवासर समाप्त होने के बाद ही पारणा करें।
एकादश्यां निराहारः स्थित्वाहमपरेऽहनि । भोक्ष्येऽहं पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत ॥
अर्थ: हे कमलनयन भगवान विष्णु! मैंने एकादशी को निराहार रहकर व्रत किया। अब द्वादशी को भोजन ग्रहण कर रहा हूँ। हे अच्युत! आप मुझे अपनी शरण में लें।
एकादशी व्रत एवं पारणा से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी व्रत का पारणा कब करना चाहिए?
एकादशी व्रत का पारणा अगले दिन यानी द्वादशी तिथि के दिन सूर्योदय के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पूर्व किया जाता है। साथ ही यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पारणा हरिवासर काल में कदापि न हो।
हरिवासर क्या है और इसमें पारणा क्यों वर्जित है?
द्वादशी तिथि के प्रथम 25% (एक-चौथाई) भाग को 'हरिवासर' कहा जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार हरिवासर में अन्न या जल ग्रहण करने से एकादशी व्रत का पुण्य नष्ट हो जाता है। अतः हरिवासर समाप्त होने के बाद ही पारणा करें।
स्मार्त और वैष्णव एकादशी में क्या अंतर होता है?
स्मार्त गृहस्थ परंपरा में यदि दशमी तिथि सूर्योदय से पूर्व 96 मिनट (अरुणोदय) में स्पर्श कर रही हो, तो भी व्रत उसी दिन रखा जा सकता है। परंतु वैष्णव एवं ISKCON परंपरा में पूर्ण शुद्ध एकादशी का ही पालन किया जाता है, जिससे कभी-कभी दोनों की तारीखों में एक दिन का अंतर आ जाता है।
यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए तो पारणा कैसे करें?
शास्त्रों के अनुसार यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाए, तो सूर्योदय के तत्काल बाद ही पारणा किया जाना चाहिए, क्योंकि सूर्योदय से पहले पारणा करना शास्त्र विरुद्ध है।
