
पंचक विचार एवं 2026 कैलेंडर
आज पंचक है या नहीं? पंचक के 5 प्रकार, वर्जित कार्य, शास्त्रीय शांति उपाय एवं वर्ष 2026 की संपूर्ण समय सारणी।
शुभ व दोषमुक्त समय
अग्नि भय, विवाद व दुर्घटनाओं की आशंका। भवन निर्माण में छत ढलाई या अग्नि संबंधी कार्य पूर्णतः वर्जित हैं।
पंचक में वर्जित पांच कार्य (शास्त्रानुसार)
मुहूर्त चिंतामणि एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पंचक काल में निम्नलिखित पांच कार्यों को करने से पांच गुना दुष्परिणाम भोगने पड़ते हैं:
- 1भवन निर्माण में छत की ढलाई (लेंटर डालना)
- 2चारपाई / पलंग बनवाना या नया गद्दा-खाट खरीदना
- 3दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना (यम की दिशा मानी गई है)
- 4ईंधन, लकड़ी या सूखी घास एकत्र करना
- 5पंचक शांति अनुष्ठान के बिना शव का अंतिम संस्कार करना
पंचक शांति एवं निवारण उपाय
यदि परिस्थिति वश पंचक काल में कोई अनिवार्य कार्य करना ही पड़े, तो इन शास्त्रीय उपायों से दोष का निवारण संभव है:
- यदि दक्षिण दिशा की यात्रा अनिवार्य हो, तो श्री हनुमान जी को गुड़ व जल अर्पित करके ही प्रस्थान करें।
- यदि छत ढलवाना अपरिहार्य हो, तो कार्य प्रारंभ से पूर्व श्रमिकों को मिठाई व दक्षिणा देकर प्रसन्न करें।
- पंचक में शवदाह के समय आटे या कुश के पांच पुतले बनाकर विधिवत मंत्रोच्चार के साथ दाह संस्कार किया जाता है।
- पंचक दोष की शांति हेतु प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र या गायत्री मंत्र का 108 बार जप करें।
वर्ष 2026 पंचक कैलेंडर (तिथि एवं समय सारणी)
वर्ष 2026 के सभी पंचक का आरंभ, समाप्ति, समय और प्रकार
| पंचक आरंभ | पंचक समाप्त | पंचक का नाम | आरंभ वार |
|---|---|---|---|
| 2026-01-20 (07:35 AM) | 2026-01-24 (09:42 PM) | अग्नि पंचक | मंगलवार |
| 2026-02-16 (02:18 PM) | 2026-02-21 (04:55 AM) | राज पंचक | सोमवार |
| 2026-03-15 (09:50 PM) | 2026-03-20 (12:10 PM) | रोग पंचक | रविवार |
| 2026-04-12 (05:22 AM) | 2026-04-16 (07:45 PM) | रोग पंचक | रविवार |
| 2026-05-09 (12:40 PM) | 2026-05-14 (03:15 AM) | मृत्यु पंचक | शनिवार |
| 2026-06-05 (07:55 PM) | 2026-06-10 (10:30 AM) | चोर पंचक | शुक्रवार |
| 2026-07-03 (03:10 AM) | 2026-07-07 (05:40 PM) | चोर पंचक | शुक्रवार |
| 2026-07-30 (10:25 AM) | 2026-08-04 (01:05 AM) | दोषमुक्त पंचक | गुरुवार |
| 2026-08-26 (05:45 PM) | 2026-08-31 (08:20 AM) | दोषमुक्त पंचक | बुधवार |
| 2026-09-23 (01:10 AM) | 2026-09-27 (03:40 PM) | दोषमुक्त पंचक | बुधवार |
| 2026-10-20 (08:35 AM) | 2026-10-24 (11:00 PM) | अग्नि पंचक | मंगलवार |
| 2026-11-16 (04:00 PM) | 2026-11-21 (06:25 AM) | राज पंचक | सोमवार |
| 2026-12-13 (11:20 PM) | 2026-12-18 (01:45 PM) | रोग पंचक | रविवार |
पंचक से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पंचक क्या होता है और यह क्यों लगता है?
जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है, तो उस समय चंद्रमा धनिष्ठा (उत्तरार्ध), शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है। इन पांच नक्षत्रों के कालखंड को 'पंचक' कहा जाता है। यह प्रत्येक माह लगभग 5 दिन के लिए लगता है।
पंचक कितने प्रकार के होते हैं?
पंचक किस वार को प्रारंभ हो रहा है, उसके अनुसार 5 प्रकार होते हैं: 1. रोग पंचक (रविवार), 2. राज पंचक (सोमवार - शुभ), 3. अग्नि पंचक (मंगलवार), 4. चोर पंचक (शुक्रवार), और 5. मृत्यु पंचक (शनिवार - सर्वाधिक अशुभ)। बुधवार व गुरुवार का पंचक दोषमुक्त माना जाता है।
पंचक में कौन से कार्य नहीं करने चाहिए?
पंचक में 5 कार्य वर्जित हैं: 1. घर की छत (लेंटर) ढालना, 2. चारपाई या नया पलंग बनवाना, 3. दक्षिण दिशा की यात्रा करना, 4. लकड़ी, ईंधन या घास एकत्र करना, और 5. पंचक शांति के बिना शव का अंतिम संस्कार करना।
