दक्षिण भारतीय कृष्ण मंदिर
गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर: दर्शन समय, कठोर ड्रेस कोड, पूजा और इतिहास

- Deity
- गुरुवायूरप्पन (भगवान बालकृष्ण/महाविष्णु)
- Location
- गुरुवायूर, त्रिशूर जिला, केरल
Read this page
केरल के त्रिशूर जिले में स्थित गुरुवायूर मंदिर को 'भूलोक वैकुंठ' यानी धरती पर भगवान विष्णु का साक्षात धाम माना जाता है। यहां बालकृष्ण का दुर्लभ 'पाताल अंजनम' शिला से बना चतुर्भुज विग्रह प्रतिष्ठित है, जो शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए है। यह दक्षिण भारत के सबसे पवित्र और अनुशासित तीर्थों में से एक है।
History
पौराणिक कथा के अनुसार जब द्वापर के अंत में द्वारका जलमग्न हुई, तब देवगुरु बृहस्पति और वायु देव ने भगवान कृष्ण द्वारा पूजित विग्रह को लाकर भगवान शिव के निर्देश पर यहां स्थापित किया, जिससे इस स्थान का नाम 'गुरुवायूर' पड़ा।
Architecture
पारंपरिक केरल शैली का अद्वितीय काष्ठ और तांबे की छतों वाला स्थापत्य। वृत्ताकार गर्भगृह (श्रीकोविल), 1001 दीपकों वाला विशाल दीपस्तंभ और दीवारों पर 17वीं सदी की भित्ति चित्रकला दर्शनीय है।
Best time
सितंबर से मार्च का समय सर्वोत्तम है। गुरुवायूर एकादशी और वार्षिक उत्सवम के दौरान यहां की भव्यता चरम पर होती है।
Timings
मंदिर के कपाट प्रातः 03:00 बजे 'निर्मल्य दर्शन' से खुलते हैं और दोपहर 01:30 बजे बंद होते हैं। सायं 04:30 से रात्रि 09:15 बजे तक पुनः दर्शन होते हैं।
Darshan
नियमों का कड़ाई से पालन करें। मोबाइल फोन, स्मार्ट घड़ियां व चमड़े का सामान परिसर के बाहर लॉकर में जमा करना अनिवार्य है।
How to reach
त्रिशूर रेलवे स्टेशन 28 किमी दूर है और गुरुवायूर के लिए लोकल ट्रेनें व बसें उपलब्ध हैं। कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लगभग 80 किमी की दूरी पर है।
Nearby
- पुन्नात्तूर कोट्टा (हाथी अभयारण्य)
- मम्मियूर शिव मंदिर
- चावक्कड़ बीच
- वडक्कुन्नाथन मंदिर त्रिशूर
Frequently asked questions
गुरुवायूर मंदिर में प्रवेश के लिए क्या ड्रेस कोड अनिवार्य है?
पुरुषों के लिए धोती (मुंडू) पहनना अनिवार्य है तथा ऊपरी शरीर खुला रखना होता है। महिलाओं के लिए साड़ी, पावड़ा या पारंपरिक सलवार सूट अनिवार्य है; जींस या पश्चिमी वस्त्र प्रतिबंधित हैं।
तुलाभारम अनुष्ठान क्या है?
यह एक अत्यंत लोकप्रिय मन्नत सेवा है, जिसमें श्रद्धालु को तराजू के एक पलड़े पर बिठाकर उनके वजन के बराबर गुड़, केला, नारियल, घी या सिक्कों का दान भगवान को समर्पित किया जाता है।
