मां सरस्वती एवं वसंत उत्सव
बसंत पंचमी संपूर्ण मार्गदर्शिका: मां सरस्वती वंदना, अक्षरारंभ संस्कार और पूजन नियम
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यह पर्व उस दिन मनाया जाता है जब पंचमी तिथि पूर्वाह्न काल में व्याप्त होती है।
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माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को 'बसंत पंचमी' या 'सरस्वती पूजा' का महापर्व मनाया जाता है। यह दिन ऋतुराज वसंत के आगमन का उद्घोष करता है और ज्ञान, संगीत, कला, बुद्धि और वाणी की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में पूजित है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है जो खिलती हुई सरसों, नवऊर्जा और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है। छात्र और साधक अपनी पुस्तकों व वाद्य यंत्रों का पूजन करते हैं और छोटे बच्चों को विद्यारंभ संस्कार कराया जाता है।
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Frequently asked questions
बसंत पंचमी पर 'विद्यारंभ / अक्षरारंभ' संस्कार क्यों कराया जाता है?
यह बालक की शिक्षा का पहला चरण होता है जिसमें चांदी की शलाका या उंगली से चावल की थाली पर 'ॐ' या 'हरिः श्री' लिखवाकर ज्ञान की दीक्षा दी जाती है।
बसंत पंचमी पर पीले रंग के वस्त्र और भोग का क्या महत्व है?
पीला रंग वसंत ऋतु की खिलती प्रकृति, गुरु ग्रह (बृहस्पति) के ज्ञान, सकारात्मकता और सात्विक ऊर्जा का प्रतीक है।
मां सरस्वती को कौन सा विशेष प्रसाद अर्पित किया जाता है?
केसरिया मीठे चावल, मालपुआ, बूंदी के लड्डू, ताजे बेर और सफेद खीर का भोग लगाया जाता है।
