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रक्षाबंधन संपूर्ण मार्गदर्शिका: रक्षा सूत्र बांधने का सही समय, थाली पूजन एवं पौराणिक कथाएं
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राखी बांधने का कार्य केवल भद्रा रहित श्रावण पूर्णिमा के शुभ समय पर किया जाता है।
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श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन का पावन पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का प्रतीक है। बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधकर उनके दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, और भाई अपनी बहनों के सम्मान और सुरक्षा का वचन देते हैं। शास्त्रों के अनुसार यह रक्षा सूत्र केवल धागा नहीं, अपितु संकटों से रक्षा करने वाला अभिमंत्रित कवच है।
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Frequently asked questions
भद्रा काल में राखी बांधना क्यों वर्जित माना गया है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा में राखी बांधने से भाई के जीवन पर कष्ट आते हैं। लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने उसे भद्रा काल में राखी बांधी थी, जिससे उसके कुल का विनाश हुआ।
राखी बांधते समय कौन सा रक्षा मंत्र बोलना चाहिए?
'येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥' इस मंत्र का उच्चारण करने से रक्षा सूत्र अभिमंत्रित हो जाता है।
श्रावणी उपाकर्म का इस दिन क्या महत्व है?
श्रावण पूर्णिमा के दिन द्विज (विप्र) समाज पुरानी जनेऊ बदलकर नया यज्ञोपवीत धारण करता है और वेदों के स्वाध्याय का संकल्प लेता है।
