वसंत एवं ऋतु उत्सव
होली महापर्व गाइड: होलिका दहन का सही मुहूर्त, भद्रा काल नियम और रंगोत्सव
Bhakti Voice
भक्ति वॉइस
होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा को भद्रा रहित प्रदोष काल में किया जाना चाहिए।
Read this page
फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला होली का पावन पर्व प्रकृति के नवजीवन, उल्लास और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व दो दिनों तक मनाया जाता है: पहले दिन प्रदोष काल में भद्रा रहित समय पर 'होलिका दहन' किया जाता है, और अगले दिन 'धुलंडी' पर रंगों से प्रेम और आनंद का उत्सव मनाया जाता है। यह पर्व भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और बुराई पर अच्छाई की शाश्वत विजय का उद्घोष करता है।
The story
Traditions
Puja at home
Frequently asked questions
भद्रा काल में होलिका दहन क्यों नहीं किया जाता?
शास्त्रों के अनुसार भद्रा में होलिका दहन करने से लोक-कल्याण की हानि होती है। इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद प्रदोष काल में ही दहन शास्त्रसम्मत है।
होलिका की अग्नि में नई गेहूं की बालियां भूनने का क्या कारण है?
होली नव-सस्येष्टि (नवान्न) पर्व है। खेत से आई नई फसल का पहला हिस्सा अग्नि देव को धन्यवाद स्वरूप समर्पित किया जाता है और प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है।
बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली का क्या रहस्य है?
यह भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की प्रेममयी लीला का जीवंत रूप है, जहां गोपियां प्रेमपूर्वक लाठियां बरसाती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं।
