श्री हनुमान उत्सव
हनुमान जयंती संपूर्ण मार्गदर्शिका: चोला चढ़ाने की विधि, हनुमान बाहुक एवं संकटमोचन पाठ
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भक्ति वॉइस
उत्तर भारत में यह पर्व चैत्र पूर्णिमा को सूर्योदय व्यापिनी तिथि में मनाया जाता है।
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चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार, अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता श्री हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। संकटमोचन हनुमान जी पराक्रम, असीम बल, निष्काम भक्ति और ब्रह्मचर्य के सर्वोच्च आदर्श हैं। इस दिन भक्तजन उपवास रखते हैं, हनुमान जी को चमेली के तेल युक्त सिंदूरी चोला चढ़ाते हैं और सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ कर सभी प्रकार के संकटों और भय से मुक्ति प्राप्त करते हैं।
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Frequently asked questions
हनुमान जी को सिन्दूर और चमेली का तेल (चोला) क्यों चढ़ाया जाता है?
माता सीता को मांग में सिन्दूर लगाते देख जब हनुमान जी ने जाना कि इससे प्रभु राम की आयु बढ़ती है, तो उन्होंने अपने संपूर्ण शरीर पर सिन्दूर लगा लिया ताकि प्रभु सदा अमर रहें।
हनुमान पूजा से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कैसे शांत होता है?
लंका में रावण के बंधन से शनिदेव को मुक्त कराने पर शनिदेव ने वचन दिया था कि वे हनुमान जी के भक्तों को कभी पीड़ा नहीं पहुंचाएंगे।
हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस पावन दिन पर 11, 21 या 100 बार हनुमान चालीसा का एकाग्रचित्त पाठ करने से सभी सिद्धियां और संकटों से मुक्ति मिलती है।
