श्री गणेश उत्सव
गणेश चतुर्थी संपूर्ण मार्गदर्शिका: मूर्ति स्थापना मुहूर्त, 21 मोदक भोग एवं विसर्जन
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भक्ति वॉइस
मूर्ति स्थापना दोपहर के समय मध्याह्न काल में ही संपन्न की जानी चाहिए।
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भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विघ्नहर्ता, बुद्धि और ऋद्धि-सिद्धि के दाता भगवान श्री गणेश का प्राकट्य दिवस 'गणेश चतुर्थी' के रूप में मनाया जाता है। यह पावन उत्सव 10 दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के साथ संपन्न होता है। भक्त अपने घरों और भव्य पंडालों में मिट्टी के गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं और श्रद्धापूर्वक 21 दूर्वा दल व मोदक अर्पित करते हैं।
The story
Traditions
- पर्यावरण अनुकूल शाडू माटी के गणपति की स्थापना
- प्रातः एवं संध्या समय शंख ध्वनि और तालियों के साथ भव्य आरती
- जोड़े के रूप में बंधी 21 हरी दूर्वा की गांठें अर्पित करना
- चावल के आटे, नारियल और गुड़ से बने उकडीचे मोदक का भोग
- 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के जयघोष के साथ विसर्जन
Puja at home
Frequently asked questions
गणेश जी की स्थापना मध्याह्न काल में ही क्यों की जाती है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का प्राकट्य दोपहर (मध्याह्न काल) में हुआ था, इसलिए इसी समय मूर्ति स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा सबसे फलदायी होती है।
गणपति को 21 दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?
अनलसुर राक्षस को निगलने के बाद जब गणपति के पेट में तीव्र जलन हुई, तब ऋषियों ने 21 दूर्वा दल अर्पित कर उनकी ज्वाला को शांत किया था।
गणेश चतुर्थी की रात चंद्र दर्शन क्यों वर्जित है?
चंद्रमा के अहंकार को तोड़ने के लिए भगवान गणेश ने श्राप दिया था कि भाद्रपद चतुर्थी को चंद्र दर्शन करने वाले पर झूठा कलंक (मिथ्या दोष) लगेगा।
