देवी दुर्गा एवं क्षेत्रीय उत्सव
बोनालु पर्व संपूर्ण मार्गदर्शिका: माता को बोनम (भोजन) अर्पण और पोथराजु की गाथा
Bhakti Voice
भक्ति वॉइस
यह उत्सव मुख्य रूप से आषाढ़ माह के रविवार के दिनों में मनाया जाता है।
Read this page
बोनालु तेलंगाना (विशेषकर हैदराबाद और सिकंदराबाद) का एक अत्यंत भव्य और ऊर्जावान राज्य उत्सव है, जो महाकाली (और उनके स्थानीय स्वरूपों जैसे येल्लम्मा, पोचम्मा) की आराधना को समर्पित है। यह पर्व आषाढ़ मास (जुलाई/अगस्त) में मनाया जाता है। 'बोनालु' शब्द 'भोजनम' से बना है। मन्नतों के पूरे होने पर महिलाएं आभार स्वरूप तांबे या मिट्टी के घड़े में दूध और गुड़ से पके चावल (बोनम) रखती हैं, घड़े को हल्दी, कुमकुम, नीम के पत्तों और जलते दीप से सजाकर सिर पर रखकर माता के मंदिर ले जाती हैं और उन्हें यह पवित्र भोजन अर्पित करती हैं।
The story
Traditions
Puja at home
Frequently asked questions
'बोनम' के घड़े में क्या होता है?
बोनम माता का भोजन है, जिसमें दूध और गुड़ में पके चावल होते हैं। इस घड़े को हल्दी-सिंदूर से रंगा जाता है और उसके ऊपर नीम की टहनियां और मिट्टी का दीपक रखा जाता है।
बोनालु शोभायात्रा में 'पोथराजु' कौन है?
पोथराजु को देवी माता का भयंकर और रक्षक भाई माना जाता है। इस भूमिका में एक व्यक्ति अपने शरीर पर हल्दी-सिंदूर लगाकर हाथ में कोड़ा लिए ढोल की थाप पर उग्र नृत्य करता है ताकि बुरी शक्तियां दूर रहें।
'रंगम' अनुष्ठान क्या है?
मुख्य बोनालु के अगले दिन 'रंगम' (भविष्यवाणी) होती है। इसमें एक अविवाहित महिला देवी के प्रभाव में आकर (ट्रान्स में) राज्य के भविष्य, वर्षा और फसल से जुड़ी भविष्यवाणियां करती है।
