
आज का चौघड़िया (दिन एवं रात)
सटीक वैदिक गणना अनुसार आज का अमृत, शुभ, लाभ, चर, रोग, काल एवं उद्वेग मुहूर्त। अपने शहर अनुसार तुरंत देखें।
दैनिक चौघड़िया समय सारणी
दिन एवं रात्रि के 8-8 चौघड़िया काल एवं उनके स्वामी ग्रह
सातों चौघड़िया का शास्त्रीय महत्व एवं फल
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, दिन और रात को आठ-आठ भागों में बांटकर चौघड़िया मुहूर्त की गणना की जाती है। प्रत्येक चौघड़िया लगभग 1 घंटा 30 मिनट का होता है, जिसके स्वामी अलग-अलग नवग्रह होते हैं। शुभ कार्य सदैव 'अमृत', 'शुभ' और 'लाभ' में प्रारंभ करने का विधान है।
1. अमृत चौघड़िया (अति शुभ)
स्वामी: चंद्र देव। यह समस्त चौघड़िया में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। गृह प्रवेश, विवाह वार्ता, चिकित्सा, नए व्यापार का आरंभ एवं सभी मांगलिक कार्य इसमें निर्विघ्न सिद्ध होते हैं।
2. शुभ चौघड़िया (कल्याणकारी)
स्वामी: बृहस्पति (गुरु)। यह ज्ञान, धर्म एवं समृद्धि का कारक है। धार्मिक अनुष्ठान, शिक्षा आरंभ, गुरु से दीक्षा, विवाह एवं नए वस्त्र-आभूषण धारण करने हेतु उत्तम है।
3. लाभ चौघड़िया (धनप्रद)
स्वामी: बुध देव। यह वाणिज्य, बुद्धि एवं व्यापार का प्रतीक है। नया बैंक खाता खोलना, शेयर निवेश, दुकान का उद्घाटन एवं महत्वपूर्ण व्यापारिक अनुबंधों हेतु श्रेष्ठ माना गया है।
4. चर चौघड़िया (गतिमान)
स्वामी: शुक्र देव। चर का अर्थ है चलायमान। वाहन की डिलीवरी लेना, यात्रा पर प्रस्थान करना, खेलकूद एवं ऐसे कार्य जिनमें निरंतर गतिशीलता की आवश्यकता हो, इसमें सफल होते हैं।
5. रोग चौघड़िया (अशुभ)
स्वामी: मंगल देव। इसमें शुभ कार्य करने से कार्यों में विघ्न, शारीरिक कष्ट एवं विवाद उत्पन्न होते हैं। कोई भी मांगलिक कार्य या नया सौदा इसमें न करें।
6. काल चौघड़िया (घातक)
स्वामी: शनि देव। इसे काल स्वरूप माना गया है। इस कालखंड में यात्रा, धन का लेन-देन या कोई भी शुभ कार्य सर्वथा त्याज्य है। केवल मशीनरी मरम्मत या लोहा क्रय किया जा सकता है।
7. उद्वेग चौघड़िया (चिंताकारक)
स्वामी: सूर्य देव। उद्वेग का अर्थ है मानसिक बेचैनी और तनाव। इसमें प्रारंभ किए गए कार्यों में मानसिक अशांति और असफलता का भय रहता है। हालांकि सरकारी व प्रशासनिक कार्यों में मध्यम फल मिलता है।
चौघड़िया से संबंधित प्रश्नोत्तरी
चौघड़िया क्या होता है और इसकी गणना कैसे की जाती है?
चौघड़िया वैदिक ज्योतिष का एक समय विभाजन तंत्र है। इसमें सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिनमान को 8 बराबर भागों में और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के रात्रिमान को 8 बराबर भागों में बांटा जाता है। प्रत्येक भाग लगभग डेढ़ घंटे (3.75 घटी) का होता है।
शुभ कार्य के लिए कौन सा चौघड़िया श्रेष्ठ होता है?
मांगलिक कार्यों, व्यापार प्रारंभ, गृह प्रवेश और यात्रा के लिए 'अमृत', 'शुभ' और 'लाभ' चौघड़िया को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। वाहन क्रय या गतिशील कार्यों के लिए 'चर' चौघड़िया भी अनुकूल होता है।
किन चौघड़िया में शुभ कार्य वर्जित होते हैं?
'रोग', 'काल' और 'उद्वेग' को अशुभ चौघड़िया माना गया है। इनमें प्रारंभ किए गए कार्यों में विघ्न, हानि व मानसिक क्लेश की संभावना रहती है, अतः इनसे बचना चाहिए।
क्या अलग-अलग शहरों में चौघड़िया का समय बदलता है?
हां। क्योंकि चौघड़िया की गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित होती है, इसलिए अलग-अलग शहरों के अक्षांश-देशांतर के अनुसार चौघड़िया के समय में कुछ मिनटों का अंतर होता है।
