मंत्र और स्तोत्र
भगवान कृष्ण के 108 दिव्य नाम
भक्ति वॉयस · 6 मिनट · Updated 2026-08-20

भगवान कृष्ण के 108 नामों का जाप करना, जिसे कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली भी कहा जाता है, एक अत्यंत पवित्र आध्यात्मिक अभ्यास है। इनमें से प्रत्येक नाम भगवान कृष्ण के एक अद्वितीय दिव्य गुण, सुंदर लीला या सर्वोच्च विशेषता को दर्शाता है। इन नामों के स्मरण और पाठ से भक्त अपने हृदय में असीम कृपा, शांति और शाश्वत भक्ति का आह्वान करते हैं।
अष्टोत्तर शतनामावली की शक्ति
भक्ति परंपरा में, कलियुग में भगवान के नामों का पाठ करना सर्वोच्च यज्ञ माना जाता है। भगवान कृष्ण के 108 नामों वाली अष्टोत्तर शतनामावली में उनकी दिव्य लौकिक लीलाओं, उनके सर्वोच्च गुणों और ब्रह्मांड के रक्षक के रूप में उनकी भूमिका का वर्णन है।
भगवान कृष्ण के 108 नाम
यहाँ भगवान कृष्ण के 108 दिव्य नाम (अष्टोत्तर शतनामावली) दिए गए हैं। इन नामों का प्रतिदिन स्मरण करने से हृदय में भक्ति और जीवन में शांति का वास होता है:
कृष्ण — सर्व-आकर्षक (सबको आकर्षित करने वाले)
कमलनाथ — देवी लक्ष्मी के स्वामी
वासुदेव — वसुदेव के पुत्र
सनातन — शाश्वत
वासुदेवात्मज — वसुदेव के पुत्र
पुण्य — परम पवित्र
लीलामानुषविग्रह — दिव्य लीला के लिए मानव रूप धारण करने वाले
श्रीवत्सकौस्तुभधर — श्रीवत्स और कौस्तुभ धारण करने वाले
यशोदावत्सल — माता यशोदा के प्रिय
हरि — पापों और दुखों को हरने वाले
चतुर्भुज — चार भुजाओं वाले
देवकीनंदन — देवकी के पुत्र
श्रीश — श्री (लक्ष्मी) के स्वामी
नंदगोपप्रियात्मज — नंद के प्रिय पुत्र
यमुनावेगसंहारिन — यमुना के वेग को शांत करने वाले
बलभद्रप्रियानुज — बलभद्र (बलराम) के प्रिय अनुज
पूतनाजीवितहर — पूतना के प्राण हरने वाले
शकटासुरभंजन — शकटासुर का वध करने वाले
नंदव्रजजनानंदी — नंद के व्रजवासियों को आनंदित करने वाले
सच्चिदानंदविग्रह — सत्-चित्-आनंद के स्वरूप
नवनीतविलिप्तांग — जिनके अंगों पर माखन लिपटा हुआ है
नवनीतनट — माखन के लिए नृत्य करने वाले
अनघ — निष्पाप
नवनीतनावहार — ताज़ा माखन चुराने वाले
मुचुकुंदप्रसाद — राजा मुचुकुंद पर कृपा करने वाले
षोडशस्त्रीसहस्रेश — सोलह हजार पत्नियों के स्वामी
त्रिभंगी — त्रिभंगी मुद्रा में खड़े होने वाले
मधुराकृति — अत्यंत मधुर स्वरूप वाले
शुकवागमृताब्धींदु — शुकदेव जी के वचनामृत रूपी समुद्र के चंद्रमा
गोविंद — गायों, भूमि और इंद्रियों के रक्षक
योगिनांपति — योगियों के स्वामी
वत्सपाल — बछड़ों के रक्षक
पुण्यश्रवणकीर्तन — जिनका श्रवण और कीर्तन पवित्र करने वाला है
तीर्थपाद — जिनके चरण स्वयं पवित्र तीर्थ हैं
वेदवेद्य — जो वेदों के माध्यम से जानने योग्य हैं
दयानिधि — दया के सागर
सर्वतीर्थात्मक — सभी पवित्र तीर्थों के सार
सर्वग्रहरूपिन — सभी ग्रहीय प्रभावों को समाहित करने वाले
परात्पर — सर्वोच्च से भी सर्वोच्च
श्यामल — श्याम वर्ण वाले
गोपीकानाथ — गोपियों के स्वामी
परब्रह्म — परम सत्य
पूतनामौक्षद — पूतना को भी मोक्ष देने वाले
मुकुंद — मुक्ति (मोक्ष) देने वाले
गोवर्धनधर — गोवर्धन पर्वत उठाने वाले
गोपाल — गायों के रक्षक
सर्वपाल — सभी जीवों के रक्षक
अज — अजन्मे
निरंजन — निष्कलंक और पवित्र
कामजनक — दिव्य प्रेम के जनक
कंजलोचन — कमल-नयन
मधुसूदन — मधु नामक राक्षस का वध करने वाले
मथुरानाथ — मथुरा के स्वामी
द्वारकानायक — द्वारका के नायक (स्वामी)
बलिन् — अत्यंत बलशाली
वृन्दावनांतसंचारी — पूरे वृन्दावन में विचरण करने वाले
तुलसीदामभूषण — तुलसी की माला से सुशोभित
स्यमंतकमणिहर — स्यमंतक मणि से संबंधित
नरनारायणात्मक — नर और नारायण के स्वरूप
कुब्जाकृपा — कुब्जा पर कृपा करने वाले
यज्ञभोक्ता — यज्ञ की आहुति ग्रहण करने वाले
यज्ञपति — यज्ञों के स्वामी
यज्ञभव — यज्ञ के सार
वेणुनादविशारद — बांसुरी बजाने में निपुण
वृषभासुरविनाशक — वृषभासुर का वध करने वाले
बाणासुरबलान्तक — बाणासुर के बल का अंत करने वाले
नरकासुरविनाशक — नरकासुर का वध करने वाले
मुरारी — मुर नामक राक्षस के शत्रु
कंसारि — कंस के शत्रु
मुष्टिकासुरमर्दन — मुष्टिक नामक असुर को कुचलने वाले
चाणूरमर्दन — चाणूर का वध करने वाले
केशीनिशूदन — केशी नामक राक्षस का वध करने वाले
कालियामर्दन — कालिया नाग का दमन करने वाले
धेनुकासुरभंजन — धेनुकासुर का वध करने वाले
प्रलंबासुरभंजन — प्रलंबासुर का वध करने वाले
अरिष्टासुरविनाशक — अरिष्टासुर का वध करने वाले
व्योमासुरविनाशक — व्योमासुर का वध करने वाले
यमलार्जुनभंजन — यमल-अर्जुन वृक्षों का उद्धार करने वाले
दामोदर — माता यशोदा द्वारा कमर से बांधे गए
माधव — देवी लक्ष्मी और वसंत ऋतु के स्वामी
माधवप्रिय — देवी लक्ष्मी के प्रिय
मधुसूदन — मधु नामक राक्षस का वध करने वाले
हृषीकेश — इंद्रियों के स्वामी
पद्मनाभ — जिनकी नाभि से कमल उत्पन्न हुआ
जनार्दन — मानवता के रक्षक और कल्याणकारी
अच्युत — जो कभी च्युत (पतन) नहीं होते
केशव — केशी का वध करने वाले; सुंदर बालों वाले
जानकीवल्लभ — जानकी (सीता) के प्रिय
पुरुषोत्तम — उत्तम पुरुष
अधोक्षज — जो भौतिक इंद्रियों की धारणा से परे हैं
नारायण — सभी जीवों के परम आश्रय
माधव — लक्ष्मी के पति
गोवर्धनधर — गोवर्धन पर्वत धारण करने वाले
गोपीजनवल्लभ — गोपियों के प्रिय
राधारमण — राधा को आनंदित करने वाले
राधावल्लभ — राधा के प्रिय
गोपीनाथ — गोपियों के स्वामी
गोपिकाकान्त — गोपियों के प्रिय
मुरलीमनोहर — बांसुरी से मन मोहने वाले
वेणुगोपाल — बांसुरी बजाने वाले गोपाल
राधिकारमण — राधिका के आनंद
वृन्दावनेश्वर — वृन्दावन के स्वामी
यदुनंदन — यदु वंश को आनंदित करने वाले
यदुवंशप्रदीप — यदु वंश के दीपक (प्रकाश)
पार्थसारथी — अर्जुन (पार्थ) के सारथी
गीताचार्य — भगवद गीता के उपदेशक
जगन्नाथ — ब्रह्मांड के स्वामी
देवकीनंदन — देवकी के प्रिय पुत्र
Frequently asked questions
कृष्ण के 108 नामों का जाप करने का क्या महत्व है?
108 नामों का जाप मन को शुद्ध करता है, नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करता है, और भगवान कृष्ण की दिव्य चेतना के साथ गहराई से जुड़ने में मदद करता है।
मुझे प्रतिदिन कितनी बार इन नामों का जाप करना चाहिए?
पारंपरिक रूप से प्रतिदिन कम से कम एक बार पूरी अष्टोत्तर शतनामावली का जाप करने की सलाह दी जाती है। ध्यान केंद्रित करने के लिए 108 मनकों वाली तुलसी की माला का उपयोग किया जा सकता है।
