ॐ जय शिव ओंकारा आरती - संपूर्ण लिरिक्स एवं विधि
भगवान भोलेनाथ की प्रिय आरती ॐ जय शिव ओंकारा का संपूर्ण पाठ हिंदी में। जानिए त्रिमूर्ति स्वरूप का भावार्थ, सोमवार पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ।
सार्वजनिक धार्मिक धरोहर
Writer & Research Team

ॐ जय शिव ओंकारा देवाधिदेव महादेव की सबसे पावन और मुख्य आरती है। यह आरती भगवान शिव को प्रणव स्वरूप 'ॐ' के रूप में स्थापित करती है और बताती है कि सृष्टि के सृजन, पालन और संहार के केंद्र में वही एक चेतना है। सोमवार और शिवरात्रि के दिन इसका गान विशेष रूप से किया जाता है।
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Puranic & Epic History
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भगवान भोलेनाथ की प्रिय आरती ॐ जय शिव ओंकारा का संपूर्ण पाठ हिंदी में। जानिए त्रिमूर्ति स्वरूप का भावार्थ, सोमवार पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ।
Frequently asked questions
इस आरती में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संबंध में क्या समझाया गया है?
आरती यह स्पष्ट करती है कि अज्ञानतावश लोग तीनों रूपों को अलग समझते हैं, परंतु प्रणवाक्षर ॐ के भीतर ये तीनों शक्तियां एक ही परम तत्व हैं।
यह आरती गाने के लिए कौन से अवसर सर्वाधिक शुभ हैं?
प्रत्येक सोमवार की संध्या, प्रदोष व्रत, सावन मास और महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इसका गान विशेष फलदायी माना गया है।
शिव आरती में कर्पूर का प्रयोग क्यों किया जाता है?
कपूर जलने पर राख नहीं छोड़ता, जो इस बात का प्रतीक है कि साधक का अहंकार प्रभु के ज्ञान में पूर्णतः विलीन हो जाना चाहिए।
क्या घर के मंदिर में इसका प्रतिदिन पाठ किया जा सकता है?
हां, दैनिक संध्या वंदन के समय परिवार सहित इसका गायन मन को एकाग्र और शांत बनाने के लिए किया जा सकता है।
शिव पूजन में सामान्यतः क्या अर्पित किया जाता है?
शुद्ध जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, श्वेत पुष्प और चंदन भगवान शिव को विशेष प्रिय हैं।
