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शिव आरती8 min read

ॐ जय शिव ओंकारा आरती - संपूर्ण लिरिक्स एवं विधि

भगवान भोलेनाथ की प्रिय आरती ॐ जय शिव ओंकारा का संपूर्ण पाठ हिंदी में। जानिए त्रिमूर्ति स्वरूप का भावार्थ, सोमवार पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ।

सार्वजनिक धार्मिक धरोहर

Writer & Research Team

Updated: 2026-06-18
शिवलिंग पूजन, बेलपत्र अर्पण और संध्या शिव आरती दीप
शिव आरती

ॐ जय शिव ओंकारा देवाधिदेव महादेव की सबसे पावन और मुख्य आरती है। यह आरती भगवान शिव को प्रणव स्वरूप 'ॐ' के रूप में स्थापित करती है और बताती है कि सृष्टि के सृजन, पालन और संहार के केंद्र में वही एक चेतना है। सोमवार और शिवरात्रि के दिन इसका गान विशेष रूप से किया जाता है।

Sacred Heritage

Timeless Temple Tradition

Architectural Wonder

Ancient Vedic Mastery

Scriptural Origin

Puranic & Epic History

Spiritual Sadhana

Living Faith & Wisdom

संपूर्ण आरती हिंदी लिरिक्स

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। चंदन मृगमद सोहे भाले शशिधारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धरता। जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

आरती का आध्यात्मिक विवेचन

इस आरती में परमात्मा के विविध रूपों की एकात्मता का सुंदर वर्णन है। यह रचना यह बोध कराती है कि प्रकृति के तीन गुण—सत्व, रज और तम—उसी एक परम चेतना के अधीन हैं। जब साधक इस भाव से आरती करता है, तो उसके चित्त की चंचलता समाप्त होती है।

सरल शिव पूजन एवं आरती क्रम

शिवलिंग या चित्र पर स्वच्छ जल और चंदन अर्पित करें। धूप और कर्पूर का दीप प्रज्वलित करें। घंटी बजाते हुए शांत चित्त से थाली को दक्षिणावर्त दिशा में सात बार घुमाएं। आरती पूर्ण कर 'ॐ नमः शिवाय' का मानसिक जप करें।

Why this matters today

भगवान भोलेनाथ की प्रिय आरती ॐ जय शिव ओंकारा का संपूर्ण पाठ हिंदी में। जानिए त्रिमूर्ति स्वरूप का भावार्थ, सोमवार पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ।

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Frequently asked questions

इस आरती में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संबंध में क्या समझाया गया है?

आरती यह स्पष्ट करती है कि अज्ञानतावश लोग तीनों रूपों को अलग समझते हैं, परंतु प्रणवाक्षर ॐ के भीतर ये तीनों शक्तियां एक ही परम तत्व हैं।

यह आरती गाने के लिए कौन से अवसर सर्वाधिक शुभ हैं?

प्रत्येक सोमवार की संध्या, प्रदोष व्रत, सावन मास और महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इसका गान विशेष फलदायी माना गया है।

शिव आरती में कर्पूर का प्रयोग क्यों किया जाता है?

कपूर जलने पर राख नहीं छोड़ता, जो इस बात का प्रतीक है कि साधक का अहंकार प्रभु के ज्ञान में पूर्णतः विलीन हो जाना चाहिए।

क्या घर के मंदिर में इसका प्रतिदिन पाठ किया जा सकता है?

हां, दैनिक संध्या वंदन के समय परिवार सहित इसका गायन मन को एकाग्र और शांत बनाने के लिए किया जा सकता है।

शिव पूजन में सामान्यतः क्या अर्पित किया जाता है?

शुद्ध जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, श्वेत पुष्प और चंदन भगवान शिव को विशेष प्रिय हैं।

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