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दुर्गा आरती8 min read

जय अम्बे गौरी आरती - मां दुर्गा की पावन स्तुति व विधि

मां दुर्गा की प्रसिद्ध आरती जय अम्बे गौरी संपूर्ण बोल और सरल अर्थ सहित पढ़ें। जानिए नवरात्रि पूजन विधि, शुक्रवार का नियम और देवी कृपा के उपाय।

सार्वजनिक धार्मिक धरोहर

Writer & Research Team

Updated: 2026-06-20
मां अम्बे का भव्य स्वरूप, लाल चुनरी, पुष्प और दीप आरती दर्शन
दुर्गा आरती

जय अम्बे गौरी मां जगदम्बा और आदिशक्ति भवानी की सबसे मंगलकारी आरती है। नवरात्रि के पावन पर्व, प्रत्येक शुक्रवार तथा घर की संध्या पूजा में इसका सस्वर पाठ किया जाता है। यह आरती साधक को निर्भयता, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।

Sacred Heritage

Timeless Temple Tradition

Architectural Wonder

Ancient Vedic Mastery

Scriptural Origin

Puranic & Epic History

Spiritual Sadhana

Living Faith & Wisdom

संपूर्ण आरती हिंदी लिरिक्स

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निसिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ जय अम्बे गौरी॥ मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ जय अम्बे गौरी॥ कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे। रक्तपुष्प गलमाला, कंठन पर साजे॥ जय अम्बे गौरी॥ केहरि वाहन राजat, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी॥ जय अम्बे गौरी॥ कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥ जय अम्बे गौरी॥ शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निसिदिन मदमाती॥ जय अम्बे गौरी॥ चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ जय अम्बे गौरी॥ ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥ जय अम्बे गौरी॥ चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥ जय अम्बे गौरी॥ तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता। भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पति करता॥ जय अम्बे गौरी॥ भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥ जय अम्बे गौरी॥ कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ जय अम्बे गौरी॥ श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पति पावे॥ जय अम्बे गौरी॥

आरती का भावार्थ एवं आध्यात्मिक संदेश

यह आरती भगवती के करुणामयी और शक्तिशालिनी दोनों स्वरूपों का अभिनंदन करती है। मां दुर्गा सृष्टि की पालनकर्ता भी हैं और अन्याय का नाश करने वाली शक्ति भी। इस स्तुति के गायन से अंतर्मन में साहस, धैर्य और निष्ठा का उदय होता है।

दैनिक एवं नवरात्रि पूजा विधि

माता की प्रतिमा के समक्ष लाल पुष्प और अक्षत रखें। धूप और घी का दीपक जलाएं। घंटी की लयबद्ध ध्वनि के साथ आरती की थाल को क्लॉकवाइज दिशा में घुमाते हुए स्तुति करें और अंत में क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

Why this matters today

मां दुर्गा की प्रसिद्ध आरती जय अम्बे गौरी संपूर्ण बोल और सरल अर्थ सहित पढ़ें। जानिए नवरात्रि पूजन विधि, शुक्रवार का नियम और देवी कृपा के उपाय।

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Frequently asked questions

देवी पूजा में लाल रंग को विशेष महत्व क्यों दिया गया है?

लाल रंग तेज, शक्ति और उत्साह का प्रतीक है। इसलिए मां भगवती को लाल पुष्प, रोली और लाल चुनरी अर्पित की जाती है।

क्या यह आरती नवरात्रि के अलावा अन्य दिनों में भी गाई जा सकती है?

हां, प्रत्येक शुक्रवार और नित्य संध्या वंदन में इस आरती का पाठ करना अत्यंत शुभ और शांतिदायक माना गया है।

आरती में असुरों के संहार का क्या आध्यात्मिक संदेश है?

असुरों का वध मन के भीतर उपस्थित काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसी तामसिक प्रवृत्तियों पर विवेक और सत्य की विजय का प्रतीक है।

मां अम्बे की आरती के समय क्या भोग अर्पित किया जाता है?

बताशा, फल, हलवा या खीर का सात्विक भोग माता रानी को प्रेमपूर्वक लगाया जाता है।

क्या इस आरती के गान के लिए किसी विशेष दीक्षा की आवश्यकता है?

नहीं, यह एक सर्वसुलभ पारंपरिक स्तुति है, जिसे कोई भी श्रद्धालु शुद्ध मन से गा सकता है।

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