जय सन्तोषी माता आरती - शुक्रवार व्रत की पावन स्तुति
मां संतोषी की पावन आरती 'जय सन्तोषी माता' सरल बोल व हिंदी अर्थ सहित पढ़ें। जानिए शुक्रवार व्रत के नियम, गुड़-चना भोग और उद्यापन की आवश्यक बातें।
सार्वजनिक धार्मिक धरोहर
Writer & Research Team

जय सन्तोषी माता संतोष और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी मां संतोषी की प्रिय आरती है। यह आरती शुक्रवार के व्रत और कथा श्रवण के उपरांत गाई जाती है। इसके गायन से मन में धैर्य, संतोष और पारिवारिक सामंजस्य की भावना दृढ़ होती है।
Sacred Heritage
Timeless Temple Tradition
Architectural Wonder
Ancient Vedic Mastery
Scriptural Origin
Puranic & Epic History
Spiritual Sadhana
Living Faith & Wisdom
संपूर्ण आरती हिंदी लिरिक्स
आरती का भावार्थ
शुक्रवार पूजा विधि
Why this matters today
मां संतोषी की पावन आरती 'जय सन्तोषी माता' सरल बोल व हिंदी अर्थ सहित पढ़ें। जानिए शुक्रवार व्रत के नियम, गुड़-चना भोग और उद्यापन की आवश्यक बातें।
Frequently asked questions
संतोषी माता के शुक्रवार व्रत का मुख्य नियम क्या है?
इस व्रत में खट्टी वस्तुओं (जैसे नींबू, दही, इमली, अचार) का सेवन पूर्णतया वर्जित माना जाता है।
मां संतोषी को कौन सा सात्विक भोग लगाया जाता है?
भुना हुआ चना और गुड़ का सरल व सुलभ भोग मां संतोषी को अति प्रिय माना गया है।
आरती से क्या मुख्य आध्यात्मिक सीख मिलती है?
यह आरती 'संतोष' अर्थात धैर्य और आत्मसंतुष्टि का पाठ पढ़ाती है, जिससे जीवन के मानसिक तनाव दूर होते हैं।
यह आरती पूजा में किस समय गाई जाती है?
शुक्रवार व्रत कथा सुनने के तुरंत बाद दीपक जलाकर यह आरती की जाती है।
क्या बिना उपवास रखे भी यह आरती की जा सकती है?
हां, कोई भी व्यक्ति संध्या पूजा में शुद्ध मन से मां की यह आरती कर सकता है।
