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शुक्रवार आरती8 min read

जय सन्तोषी माता आरती - शुक्रवार व्रत की पावन स्तुति

मां संतोषी की पावन आरती 'जय सन्तोषी माता' सरल बोल व हिंदी अर्थ सहित पढ़ें। जानिए शुक्रवार व्रत के नियम, गुड़-चना भोग और उद्यापन की आवश्यक बातें।

सार्वजनिक धार्मिक धरोहर

Writer & Research Team

Updated: 2026-06-25
मां संतोषी का पावन स्वरूप और गुड़-चने का पावन प्रसाद
शुक्रवार आरती

जय सन्तोषी माता संतोष और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी मां संतोषी की प्रिय आरती है। यह आरती शुक्रवार के व्रत और कथा श्रवण के उपरांत गाई जाती है। इसके गायन से मन में धैर्य, संतोष और पारिवारिक सामंजस्य की भावना दृढ़ होती है।

Sacred Heritage

Timeless Temple Tradition

Architectural Wonder

Ancient Vedic Mastery

Scriptural Origin

Puranic & Epic History

Spiritual Sadhana

Living Faith & Wisdom

संपूर्ण आरती हिंदी लिरिक्स

जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता। अपने सेवक जन को, सुख सम्पति दाता॥ जय सन्तोषी माता॥ सुन्दर चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हो। हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो॥ जय सन्तोषी माता॥ गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे। मंद हंसत करुणामयी, त्रिभुवन मन मोहे॥ जय सन्तोषी माता॥ स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुरें प्यारे। धूप, दीप, मधुमेवा, भोग धरें न्यारे॥ जय सन्तोषी माता॥ गुड़ अरु चना परम प्रिय, तामे संतोष कियो। संतोषी कहलाई, भक्तन वर दीन्हो॥ जय सन्तोषी माता॥ शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोहे। भक्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोहे॥ जय सन्तोषी माता॥ कथा सुनत जो नर नारी, दुःख दारिद खोवे। मनवांछित फल पावे, चिंता सब धोवे॥ जय सन्तोषी माता॥ देव सरस्वती लक्ष्मी, शारदा कृपा करें। संतोषी मां के द्वारे, सब कष्ट हरें॥ जय सन्तोषी माता॥ कृपा करो जगजननी, आए शरण तिहारी। शांति सुमन बरसाओ, माता कृपाकारी॥ जय सन्तोषी माता॥ जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता। अपने सेवक जन को, सुख सम्पति दाता॥

आरती का भावार्थ

यह स्तुति मानव को यह स्मरण कराती है कि जीवन का सबसे बड़ा धन आंतरिक संतोष है। मां का साधारण गुड़-चने के भोग से प्रसन्न होना यह दर्शाता है कि ईश्वर केवल सच्चे प्रेम और भाव के आकांक्षी हैं, किसी दिखावे के नहीं।

शुक्रवार पूजा विधि

संध्या समय व्रत कथा के पश्चात जल का लोटा और गुड़-चने का प्रसाद सामने रखें। शुद्ध घी का दीपक जलाकर आरती करें। आरती के उपरांत जल का छिड़काव करें और प्रसाद परिवार में बांटें।

Why this matters today

मां संतोषी की पावन आरती 'जय सन्तोषी माता' सरल बोल व हिंदी अर्थ सहित पढ़ें। जानिए शुक्रवार व्रत के नियम, गुड़-चना भोग और उद्यापन की आवश्यक बातें।

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Frequently asked questions

संतोषी माता के शुक्रवार व्रत का मुख्य नियम क्या है?

इस व्रत में खट्टी वस्तुओं (जैसे नींबू, दही, इमली, अचार) का सेवन पूर्णतया वर्जित माना जाता है।

मां संतोषी को कौन सा सात्विक भोग लगाया जाता है?

भुना हुआ चना और गुड़ का सरल व सुलभ भोग मां संतोषी को अति प्रिय माना गया है।

आरती से क्या मुख्य आध्यात्मिक सीख मिलती है?

यह आरती 'संतोष' अर्थात धैर्य और आत्मसंतुष्टि का पाठ पढ़ाती है, जिससे जीवन के मानसिक तनाव दूर होते हैं।

यह आरती पूजा में किस समय गाई जाती है?

शुक्रवार व्रत कथा सुनने के तुरंत बाद दीपक जलाकर यह आरती की जाती है।

क्या बिना उपवास रखे भी यह आरती की जा सकती है?

हां, कोई भी व्यक्ति संध्या पूजा में शुद्ध मन से मां की यह आरती कर सकता है।