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नदी आरती8 min read

ॐ जय गंगे माता आरती - पावन गंगा स्तुति व विधि

पतित पावनी मां गंगा की पावन आरती 'ॐ जय गंगे माता' संपूर्ण लिरिक्स और हिंदी अर्थ सहित। जानिए हरिद्वार व काशी घाट की आरती परंपरा और दीपदान का महत्व।

सार्वजनिक धार्मिक धरोहर

Writer & Research Team

Updated: 2026-06-28
गंगा तट पर प्रज्वलित दीपों की पावन संध्या आरती
नदी आरती

ॐ जय गंगे माता पतित पावनी, मोक्षदायिनी मां गंगा की सबसे प्रसिद्ध आरती है। यह आरती प्रतिदिन हरिद्वार की हर की पौड़ी, ऋषिकेश और वाराणसी के घाटों पर भव्य रूप से गाई जाती है। मां गंगा को प्रणाम करने से मन निर्मल होता है और नकारात्मक विचारों का शमन होता है।

Sacred Heritage

Timeless Temple Tradition

Architectural Wonder

Ancient Vedic Mastery

Scriptural Origin

Puranic & Epic History

Spiritual Sadhana

Living Faith & Wisdom

संपूर्ण आरती हिंदी लिरिक्स

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ चन्द्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता। शरण पड़े जो तेरी, सो तर जाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता। भागीरथ को पुण्य दियो, मुक्ति के दाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ शिव की जटा में बसी, जगत में विख्याता। अमृत रस पावत नित, जो पूजन कर आता॥ ॐ जय गंगे माता॥ दुर्जन दोष मिटावत, करुणा रस बरसाता। कृपा करो जगजननी, त्रिभुवन सुखदाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ भुवन चार-धाम विराजत, हरिद्वार सोहे। काशी और प्रयाग में, भक्त जनन मोहे॥ ॐ जय गंगे माता॥ आरती जो नर गावे, मन निश्चल राखी। परम पद पावत वह, वेद पुराण साखी॥ ॐ जय गंगे माता॥ ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥

आरती का भावार्थ एवं महिमा

इस आरती में मां गंगा के पावन और जीवनदायी स्वरूप का गुणगान किया गया है। भगीरथ के तप से धरती पर आई गंगा जल की स्वच्छता और पवित्रता का प्रतीक हैं। इसका गायन मनुष्य को अपने कर्मों को शुद्ध रखने और प्रकृति का सम्मान करने की प्रेरणा देता है।

गंगा आरती पूजन विधि

गंगा तट अथवा पूजा घर में जल पात्र के समक्ष दीपक जलाएं। पुष्प अर्पित कर घंटी की ध्वनि के साथ आरती की थाल घुमाएं। आरती समाप्त होने पर जल का आचमन करें और सभी में सात्विक भाव का विस्तार करें।

Why this matters today

पतित पावनी मां गंगा की पावन आरती 'ॐ जय गंगे माता' संपूर्ण लिरिक्स और हिंदी अर्थ सहित। जानिए हरिद्वार व काशी घाट की आरती परंपरा और दीपदान का महत्व।

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Frequently asked questions

क्या नदी से दूर रहने पर भी घर पर गंगा आरती की जा सकती है?

हां, पूजा स्थल पर तांबे के पात्र में स्वच्छ जल अथवा गंगाजल रखकर श्रद्धापूर्वक यह आरती की जा सकती है।

गंगा तट पर दीपदान करने का क्या महत्व है?

जल में दीप प्रवाहित करना आत्म-चेतना के प्रकाश को प्रकृति और ईश्वर के प्रति समर्पित करने का प्रतीक है।

मां गंगा के अवतरण का कौन सा मुख्य पर्व मनाया जाता है?

ज्येष्ठ मास में 'गंगा दशहरा' का पावन पर्व मनाया जाता है, जो मां गंगा के धरती पर अवतरण का दिन है।

यह आरती हमें पर्यावरण के प्रति क्या संदेश देती है?

नदी को 'माता' कहकर पुकारना यह कर्तव्य सिखाता है कि हमें नदियों की स्वच्छता और निर्मलता की रक्षा करनी चाहिए।

गंगा आरती में कौन सी सामग्रियां मुख्य होती हैं?

प्रज्वलित दीपक, ताजे पुष्प, धूप, रोली और अक्षत मुख्य पूजन सामग्री हैं।