आरती श्री रामायण जी की - पावन ग्रंथ स्तुति व विधि
पवित्र श्रीरामचरितमानस की समापन आरती 'आरती श्री रामायण जी की' संपूर्ण लिरिक्स और हिंदी अर्थ सहित। जानिए रामायण पाठ के नियम और मर्यादा पुरुषोत्तम की सीख।
सार्वजनिक धार्मिक धरोहर
Writer & Research Team

आरती श्री रामायण जी की पवित्र ग्रंथ श्रीरामचरितमानस की आराधना में गाई जाने वाली पावन स्तुति है। अखंड रामायण पाठ अथवा सुंदरकांड के समापन पर इस आरती का गायन अनिवार्य माना जाता है। सनातन परंपरा में शास्त्र को ज्ञान और मर्यादा का साक्षात स्वरूप माना गया है।
Sacred Heritage
Timeless Temple Tradition
Architectural Wonder
Ancient Vedic Mastery
Scriptural Origin
Puranic & Epic History
Spiritual Sadhana
Living Faith & Wisdom
Why this matters today
पवित्र श्रीरामचरितमानस की समापन आरती 'आरती श्री रामायण जी की' संपूर्ण लिरिक्स और हिंदी अर्थ सहित। जानिए रामायण पाठ के नियम और मर्यादा पुरुषोत्तम की सीख।
Frequently asked questions
रामायण जैसे ग्रंथ की आरती क्यों की जाती है?
सनातन धर्म में शास्त्र केवल पन्नों का संग्रह नहीं, बल्कि ईश्वर का 'शब्द-स्वरूप' हैं। ग्रंथ की आरती सत्य, मर्यादा और ज्ञान के प्रति सम्मान प्रकट करती है।
यह आरती कब गाना अनिवार्य माना जाता है?
अखंड रामायण पाठ, सुंदरकांड पाठ तथा रामनवमी पर्व पर पाठ के समापन के समय यह आरती अवश्य गाई जाती है।
रामायण से हमें मुख्य रूप से क्या सीख मिलती है?
यह मर्यादा, सत्यवादिता, बड़ों का आदर, त्याग और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है।
घर पर ग्रंथ की स्थापना कैसे करनी चाहिए?
ग्रंथ को स्वच्छ काष्ठ की चौकी या रेहल पर लाल अथवा पीले वस्त्र के ऊपर स्थापित कर पुष्प और चंदन अर्पित करना चाहिए।
क्या दैनिक अध्ययन के बाद भी यह आरती गाई जा सकती है?
हां, रामायण के किसी भी अंश के स्वाध्याय के पश्चात यह आरती करना मन को शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।
