
दैनिक ग्रह स्थिति (Graha Sthiti Ephemeris)
लाहिरी अयनांश पर आधारित ९ वैदिक ग्रह, राशि अंश-कला, नक्षत्र पाद, वक्री व अस्त गति
दैनिक ग्रह स्थिति (Planetary Ephemeris)
अयनंश: 24° 13' 34" (Chitrapaksha / Lahiri) • दैनिक गति, वक्र एवं अस्त स्थिति
| ग्रह (Planet) | राशि (Zodiac Sign) | अंश (Degrees) | नक्षत्र एवं पाद | गति (Speed) | स्थिति (Status) |
|---|---|---|---|---|---|
☉ सूर्य Surya (Sun) | कन्या स्वामी: बुध | 5° 16' 52" | उत्तरा फाल्गुनी पाद 3 • स्वामी: सूर्य | +0.98°/d | मार्गी (Direct) |
☽ चंद्र Chandra (Moon) | मकर स्वामी: शनि | 15° 17' 25" | श्रवण पाद 2 • स्वामी: चंद्र | +12.26°/d | मार्गी (Direct) |
♂ मंगल Mangal (Mars) | कर्क स्वामी: चंद्र | 2° 26' 21" | पुनर्वसु पाद 4 • स्वामी: गुरु | +0.6°/d | मार्गी (Direct)नीच (Debilitated) |
☿ बुध Budha (Mercury) | कन्या स्वामी: बुध | 24° 30' 18" | चित्रा पाद 1 • स्वामी: मंगल | +1.48°/d | मार्गी (Direct)उच्च (Exalted) |
♃ गुरु (बृहस्पति) Guru (Jupiter) | कर्क स्वामी: चंद्र | 23° 47' 42" | आश्लेषा पाद 3 • स्वामी: बुध | +0.19°/d | मार्गी (Direct)उच्च (Exalted) |
♀ शुक्र Shukra (Venus) | तुला स्वामी: शुक्र | 12° 09' 34" | स्वाती पाद 2 • स्वामी: राहु | +0.37°/d | मार्गी (Direct)स्वक्षेत्री (Own) |
♄ शनि Shani (Saturn) | मीन स्वामी: गुरु | 18° 00' 21" | रेवती पाद 1 • स्वामी: बुध | -0.08°/d | वक्र (R) |
☊ राहु Rahu (North Node) | कुंभ स्वामी: शनि | 3° 56' 13" | धनिष्ठा पाद 4 • स्वामी: मंगल | -0.05°/d | वक्री (स्वाभाविक)स्वक्षेत्री (Own) |
☋ केतु Ketu (South Node) | सिंह स्वामी: सूर्य | 3° 56' 13" | मघा पाद 2 • स्वामी: केतु | -0.05°/d | वक्री (स्वाभाविक) |
पृथ्वी के सापेक्ष विपरीत दिशा में चलने का आभास। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार वक्री ग्रह अत्यधिक बलवान (चेष्टा बली) होकर चेष्टा और पुनरावलोकन का फल देते हैं।
जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यंत निकट आ जाता है, तो वह सूर्य के तेज से छिप जाता है जिसे अस्त कहते हैं। अस्त ग्रह के शुभ फल अस्थायी रूप से क्षीण माने जाते हैं।
भारत सरकार के पंचांग सुधार समिति द्वारा स्वीकृत मानक अयनांश। वर्तमान मान: 24° 13' 34" (Chitrapaksha / Lahiri)। निरयण (Sidereal) गणनाओं हेतु पूर्णतः प्रामाणिक।
ग्रह स्थिति से जुड़े मुख्य प्रश्न
ग्रह स्थिति (Graha Sthiti) क्या होती है?
दैनिक ग्रह स्थिति किसी निश्चित समय (सामान्यतः प्रातः ०५:३० अथवा मध्याह्न) पर आकाश में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु की निरयण (Sidereal) राशियों एवं सटीक अंशों (डिग्री, मिनट, सेकंड) का वैज्ञानिक ब्योरा है।
वक्री ग्रह (Retrograde - R) का ज्योतिषीय महत्व क्या है?
वक्री गति का अर्थ है पृथ्वी के सापेक्ष ग्रह का उल्टा चलता प्रतीत होना। वैदिक ज्योतिष में वक्री ग्रह 'चेष्टा बली' माने जाते हैं। ये कर्मों के पुनर्मूल्यांकन और अप्रत्याशित तीव्र परिणामों का संकेत देते हैं।
ग्रह अस्त (Combustion) कब माना जाता है?
जब कोई ग्रह सूर्य के अति निकट आ जाता है (जैसे बुध १२°, शुक्र ८°-१०°, मंगल १७°), तो सूर्य की प्रखर रश्मियों के कारण वह अस्त हो जाता है। अस्त ग्रह के बाह्य सांसारिक प्रभाव शिथिल हो जाते हैं।
भक्ति वॉयस पर किस अयनांश का उपयोग किया गया है?
हम भारत सरकार के पंचांग सुधार समिति (Calendar Reform Committee) द्वारा संस्तुत प्रमाणिक लाहिरी अयनांश (Chitrapaksha Lahiri Ayanamsha) का उपयोग करते हैं, जो आधुनिक खगोलीय गणनाओं (NASA JPL Ephemeris) के अनुरूप सूक्ष्मता प्रदान करता है।
