
दैनिक ग्रह गोचर फल एवं गोचर कैलेंडर
जन्म चंद्र राशि अनुसार ९ वैदिक ग्रहों का तात्कालिक भाव विश्लेषण, शुभ-अशुभ स्कोर एवं मुख्य गोचर समय-सारणी
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गोचर फल की गणना व्यक्ति की जन्म चंद्र राशि से ग्रहों के भाव स्थान (१ से १२) के अनुसार की जाती है।
मध्यम व संतुलित गोचर फल
मेष राशि हेतु कुल ९ वैदिक ग्रहों में से 4 ग्रह अनुकूल तथा 5 ग्रह प्रतिकूल भावों में गोचर कर रहे हैं।
९ वैदिक ग्रहों का गोचर विश्लेषण (मेष राशि से)
ऋण, रोग व विरोधियों का शमन; मुकदमों व प्रतियोगिताओं में विजय।
चंद्र से 10वें भाव में गोचर: शुभ फल, मानसिक शांति एवं कार्यों में सफलता।
चंद्र से 4वें भाव में गोचर: संयम, धैर्य एवं सजगता अपेक्षित है।
चंद्र से 6वें भाव में गोचर: शुभ फल, मानसिक शांति एवं कार्यों में सफलता।
मानसिक अशांति, भूमि-भवन संबंधी कार्यों में अड़चनें।
चंद्र से 7वें भाव में गोचर: संयम, धैर्य एवं सजगता अपेक्षित है।
साढ़े साती उदय: विदेश संबंधी व्यय, अनिद्रा, आत्म-समीक्षा।
चंद्र से 11वें भाव में गोचर: शुभ फल, मानसिक शांति एवं कार्यों में सफलता।
चंद्र से 5वें भाव में गोचर: संयम, धैर्य एवं सजगता अपेक्षित है।
प्रमुख ग्रह गोचर कैलेंडर (गुरु, शनि, राहु एवं केतु — २०२४ से २०३०)
धीमी गति वाले ग्रह (शनि, गुरु, राहु, केतु) लंबे समय तक एक राशि में रहकर जीवन व समाज पर व्यापक प्रभाव डालते हैं।
| ग्रह | गोचर दिनांक | प्रवेश राशि | ज्योतिषीय प्रभाव |
|---|---|---|---|
| ♃गुरु (बृहस्पति) | 2024-05-01 | वृषभ | गुरु का वृषभ में प्रवेश — आर्थिक व बैंकिंग क्षेत्र में विस्तार। |
| ♃गुरु (बृहस्पति) | 2025-05-14 | मिथुन | गुरु का मिथुन राशि में प्रवेश — संचार, शिक्षा व तकनीकी विकास में तीव्रता। |
| ♃गुरु (बृहस्पति) | 2026-06-02 | कर्क (उच्च) | गुरु का उच्च राशि कर्क में प्रवेश — परम आध्यात्मिक समृद्धि, शांति व दिव्य योग। |
| ♃गुरु (बृहस्पति) | 2027-06-25 | सिंह | गुरु का सिंह राशि में प्रवेश — नेतृत्व क्षमता व प्रशासनिक प्रतिष्ठा में वृद्धि। |
| ♄शनिदेव | 2025-03-30 | मीन | शनि का मीन में प्रवेश — मेष की साढ़े साती आरंभ, मकर की साढ़े साती समाप्त। |
| ♄शनिदेव | 2027-06-03 | मेष (नीच) | शनि का मेष राशि में प्रवेश — वैश्विक व्यवस्था व अनुशासन में बड़े बदलाव। |
| ♄शनिदेव | 2030-04-18 | वृषभ | शनि का मित्र राशि वृषभ में प्रवेश — भौतिक स्थायित्व एवं व्यापारिक संतुलन। |
| ☊राहु | 2025-05-18 | कुंभ | राहु का कुंभ राशि में प्रवेश — आधुनिक वैज्ञानिक शोध व अप्रत्याशित वैश्विक परिवर्तन। |
| ☋केतु | 2025-05-18 | सिंह | केतु का सिंह राशि में प्रवेश — अहं का विसर्जन, सत्ताधीशों में आत्म-चिंतन। |
| ☊राहु | 2026-11-25 | मकर | राहु का मकर राशि में प्रवेश — प्रशासनिक व्यवस्था एवं उद्योग जगत में पुनर्गठन। |
| ☋केतु | 2026-11-25 | कर्क | केतु का कर्क राशि में प्रवेश — मानसिक शांति हेतु योग, ध्यान एवं वैराग्य भाव। |
गोचर से जुड़े मुख्य प्रश्न
ग्रह गोचर (Gochar) क्या होता है?
आकाश में ग्रहों के निरंतर संचरण को 'गोचर' कहते हैं। जन्म कुंडली के ग्रह स्थिर होते हैं, जबकि वर्तमान समय में ब्रह्मांड में गतिशील ग्रह गोचर कहलाते हैं। फलित ज्योतिष में गोचर का विश्लेषण जातक की जन्म चंद्र राशि (Moon Sign) से किया जाता है।
चंद्र राशि से ही गोचर क्यों देखा जाता है?
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, चेतना और अनुभवों का कारक है। ग्रह गोचर का सीधा प्रभाव जातक की मानसिक स्थिति, निर्णय शक्ति और दैनिक सुख-दुख पर पड़ता है, इसलिए महर्षि पराशर ने चंद्र राशि से गोचर विचार को सर्वाधिक महत्व दिया है।
कौन से भावों में ग्रहों का गोचर सर्वाधिक शुभ माना जाता है?
• सूर्य: ३, ६, १०, ११वें भाव में शुभ • चंद्र: १, ३, ६, ७, १०, ११वें भाव में शुभ • मंगल: ३, ६, ११वें भाव में शुभ • बुध: २, ४, ६, ८, १०, ११वें भाव में शुभ • गुरु: २, ५, ७, ९, ११वें भाव में शुभ • शुक्र: १, २, ३, ४, ५, ८, ९, ११, १२वें भाव में शुभ • शनि, राहु, केतु: ३, ६, ११वें (उपचय) भावों में शुभ फल देते हैं।
गोचर और दशा में से क्या अधिक प्रभावी होता है?
विंशोत्तरी महादशा आधारभूत नींव तय करती है, जबकि गोचर उस फल के घटित होने का तात्कालिक समय (Trigger) निर्धारित करता है। यदि दशा अनुकूल हो और गोचर भी शुभ हो, तो व्यक्ति को अभूतपूर्व सफलता मिलती है।
