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शनि साढ़े साती एवं ढैय्या कैलकुलेटर

अपनी जन्म चंद्र राशि से जानें साढ़े साती के चरण, संपूर्ण जीवन चक्र तिथियां एवं प्रामाणिक वैदिक उपाय

अपनी जन्म राशि (चंद्र राशि) चुनें

साढ़े साती की गणना सदैव जन्म कुंडली की चंद्र राशि के आधार पर की जाती है।

वर्तमान शनि स्थिति: मीन
वर्तमान गोचर स्थितिमीन राशि

शनि की साढ़े साती का द्वितीय चरण (मध्य / शिखर चरण — जन्म राशि) चल रहा है।

शनिदेव कर्मफलदाता के रूप में धैर्य, परिश्रम और अनुशासन की परीक्षा लेते हैं। आत्म-चिंतन एवं कठिन परिश्रम से दीर्घकालिक स्थायित्व प्राप्त होता है।

शनि की प्रकृति (आपकी राशि हेतु):
मध्यम एवं परिवर्तनकारी प्रभाव
सक्रिय चरण विवरण: साढ़े साती — द्वितीय चरण (जन्म राशि शिखर)2025-03-30 से 2027-06-03

सम्पूर्ण साढ़े साती चक्र सूची (मीन राशि)

मनुष्य के जीवन में प्रायः २ से ३ बार साढ़े साती का प्रभाव आता है। प्रत्येक चक्र लगभग ७.५ वर्ष तक रहता है जिसे ३ चरणों (उदय, मध्य, अस्त) में बांटा जाता है।

साढ़े साती चक्र 1
1964-01-28 से 1971-04-29
साढ़े साती — प्रथम चरण (द्वादश भाव)
1964-01-281966-04-10
शनि राशि: कुंभ
साढ़े साती — द्वितीय चरण (जन्म राशि शिखर)
1966-04-101966-11-04
शनि राशि: मीन
साढ़े साती — प्रथम चरण (द्वादश भाव)
1966-11-041966-12-20
शनि राशि: कुंभ
साढ़े साती — द्वितीय चरण (जन्म राशि शिखर)
1966-12-201968-06-18
शनि राशि: मीन
साढ़े साती — तृतीय चरण (द्वितीय भाव)
1968-06-181968-09-29
शनि राशि: मेष
साढ़े साती — द्वितीय चरण (जन्म राशि शिखर)
1968-09-291969-03-08
शनि राशि: मीन
साढ़े साती — तृतीय चरण (द्वितीय भाव)
1969-03-081971-04-29
शनि राशि: मेष
साढ़े साती चक्र 2
1993-03-06 से 2000-06-07
साढ़े साती — प्रथम चरण (द्वादश भाव)
1993-03-061993-10-16
शनि राशि: कुंभ
साढ़े साती — प्रथम चरण (द्वादश भाव)
1993-11-101995-06-03
शनि राशि: कुंभ
साढ़े साती — द्वितीय चरण (जन्म राशि शिखर)
1995-06-031995-08-10
शनि राशि: मीन
साढ़े साती — प्रथम चरण (द्वादश भाव)
1995-08-101996-02-17
शनि राशि: कुंभ
साढ़े साती — द्वितीय चरण (जन्म राशि शिखर)
1996-02-171998-04-18
शनि राशि: मीन
साढ़े साती — तृतीय चरण (द्वितीय भाव)
1998-04-182000-06-07
शनि राशि: मेष
साढ़े साती चक्र 3वर्तमान में सक्रिय
2022-04-30 से 2030-04-18
साढ़े साती — प्रथम चरण (द्वादश भाव)
2022-04-302022-07-13
शनि राशि: कुंभ
साढ़े साती — प्रथम चरण (द्वादश भाव)
2023-01-182025-03-30
शनि राशि: कुंभ
साढ़े साती — द्वितीय चरण (जन्म राशि शिखर)
2025-03-302027-06-03
शनि राशि: मीन
साढ़े साती — तृतीय चरण (द्वितीय भाव)
2027-06-032027-10-21
शनि राशि: मेष
साढ़े साती — द्वितीय चरण (जन्म राशि शिखर)
2027-10-212028-02-24
शनि राशि: मीन
साढ़े साती — तृतीय चरण (द्वितीय भाव)
2028-02-242029-08-09
शनि राशि: मेष
साढ़े साती — तृतीय चरण (द्वितीय भाव)
2029-10-062030-04-18
शनि राशि: मेष
साढ़े साती चक्र 4
2052-02-25 से 2059-05-28
साढ़े साती — प्रथम चरण (द्वादश भाव)
2052-02-252054-05-15
शनि राशि: कुंभ
साढ़े साती — द्वितीय चरण (जन्म राशि शिखर)
2054-05-152054-09-02
शनि राशि: मीन
साढ़े साती — प्रथम चरण (द्वादश भाव)
2054-09-022055-02-06
शनि राशि: कुंभ
साढ़े साती — द्वितीय चरण (जन्म राशि शिखर)
2055-02-062057-04-08
शनि राशि: मीन
साढ़े साती — तृतीय चरण (द्वितीय भाव)
2057-04-082059-05-28
शनि राशि: मेष

शनि ढैय्या (कंटक एवं अष्टम) तिथियां

जब शनि जन्म राशि से चतुर्थ भाव (कंटक) अथवा अष्टम भाव (अष्टम शनि) में गोचर करते हैं, तो २.५ वर्ष की ढैय्या लगती है।

शनि ढैय्या — अष्टम (अष्टम भाव)
2041-01-29 से 2041-02-07
शनि राशि: तुला
शनि ढैय्या — अष्टम (अष्टम भाव)
2041-09-27 से 2043-12-12
शनि राशि: तुला
शनि ढैय्या — अष्टम (अष्टम भाव)
2044-06-24 से 2044-08-31
शनि राशि: तुला
शनि ढैय्या — कंटक (चतुर्थ भाव)
2061-07-11 से 2062-02-14
शनि राशि: मिथुन
शनि ढैय्या — कंटक (चतुर्थ भाव)
2062-03-07 से 2063-08-25
शनि राशि: मिथुन
शनि ढैय्या — कंटक (चतुर्थ भाव)
2064-02-06 से 2064-05-10
शनि राशि: मिथुन

शनि शांति एवं सात्विक वैदिक उपाय

वैदिक ऋषियों द्वारा निर्देशित प्रामाणिक उपाय जो साढ़े साती और ढैय्या के दौरान आत्मबल, शांति और अनुकूलता प्रदान करते हैं।

नित्य श्री हनुमान चालीसा का पाठ

पौराणिक मान्यता के अनुसार संकटमोचन हनुमान जी की शरण में जाने वाले भक्त को शनिदेव कभी अनिष्ट फल नहीं देते। मंगलवार एवं शनिवार को सुंदरकांड अथवा हनुमान चालीसा का पाठ विशेष कल्याणकारी है।

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
शनि बीज मन्त्र जप (१०८ बार)

शनिवार की संध्या के समय पश्चिम दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष की माला से १०८ बार शनि बीज मंत्र का जप करें।

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥ (अथवा: ॐ शं शनैश्चराय नमः)
पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक

प्रत्येक शनिवार सूर्यास्त के उपरांत पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का चौमुखा दीपक प्रज्वलित करें तथा सात परिक्रमा करें।

शनिवार का दान (काली वस्तुएं एवं तिल)

शनिवार के दिन काले तिल, काली उड़द, सरसों का तेल, लोहे का तवा/पात्र अथवा जरूरतमंद श्रमिकों को भोजन व काले वस्त्रों का दान करें।

श्रमिकों, वृद्धों व अधीनस्थों का सम्मान

शनिदेव न्याय के अधिष्ठाता हैं तथा समाज के निर्बल व श्रमजीवी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। किसी भी असहाय, कर्मचारी अथवा वृद्ध का अपमान न करें।

साढ़े साती से जुड़े मुख्य प्रश्न व उत्तर

शनि की साढ़े साती क्या होती है?

जब गोचर में शनिदेव किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली की चंद्र राशि से १२वें भाव, चंद्र राशि (प्रथम भाव), और द्वितीय भाव में गोचर करते हैं, तो उस कुल ७.५ वर्ष (प्रत्येक भाव में लगभग २.५ वर्ष) की समयावधि को 'शनि की साढ़े साती' कहा जाता है।

साढ़े साती के तीन चरण कौन-से हैं?

१. प्रथम चरण (उदय / आद्य चरण): शनि चंद्र से १२वें भाव में गोचर करते हैं। इसमें अनावश्यक व्यय व अनिद्रा होती है। २. द्वितीय चरण (शिखर / मध्य चरण): शनि जन्म राशि में गोचर करते हैं। यह सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण व गहन आत्म-समीक्षा का काल है। ३. तृतीय चरण (अस्त / अंत्य चरण): शनि चंद्र से द्वितीय भाव में आते हैं। इसमें धीरे-धीरे कष्टों से मुक्ति व स्थायित्व मिलता है।

शनि की ढैय्या (Panoti) क्या होती है?

जब शनिदेव जन्म राशि से चतुर्थ भाव (कंटक शनि) अथवा अष्टम भाव (अष्टम शनि) में भ्रमण करते हैं, तो उसे २.५ वर्ष की 'ढैय्या' कहा जाता है।

क्या साढ़े साती हमेशा अनिष्टकारी ही होती है?

नहीं! वृषभ और तुला राशि (शुक्र के स्वामित्व वाली) तथा मकर व कुंभ राशि (शनि की अपनी राशियां) के जातकों के लिए साढ़े साती प्रायः अत्यधिक उन्नति, पद, प्रतिष्ठा और स्थायी संपत्ति प्रदायक सिद्ध होती है। शनि केवल अनुचित कार्यों का दंड देते हैं, सत्कर्मों का उत्तम फल देते हैं।

साढ़े साती के दौरान कौन से उपाय सबसे अधिक प्रभावी हैं?

नित्य श्री हनुमान चालीसा का पाठ, शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक, ॐ शं शनैश्चराय नमः का १०८ बार जप, और निर्धन श्रमिकों व वृद्धों की सेवा सबसे श्रेष्ठ एवं सात्विक उपाय हैं।