Bhakti Voice
Sacred ghats and temples

मांगलिक दोष कैलकुलेटर

लग्न, चंद्र व शुक्र से 100% सटीक कुज दोष विश्लेषण, 16 शास्त्रीय परिहार नियम, आंशिक बनाम पूर्ण दोष स्तर तथा प्रामाणिक वैदिक उपाय।

जन्म विवरण दर्ज करें

मांगलिक दोष (कुज दोष) की प्रामाणिक गणना हेतु जन्म समय व जन्म स्थान की सटीकता अनिवार्य है।

मांगलिक दोष परिहार (दोष मुक्त)

मांगलिक दोष विश्लेषण

यद्यपि मंगल 8वें भाव में है, परंतु शास्त्रों के अनुसार 3 परिहार नियमों के कारण दोष का पूर्णतः शमन हो चुका है। विवाह हेतु यह कुंडली सामान्य व शुभ मानी जाएगी।

दोष तीव्रता स्तर
15%
मांगलिक दोष परिहार (दोष मुक्त)
मंगल की राशिसिंह
अंश (Degree)4° 29'
लग्न से भाव8 भाव
वक्री / अस्तमार्गी

त्रिपदा विचार (लग्न, चंद्र व शुक्र से विश्लेषण)

प्रामाणिक पराशरीय ज्योतिष में केवल लग्न से ही नहीं, अपितु चंद्र (मन के कारक) और शुक्र (विवाह के कारक) से भी मंगल की स्थिति का सूक्ष्म परीक्षण किया जाता है।

लग्न से विचार (100% भार)दोष उपस्थित
8वें भाव में मंगल

मंगल लग्न से 8वें भाव में स्थित है, जिससे मुख्य कुज दोष निर्मित होता है।

चंद्र राशि से विचार (50% भार - चंद्र मांगलिक)दोष उपस्थित
7वें भाव में मंगल

मंगल चंद्र से 7वें भाव में स्थित है, जिससे चंद्र मांगलिक प्रभाव उत्पन्न होता है।

शुक्र से विचार (25% भार - शुक्र मांगलिक)दोष मुक्त
5वें भाव में मंगल

शुक्र से 5वें भाव में मंगल अनुकूल है।

शास्त्रीय मांगलिक दोष परिहार (16 Classical Cancellations)

महर्षि पराशर व मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार यदि मंगल विशेष राशियों अथवा गुरु की दृष्टि में हो, तो दोष स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।

लागू हुए परिहार: आपकी कुंडली में 3 शास्त्रीय परिहार पूर्णतः घटित हो रहे हैं, जिससे मंगल का उग्र प्रभाव शांत हो गया है।
शनि का मंगल पर प्रभाव (दृष्टि अथवा युति)

दक्षिण भारतीय ज्योतिष परंपरा के अनुसार शनिदेव की दृष्टि मंगल के उग्र आवेग को अनुशासित व संतुलित कर देती है।

शास्त्र प्रमाण: Kalidasa's Uttara Kalamrita
अष्टम भाव में मित्र सूर्य की सिंह राशि में मंगल

मित्र सूर्य की सिंह राशि में अष्टम मंगल विनाशकारी न होकर रक्षक की भूमिका निभाता है।

शास्त्र प्रमाण: Bhavartha Ratnakara
केंद्र भावों में शुभ ग्रहों (गुरु/शुक्र) की प्रबल स्थिति

केंद्र में देवगुरु बृहस्पति अथवा शुक्र की स्थिति संपूर्ण कुंडली के दोषों का शमन करने में सक्षम है।

शास्त्र प्रमाण: Brihat Parashara Hora Shastra

विवाह मिलान: पूर्णतः अनुकूल व स्वतंत्र

आप मांगलिक अथवा गैर-मांगलिक किसी भी जातक से निर्बाध विवाह कर सकते हैं। आपकी कुंडली में मंगल का कोई अनिष्ट प्रभाव नहीं है।

अष्टम भाव (आयु एवं सौभाग्य भाव)

अष्टम भाव मंगल का सौभाग्य व आयु भाव कहलाता है। यहाँ मंगल की स्थिति ससुराल पक्ष से कटुता, वैवाहिक स्थायित्व में बाधा अथवा अचानक उत्पन्न होने वाली चिंताओं का कारक बन सकती है।

प्रामाणिक वैदिक एवं सात्विक उपाय

मांगलिक दोष से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। वैदिक शास्त्रों में मंगल देव की कृपा प्राप्ति के सात्विक व सहज उपाय वर्णित हैं।

श्री हनुमान चालीसा व सुंदरकांड पाठ

हनुमान जी मंगल देव के अधिष्ठाता हैं। नित्य हनुमान चालीसा का पाठ अथवा मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करने से मंगल की उग्रता शांत होती है और दांपत्य में माधुर्य बना रहता है।

ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्

मंगल बीज मंत्र जप (108 बार)

मंगलवार को प्रातः लाल चंदन अथवा रुद्राक्ष माला से १०८ बार मंगल बीज मंत्र का जप करने से रक्त विकार, क्रोध व मांगलिक दोष का शमन होता है।

ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

मंगलवार व्रत एवं लाल वस्तुओं का दान

मंगलवार को नमक रहित मीठा व्रत रखना तथा लाल मसूर की दाल, गुड़, लाल वस्त्र अथवा तांबे के पात्र का दान करने से मंगल देव अति प्रसन्न होते हैं।

कुंभ विवाह / शालिग्राम विवाह (विवाह पूर्व)

प्रबल मांगलिक स्थिति में विवाह पूर्व पवित्र मिट्टी के घड़े (कुंभ) अथवा भगवान शालिग्राम से सांकेतिक विवाह की शास्त्रीय परंपरा है, जिससे दोष घड़े में समाहित होकर समाप्त हो जाता है।

मूंगा रत्न धारण संबंधित परामर्श

मांगलिक दोष निवारण के लिए कभी भी बिना परामर्श मूंगा न पहनें! मूंगा मंगल की शक्ति को बढ़ाता है। केवल कर्क व सिंह लग्न (जहाँ मंगल योगकारक हैं) के जातक ही रत्न ज्योतिषी के परामर्श से पहनें।

वैदिक ज्योतिष में मांगलिक दोष की यथार्थ समझ

वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को पराक्रम, तेज, ऊर्जा, रक्त और आत्मविश्वास का कारक माना गया है। जब मंगल जातक के दांपत्य भावों (१, २, ४, ७, ८ अथवा १२वें भाव) में विराजमान होता है, तो उसका स्वाभाविक अग्नि तत्व संबंधों में मुखरता और स्वाभिमान का रूप लेता है।

परंतु लोकमानस में फैलाया गया भय शास्त्र सम्मत नहीं है। महर्षि पराशर और वराहमिहिर जैसे ऋषियों ने स्पष्ट किया है कि ६०% से अधिक कुंडलियों में उच्च राशि, स्वराशि अथवा देवगुरु बृहस्पति की अमृत दृष्टि के कारण मांगलिक दोष स्वतः समाप्त (परिहार) हो जाता है।

हमारा यह कैलकुलेटर सूक्ष्म त्रिपदा विचार (लग्न, चंद्र और शुक्र तीनों से परीक्षण) करके आपको बिना किसी भय के शास्त्रसम्मत व वास्तविक निष्कर्ष प्रदान करता है।

मांगलिक दोष से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैदिक ज्योतिष में मांगलिक दोष (कुज दोष) क्या होता है?

जब किसी जातक की जन्म कुंडली में मंगल ग्रह लग्न, चंद्र अथवा शुक्र से प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में स्थित होता है, तो उसे मांगलिक दोष (कुज दोष अथवा भौम दोष) कहा जाता है। चूंकि मंगल तेज, अग्नि व उग्रता का प्रतीक है, अतः दांपत्य भावों में इसकी स्थिति के प्रभाव का शास्त्रीय विश्लेषण किया जाता है।

आंशिक मांगलिक और पूर्ण मांगलिक में क्या अंतर है?

जब मंगल लग्न से सीधे सप्तम अथवा अष्टम भाव में बिना किसी शुभ ग्रह की दृष्टि के बैठा हो, तो उसे पूर्ण मांगलिक (प्रबल मांगलिक) कहा जाता है। जब मंगल द्वितीय, चतुर्थ अथवा द्वादश भाव में हो या केवल चंद्र/शुक्र से बन रहा हो, तो उसे आंशिक (सौम्य) मांगलिक कहते हैं। आंशिक मांगलिक का प्रभाव अत्यंत सीमित होता है और यह दांपत्य में कोई भारी बाधा नहीं बनता।

क्या मांगलिक जातक का विवाह गैर-मांगलिक से हो सकता है?

हाँ, बिल्कुल हो सकता है! शास्त्रों के अनुसार यदि: (१) कुंडली में १६ में से कोई भी शास्त्रीय परिहार लागू हो रहा हो, (२) अष्टकूट गुण मिलान १८ से अधिक हो तथा नाड़ी व भकूट शुद्ध हों, अथवा (३) जीवनसाथी की कुंडली में शनि या राहु समरूप भाव में स्थित हों, तो मांगलिक और गैर-मांगलिक का दांपत्य जीवन अत्यंत सुखी और समृद्ध रहता है।

मांगलिक दोष के मुख्य शास्त्रीय परिहार (दोष भंग) कौन-से हैं?

महर्षि पराशर व मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार: लग्न में मेष का मंगल (रुचक योग), चतुर्थ में वृश्चिक का मंगल, सप्तम में मकर का उच्च मंगल, अष्टम में गुरु की राशियों (धनु/मीन) का मंगल, द्वादश में शुक्र की राशियों (वृषभ/तुला) का मंगल, गुरु की पूर्ण दृष्टि तथा चंद्र-मंगल युति होने पर मांगलिक दोष स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।

मांगलिक दोष निवारण के सबसे प्रामाणिक उपाय कौन-से हैं?

नित्य श्री हनुमान चालीसा का पाठ, मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ, १०८ बार मंगल बीज मंत्र (ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः) का जप, मंगलवार को मीठा बिना नमक का व्रत तथा लाल मसूर व तांबे का दान सर्वश्रेष्ठ सात्विक उपाय हैं। प्रबल मांगलिक स्थिति में विवाह पूर्व कुंभ विवाह शास्त्रसम्मत परंपरा है।

क्या मांगलिक दोष शांत करने के लिए मूंगा रत्न पहनना चाहिए?

कदापि नहीं! बिना अनुभवी ज्योतिषी के परामर्श के मांगलिक दोष में मूंगा कभी नहीं पहनना चाहिए। मूंगा मंगल के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। केवल कर्क व सिंह लग्न के जातकों के लिए ही (जहाँ मंगल योगकारक हैं) मूंगा धारण करने का विधान है।