चार धाम कृष्ण मंदिर
जगन्नाथ मंदिर पुरी दर्शन गाइड: इतिहास, रहस्य, महाप्रसाद और रीति-रिवाज

- Deity
- भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण), बलभद्र एवं देवी सुभद्रा
- Location
- बड़ा दांडा (ग्रैंड रोड), पुरी, ओडिशा
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ओडिशा के पावन तट पर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर सनातन धर्म के सर्वोच्च चार धामों में प्रमुख है। यहां भगवान श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ दारू-ब्रह्म (पवित्र नीम की लकड़ी) के विग्रह रूप में विराजमान हैं। कलिंग वास्तुकला, विशाल रसोई और आनंद बाजार का महाप्रसाद इस तीर्थ को अद्वितीय बनाते हैं।
History
मंदिर के मुख्य भाग का निर्माण 12वीं सदी में पूर्वी गंग वंश के प्रतापी राजा अनंतवर्मन चोड़गंग देव ने आरंभ कराया तथा राजा अनंगभीम देव ने इसे पूर्ण किया। यह मंदिर सदियों से सेवायतों की प्राचीन परंपराओं द्वारा संरक्षित है।
Architecture
कलिंग शैली का सर्वोत्कृष्ट स्थापत्य, जो 65 मीटर ऊंचे 'रेखा देउल' विमान और 'मेघनाद पचेरी' नामक दोहरे परकोटे से सुसज्जित है। इसके शिखर पर अष्टधातु का नीलचक्र और पतितपावन ध्वज विराजित है।
Best time
नवंबर से फरवरी तक का समय सुखद होता है; जून-जुलाई में विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा उत्सव का साक्षी बना जा सकता है।
Timings
मंदिर के पट सामान्यतः प्रातः 05:30 बजे मंगला आरती के साथ खुलते हैं और रात्रि 11:30 बजे शयन आरती के बाद बंद होते हैं।
Darshan
प्राचीन परंपरा के अनुसार केवल सनातनी हिंदुओं को सिंहद्वार से प्रवेश की अनुमति है। चमड़े का सामान व फोन पूर्णतः वर्जित हैं।
How to reach
पुरी रेलवे स्टेशन मंदिर से मात्र 3 किमी दूर है। भुवनेश्वर का बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 60 किमी दूर स्थित है।
Nearby
- गुंडिचा मंदिर
- नरेंद्र सरोवर
- लोकनाथ शिव मंदिर
- स्वर्गद्वार बीच
- कोणार्क सूर्य मंदिर (35 किमी)
Frequently asked questions
जगन्नाथ जी का महाप्रसाद कहां और कैसे मिलता है?
मिट्टी की हांडियों में लकड़ी के चूल्हे पर पकने वाले इस दिव्य भोजन को मां विमला को अर्पित करने के बाद 'महाप्रसाद' कहा जाता है। यह मंदिर परिसर के भीतर 'आनंद बाजार' में सभी श्रद्धालुओं को सुलभ होता है।
नव कलेवर उत्सव क्या है?
प्रत्येक 12 से 19 वर्ष में अधिक मास के दौरान नीम के पवित्र काष्ठ से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रहों के नव-निर्माण व ब्रह्म परिवर्तन की गुप्त वैदिक परंपरा को नवकलेवर कहते हैं।
