राजसी कृष्ण मंदिर
श्री गोविंद देव जी मंदिर जयपुर: कछवाहा राजवंश के आराध्य, 7 झांकियां व दर्शन

- Deity
- श्री गोविंद देव जी एवं श्री राधा रानी
- Location
- जलेबी चौक, जय निवास उद्यान, सिटी पैलेस परिसर, जयपुर, राजस्थान
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जयपुर के सिटी पैलेस परिसर में चंद्र महल और बादल महल के बीच स्थित श्री गोविंद देव जी मंदिर गुलाबी नगरी का आध्यात्मिक केंद्र है। जयपुर के कछवाहा शासक गोविंद देव जी को ही राज्य का वास्तविक राजा मानते आए हैं और स्वयं को उनका दीवान। गौड़ीय वैष्णव परंपरा का यह विग्रह भगवान श्रीकृष्ण के मुखारविंद का साक्षात प्रतिरूप माना जाता है।
History
1534 ई. में श्रील रूप गोस्वामी ने वृंदावन में इस विग्रह को प्रकट किया था। 18वीं सदी में जब मुगलों का संकट बढ़ा, तब आमेर-जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय विग्रह को आदरपूर्वक जयपुर ले आए और अपने महल की रचना इस प्रकार कराई कि वे महल से ही प्रभु के दर्शन कर सकें।
Architecture
राजपूत और मुगल वास्तुकला का सुरम्य संगम। जय निवास उद्यान से घिरा यह खुला दरबार विशाल सभा मंडप से युक्त है, जहां हजारों भक्त एक साथ बैठकर सत्संग का आनंद ले सकते हैं।
Best time
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुखद होता है। फाल्गुन में 'फागोत्सव' और भाद्रपद में 'जन्माष्टमी' अत्यंत धूमधाम से मनाई जाती है।
Timings
प्रतिदिन 7 झांकियां होती हैं: मंगला (लगभग 04:30 बजे), धूप, श्रृंगार, ग्वाल, राजभोग (11:15 बजे), संध्या और शयन (रात्रि 08:30 बजे)।
Darshan
मंदिर में व्यवस्था अत्यंत सुगम है। आरती के समय भक्तगण विशाल मंडप में बैठकर दर्शन करते हैं। जलेबी चौक से प्रवेश निःशुल्क है।
How to reach
जयपुर रेलवे स्टेशन 5 किमी दूर है। निकटतम मेट्रो स्टेशन 'बड़ी चौपड़' (पिंक लाइन) मात्र 800 मीटर की दूरी पर स्थित है।
Nearby
- सिटी पैलेस
- हवा महल
- जंतर मंतर
- कनक वृंदावन घाटी
- आमेर दुर्ग (8 किमी)
Frequently asked questions
गोविंद देव जी मंदिर के सत्संग मंडप की क्या विशेषता है?
मंदिर का सत्संग हॉल बिना किसी खंभे (Pillarless) के 119 फीट चौड़े सपाट आरसीसी स्पैन के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज विशालतम मंडपों में से एक है।
गोविंद देव जी, गोपीनाथ जी और मदन मोहन जी का क्या संबंध है?
मान्यता अनुसार भगवान कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ द्वारा निर्मित 3 विग्रहों में गोविंद देव जी प्रभु के मुखारविंद, गोपीनाथ जी वक्षस्थल और मदन मोहन जी उनके चरण कमलों का साक्षात स्वरूप दर्शाते हैं।
