कृष्ण मंदिर
बांके बिहारी मंदिर वृंदावन दर्शन गाइड: इतिहास, वास्तुकला और नियम

- Deity
- भगवान श्रीकृष्ण (बांके बिहारी लाल)
- Location
- बिहारी पुरा, वृंदावन, मथुरा जिला, उत्तर प्रदेश
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श्री बांके बिहारी मंदिर वृंदावन का सबसे प्रसिद्ध और जाग्रत धाम है, जहां भगवान श्रीकृष्ण त्रिभंग मुद्रा में विराजते हैं। स्वामी हरिदास जी द्वारा प्राकट्य किए गए इस विग्रह की भक्ति में भक्त पूरी तरह लीन हो जाते हैं। यहां विग्रह के सम्मुख थोड़ी-थोड़ी देर में पर्दा करने की अनूठी परंपरा है ताकि भक्त प्रभु के सम्मोहक नेत्रों के प्रभाव में बेसुध न हो जाएं।
History
16वीं शताब्दी में संगीत सम्राट तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास जी ने अपनी अनन्य भक्ति और साधना से निधिवन में श्री बांके बिहारी जी के विग्रह को प्रकट किया था। वर्तमान भव्य मंदिर भवन का निर्माण सन् 1864 के आसपास राजस्थानी शैली में कराया गया था।
Architecture
मंदिर का निर्माण राजस्थानी स्थापत्य शैली में नक्काशीदार बलुआ पत्थर, मेहराबों और खुले प्रांगणों के साथ किया गया है। यहां घंटी-घड़ियाल न बजाने की अनूठी परंपरा है ताकि प्रभु का बाल-स्वरूप शांत रहे।
Best time
अक्टूबर से मार्च तक का समय सुखद रहता है; ग्रीष्मकाल में फूल बंगला दर्शन और सावन में झूलन उत्सव अत्यंत मनोरम होता है।
Timings
सामान्य दर्शन समय प्रातः 07:45 से दोपहर 12:00 तक और सायं 05:30 से 09:30 तक रहता है। ग्रीष्म एवं शीतकाल में इसमें हल्का परिवर्तन होता है।
Darshan
एकादशी और सप्ताहांत पर अत्यधिक भीड़ रहती है। पारंपरिक वस्त्र पहनें और बंदरों से चश्मे व मोबाइल सुरक्षित रखें।
How to reach
निकटतम रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन (14 किमी) है, जहां से ई-रिक्शा व टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं। निकटतम हवाई अड्डा आगरा (70 किमी) व दिल्ली (150 किमी) है।
Nearby
- निधिवन
- राधा रमण मंदिर
- सेवा कुंज
- केशी घाट
- इस्कॉन मंदिर वृंदावन
Frequently asked questions
बांके बिहारी जी के सामने बार-बार पर्दा क्यों डाला जाता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रभु के सम्मोहक नेत्रों के दर्शन से भक्त भावविभोर हो जाते हैं और प्रभु भक्त के प्रेम में बंधकर उनके पीछे न चल पड़ें, इसलिए थोड़ी-थोड़ी देर में पर्दा डालकर दृष्टि का निरंतर प्रभाव तोड़ा जाता है।
क्या बांके बिहारी मंदिर में प्रतिदिन मंगला आरती होती है?
नहीं, बाल रूप में प्रभु की विश्राम-व्यवस्था का ध्यान रखते हुए मंगala आरती वर्ष में केवल एक बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी की रात को की जाती है।
