सौर नववर्ष उत्सव
विषु पर्व संपूर्ण मार्गदर्शिका: मेष संक्रांति, कणी दर्शन, कनि CONN और नववर्ष अनुष्ठान
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भक्ति वॉइस
यह पर्व मलयालम सौर कैलेंडर के मेदाम मास के पहले दिन मनाया जाता है।
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विषु केरल, तुलु नाडु और दक्षिण भारत का पावन खगोलीय नववर्ष पर्व है, जो सूर्य के मेष राशि में प्रवेश (मेष संक्रांति) करने पर मनाया जाता है। संस्कृत के 'विषुवत' शब्द से बना यह पर्व दिन और रात के बराबर होने यानी प्रकृति के संतुलन का प्रतीक है। इस दिन का सबसे पावन अनुष्ठान 'विषुक्कणी' है, जिसमें नववर्ष के उषाकाल में आंख खुलते ही सबसे पहले भगवान श्री कृष्ण के सम्मुख सजे स्वर्ण, पीले 'कणी कोन्ना' के फूलों और समृद्ध अनाजों के दर्शन किए जाते हैं ताकि संपूर्ण वर्ष सुख-समृद्धि से भरा रहे।
The story
Traditions
Puja at home
Frequently asked questions
विषुक्कणी के बर्तन (उरुली) में कौन सी वस्तुएं सजाई जाती हैं?
कच्चा चावल, सुनहरी पीली ककड़ी, पान-सुपारी, आम, कटहल, कणी कोन्ना के पीले फूल, धातु का दर्पण (वालकन्नाडी), सोने के सिक्के और प्रज्वलित पीतल का दीप रखा जाता है।
'विषु कैनीट्टम' की परंपरा क्या है?
घर के बड़े-बुजुर्ग नववर्ष के आशीर्वाद स्वरूप बच्चों और छोटों को चांदी के सिक्के या धन (कैनीट्टम) भेंट करते हैं ताकि उनके जीवन में धन की कभी कमी न हो।
विषु में 'कणी कोन्ना' के पीले फूलों का क्या महत्व है?
ये सुनहरे पीले फूल सूर्य देव की ऊर्जा, भगवान श्री कृष्ण के पीतांबर व आभूषणों और प्रकृति की असीम समृद्धि का प्रतीक हैं।
