प्रमुख सनातन पर्व
दशहरा संपूर्ण मार्गदर्शिका: बुराई पर अच्छाई की जीत, शस्त्र पूजा और विद्यारंभ
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यह पर्व तब मनाया जाता है जब दशमी तिथि अपराह्न काल में व्याप्त होती है।
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आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी या दशहरा का महापर्व मनाया जाता है, जो शारदीय नवरात्रि का समापन दिवस भी है। यह दिन अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की विजय का शाश्वत प्रतीक है। इसी पावन दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध किया था और मां जगदम्बा ने महिषासुर का संहार किया था। देशभर में इस दिन रावण दहन, रामलीला का मंचन, आयुध (शस्त्र) पूजा, अपराजिता पूजन और विद्यारंभ संस्कार अत्यंत भव्यता से संपन्न किए जाते हैं।
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Traditions
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Frequently asked questions
दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा का क्या महत्व है?
पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष में ही छिपाए थे। दशहरे पर शमी पूजा करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है और शनि दोष शांत होता है।
विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन क्यों शुभ माने जाते हैं?
नीलकंठ को भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि लंका प्रस्थान से पूर्व श्री राम ने नीलकंठ के दर्शन किए थे, जिससे उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई।
आयुध पूजा (शस्त्र पूजा) का क्या विधान है?
इस दिन आजीविका के साधनों, उपकरणों, शस्त्रों और पुस्तकों की पूजा की जाती है, जो यह दर्शाता है कि हमारे कर्म में सहायक हर वस्तु में ईश्वरीय शक्ति का वास है।
