वैष्णव उत्सव
वैकुंठ एकादशी संपूर्ण मार्गदर्शिका: वैकुंठ द्वार दर्शन, श्रीरंगम-तिरुपति उत्सव और व्रत नियम
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यह व्रत धनुर्मास में पड़ने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है।
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धनुर्मास (मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष) की एकादशी तिथि को 'वैकुंठ एकादशी' या 'मुक्कोटी एकादशी' के नाम से जाना जाता है। दक्षिण भारत के प्रमुख वैष्णव तीर्थों जैसे तिरुपति बालाजी और श्रीरंगम में यह महापर्व अत्यंत भव्यता से मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु के वैकुंठ धाम के उत्तर द्वार (वैकुंठ द्वारम) खुले रहते हैं। जो भक्त इस दिन निर्जला या फलाहार उपवास रखकर उत्तर द्वार से भगवान के दर्शन करते हैं, उन्हें जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति और परम पद की प्राप्ति होती है।
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Frequently asked questions
उत्तर द्वार (वैकुंठ द्वारम) से दर्शन करने का क्या तात्विक महत्व है?
उत्तर दिशा देवयान मार्ग और मोक्ष का प्रतीक है। इस पावन द्वार से गुजरने का अर्थ है जीव का सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर श्री हरि के परम धाम में प्रवेश करना।
एकादशी के दिन चावल खाना क्यों वर्जित है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन पाप पुरुष का वास अन्न (विशेषकर चावल) में होता है। चावल त्यागने से मन एकाग्र रहता है और साधना फलित होती है।
इसी दिन गीता जयंती क्यों मनाई जाती है?
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन ही कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्री कृष्ण ने धनुर्धारी अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमर उपदेश दिया था।
