वैदिक नववर्ष उत्सव
भारतीय नववर्ष संपूर्ण मार्गदर्शिका: उगादि पच्चड़ी, गुड़ी स्थापना और पंचांग फल
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चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के सूर्योदय काल में यह पर्व मनाया जाता है।
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चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को सनातन नव संवत्सर का शुभारंभ होता है। इसे महाराष्ट्र में 'गुड़ी पड़वा' और कर्नाटक, आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में 'उगादि' (युगादि) के रूप में अत्यंत उत्साह से मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना आरंभ की थी। इस दिन घरों पर विजय पताका रूपी 'गुड़ी' लगाई जाती है, आम के पत्तों का तोरण बांधा जाता है और जीवन के सुख-दुख के संतुलन का संदेश देने वाली 6 स्वादों से युक्त 'उगादि पच्चड़ी' का प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
The story
Traditions
Puja at home
Frequently asked questions
उगादि पच्चड़ी के 6 स्वादों का क्या दार्शनिक अर्थ है?
मीठा (गुड़/सुख), खट्टा (इमली/सावधानी), कड़वा (नीम/कष्ट), नमकीन (नमक/भय), तीखा (मिर्च/क्रोध) और कसैला (कच्चा आम/आश्चर्य) जीवन में आने वाली हर परिस्थिति को स्वीकार करने की प्रेरणा देते हैं।
गुड़ी पड़वा पर फहराई जाने वाली 'गुड़ी' किसका प्रतीक है?
गुड़ी विजय पताका है जो अधर्म पर धर्म की विजय, प्रभु श्री राम के विजयोत्सव और घर में नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकने का प्रतीक मानी जाती है।
पंचांग श्रवण परंपरा क्या है?
नववर्ष के दिन विद्वान ज्योतिषी से वर्ष के राजा, मंत्री, वर्षा के योग, अर्थव्यवस्था और 12 राशियों के वार्षिक फलादेश को श्रवण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
