भगवान शिव एवं मुरुगन उत्सव
थाईपुसम संपूर्ण मार्गदर्शिका: मुरुगन भक्ति, कावड़ी यात्रा, वेल पूजन और शूरपद्मन संहार
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भक्ति वॉइस
यह पर्व तमिल थाई माह की पूर्णिमा को पुष्य नक्षत्र के दौरान मनाया जाता है।
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थाईपुसम भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) की अगाध भक्ति और तप का पावन महापर्व है। यह तमिल माह 'थाई' की पूर्णिमा तिथि को पुष्य (पूसम) नक्षत्र के संयोग में मनाया जाता है। भारत (तमिलनाडु व केरल) सहित मलेशिया के बातू केव्स और सिंगापुर में यह पर्व अत्यंत उत्साह से मनाया जाता है। इसी पावन दिन माता पार्वती ने भगवान मुरुगन को ज्ञान और विजय का प्रतीक अपना दिव्य अस्त्र 'ज्ञान वेल' (भाला) प्रदान किया था, जिससे उन्होंने असुर शूरपद्मन का संहार कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी।
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Traditions
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Frequently asked questions
कावड़ी अट्टम का क्या आध्यात्मिक महत्व है?
कावड़ी आत्म-समर्पण और तप का भार है। श्रद्धालु 41 या 48 दिनों का ब्रह्मचर्य और उपवास रखकर मुरुगन को ताजे दूध का अभिषेक अर्पित करने के लिए कावड़ी कंधे पर उठाते हैं।
मुरुगन के पावन अस्त्र 'वेल' का क्या दार्शनिक अर्थ है?
वेल ज्ञान शक्ति का प्रतीक है। इसकी चौड़ाई गहन ज्ञान, नुकीला सिरा तीक्ष्ण बुद्धि और लंबा डंडा आध्यात्मिक स्थिरता को दर्शाता है।
भगवान मुरुगन ने युद्ध के बाद असुर शूरपद्मन का क्या किया?
करुणामयी प्रभु ने उसका समूल नाश करने के बजाय उसके अहंकार को मिटाकर उसे अपने वाहन 'मयूर' (मोर) और ध्वज के प्रतीक 'मुर्गे' के रूप में स्वीकार किया।
