दक्षिण भारतीय फसल उत्सव
थाई पोंगल संपूर्ण मार्गदर्शिका: भोगी, सूर्य पोंगल, मट्टू पोंगल और काणुम पोंगल विधि
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भक्ति वॉइस
तमिल सौर कैलेंडर के थाई माह की शुरुआत और मकर संक्रांति के दिन मनाया जाता है।
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थाई पोंगल दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु) का प्रमुख चार दिवसीय फसल व कृतज्ञता का महापर्व है, जो तमिल माह 'थाई' के प्रथम दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। यह पर्व जीवनदाता सूर्य देव, प्रकृति और कृषि में सहायक गोवंश के प्रति आभार प्रकट करने का पावन उत्सव है। इस दिन मिट्टी के नए सजे हुए कलश में खुले आकाश के नीचे नए चावल, दूध और गुड़ से 'शक्कराई पोंगल' का भोग तैयार किया जाता है और उसके उफनने पर 'पोंगालो पोंगल' का जयघोष कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
The story
Traditions
Puja at home
Frequently asked questions
पोंगल के चार दिनों का क्या क्रम होता है?
पहला दिन: भोगी (इंद्र देव की पूजा और पुरानी वस्तुओं का त्याग); दूसरा दिन: थाई पोंगल (सूर्य पूजा और शक्कराई पोंगल); तीसरा दिन: मट्टू पोंगल (गोवंश व नंदी पूजन); चौथा दिन: काणुम पोंगल (पारिवारिक मिलन व प्रकृति दर्शन)।
पोंगल के बर्तन से दूध का उफनना शुभ क्यों माना जाता है?
दूध और चावल के उफान को 'पोंगालो पोंगल' कहा जाता है, जो घर में धन-धान्य, सुख, समृद्धि और सौभाग्य के निरंतर बढ़ते रहने का प्रतीक है।
पोंगल के बर्तन पर कच्ची हल्दी का पौधा क्यों बांधा जाता है?
कच्ची हल्दी और अदरक को मंगलकारी, आरोग्यता का प्रतीक और नई फसल की पवित्रता का सूचक माना जाता है।
