जैन पर्व
पर्युषण महापर्व संपूर्ण मार्गदर्शिका: मिच्छामि दुक्कडम्, दस धर्म और आत्म-निरीक्षण
Bhakti Voice
भक्ति वॉइस
श्वेतांबर (8 दिन) और दिगंबर (10 दिन) संप्रदायों के अनुसार श्रावण अंत या भाद्रपद में इसकी तिथियां थोड़ी भिन्न होती हैं।
Read this page
पर्युषण महापर्व (श्वेतांबर समाज द्वारा 8 दिन) और दशलक्षण महापर्व (दिगंबर समाज द्वारा 10 दिन) जैन धर्म का सबसे महान और आध्यात्मिक उत्सव है। भाद्रपद मास में आने वाला यह पर्व बाहरी उल्लास का नहीं, बल्कि आत्म-निरीक्षण, आत्म-शुद्धि और संचित कर्मों की निर्जरा (नष्ट करने) का समय है। इस दौरान श्रद्धालु कठोर उपवास (जैसे अठ्ठाई या मासक्षमण) करते हैं, कल्पसूत्र का वाचन सुनते हैं, प्रतिक्रमण करते हैं और मौन धारण करते हैं। पर्व का समापन 'संवत्सरी' (या क्षमावाणी) के रूप में होता है, जब सभी जैन धर्मावलंबी 'मिच्छामि दुक्कडम्' (मेरे सभी अपराध क्षमा हों) कहकर जगत के सभी जीवों से क्षमा मांगते हैं और सबको क्षमा करते हैं।
The story
Traditions
Puja at home
Frequently asked questions
'मिच्छामि दुक्कडम्' का क्या अर्थ है?
यह प्राकृत भाषा का प्राचीन वाक्य है, जिसका अर्थ है: 'यदि मैंने जाने-अनजाने में, मन, वचन या कर्म से आपको कोई कष्ट पहुंचाया हो, तो मैं आपसे क्षमा मांगता हूं।' यह अहंकार को मिटाने का सर्वोच्च मंत्र है।
दशलक्षण पर्व के दौरान किन दस धर्मों की पूजा होती है?
दस उत्तम धर्म हैं: क्षमा, मार्दव (विनम्रता), आर्जव (सरलता), शौच (पवित्रता/संतोष), सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य (अपरिग्रह) और ब्रह्मचर्य। प्रतिदिन एक धर्म पर विशेष चिंतन किया जाता है।
'प्रतिक्रमण' क्या है?
प्रतिक्रमण का अर्थ है 'वापस लौटना'। यह एक ऐसी ध्यान-प्रक्रिया और अनुष्ठान है जिसमें व्यक्ति अपने द्वारा साल भर में की गई गलतियों (पापों) का प्रायश्चित करता है और भविष्य में उन्हें न दोहराने का संकल्प लेता है।
