देवी दुर्गा उत्सव
शारदीय नवरात्रि संपूर्ण गाइड: कलश स्थापना, 9 देवियों की पूजा एवं कन्या पूजन विधि
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भक्ति वॉइस
घटस्थापना अनिवार्य रूप से प्रतिपदा तिथि में दोपहर से पूर्व संपन्न होनी चाहिए।
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नवरात्रि का पावन पर्व आद्यशक्ति मां भगवती के नौ दिव्य स्वरूपों (नवदुर्गा) की आराधना का महापर्व है। वर्ष में दो मुख्य नवरात्रियां (चैत्र एवं शारदीय) विशेष रूप से मनाई जाती हैं। यह पर्व अंतःकरण की आसुरी प्रवृत्तियों पर दैवीय शक्तियों की विजय का प्रतीक है। नौ दिनों तक अखंड ज्योति, घटस्थापना, दुर्गा सप्तशती का पाठ और अंत में नवमी तिथि पर कन्या पूजन कर शक्ति की आराधना संपन्न होती है।
The story
Traditions
- घटस्थापना: मिट्टी के पात्र में सप्तधान्य बोना और जलपूर्ण कलश की स्थापना
- नौ दिनों तक पवित्र अखंड ज्योति प्रज्वलित रखना
- नित्य दुर्गा सप्तशती (चंडी पाठ) और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ
- गुजरात और पश्चिमी भारत में भक्तिमय गरबा और डांडिया रास
- अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन कर हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद खिलाना
Puja at home
Frequently asked questions
घटस्थापना (कलश स्थापना) का सबसे शुभ समय कौन सा होता है?
प्रतिपदा तिथि के दिन प्रातःकाल द्विस्वभाव लग्न या अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना करना सर्वश्रेष्ठ होता है। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में स्थापना वर्जित है।
नवरात्रि में जौ (जवारे) क्यों बोए जाते हैं?
जौ को सृष्टि की पहली फसल माना जाता है। जवारों का हरा-भरा और तीव्र गति से बढ़ना घर में सुख, शांति और मां दुर्गा की कृपा का सूचक है।
अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन का क्या महत्व है?
2 से 10 वर्ष की कन्याओं को साक्षात नवदुर्गा का स्वरूप माना जाता है। उनका पूजन व सत्कार करने से मां दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देती हैं।
