सूर्य एवं फसल उत्सव
मकर संक्रांति संपूर्ण गाइड: सूर्य देव का मकर राशि प्रवेश, तिल-गुड़ का महत्व और दान
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यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के सटीक समय पर आधारित होता है।
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सूर्य देव का धनु राशि से निकलकर अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करना 'मकर संक्रांति' कहलाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिन प्रारंभ होता है। यह पर्व खरमास की समाप्ति और सभी मांगलिक कार्यों के शुभारंभ का प्रतीक है। इस पावन दिन पवित्र नदियों में स्नान, तिल-गुड़ का सेवन और खिचड़ी का दान करने से कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है।
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सनातन धर्म में सूर्य के उत्तरायण का क्या महत्व है?
उत्तरायण देवताओं का दिन माना जाता है और यह मोक्ष का द्वार खोलता है। महाभारत में पितामह भीष्म ने देह त्याग के लिए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की थी।
संक्रांति पर तिल और गुड़ खाने का क्या वैज्ञानिक व धार्मिक कारण है?
आयुर्वेद में तिल-गुड़ शीत ऋतु में शरीर को ऊर्जा व रोग प्रतिरोधक क्षमता देते हैं। धार्मिक दृष्टि से तिल शनि और गुड़ सूर्य का प्रतीक है, जो पिता-पुत्र के सौहार्द को दर्शाता है।
मकर संक्रांति के दिन किन वस्तुओं का दान करना चाहिए?
काले-सफेद तिल, गुड़, उड़द दाल की खिचड़ी, ऊनी कंबल, तांबे के बर्तन और मौसमी फलों का दान करना महापुण्यकारी माना जाता है।
