जैन पर्व
महावीर जयंती संपूर्ण मार्गदर्शिका: भगवान महावीर का जीवन, अहिंसा और जैन परंपराएं
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यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की 13वीं तिथि (त्रयोदशी) को मनाया जाता है।
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महावीर जयंती, जिसे जैन धर्म में 'महावीर जन्म कल्याणक' के रूप में जाना जाता है, जैन समुदाय का सबसे पवित्र और प्रमुख पर्व है। यह वर्तमान कालचक्र (अवसर्पिणी) के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म का उत्सव है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला यह पावन दिन भगवान महावीर के मूल आध्यात्मिक सिद्धांतों—अहिंसा, अनेकांतवाद (विचारों की बहुलता) और अपरिग्रह (मोह-त्याग)—का स्मरण कराता है। इस दिन जैन धर्मावलंबी भव्य रथ यात्राएं निकालते हैं, दान-पुण्य करते हैं, जिनालयों में दर्शन करते हैं और मोक्ष मार्ग के चिंतन में लीन होते हैं।
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माता त्रिशला के स्वप्नों का क्या महत्व है?
भगवान महावीर के जन्म से पूर्व माता त्रिशला ने 14 (दिगंबर परंपरा के अनुसार 16) मंगल स्वप्न देखे थे, जिनमें ऐरावत हाथी, सिंह, पूर्ण चंद्रमा और समुद्र शामिल थे। ज्योतिषियों ने इसे चक्रवर्ती सम्राट या तीर्थंकर के जन्म का संकेत बताया था।
'महावीर' नाम का क्या अर्थ है?
उनका बचपन का नाम राजकुमार वर्धमान था। अपनी कठोर तपस्या के दौरान असीम साहस दिखाने और क्रोध, मान, माया तथा लोभ जैसे आंतरिक शत्रुओं (कषायों) पर पूर्ण विजय प्राप्त करने के कारण देवताओं ने उन्हें 'महावीर' (महान शूरवीर) का नाम दिया।
