सौभाग्य एवं व्रत उत्सव
करवा चौथ संपूर्ण मार्गदर्शिका: निर्जला व्रत, सरगी, चंद्र दर्शन और शिव-पार्वती पूजन
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भक्ति वॉइस
यह व्रत उस दिन रखा जाता है जब चतुर्थी तिथि चंद्रोदय के समय व्याप्त हो।
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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को अखंड सौभाग्य का महापर्व 'करवा चौथ' मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक कठोर 'निर्जला' व्रत रखती हैं। इस व्रत का आरंभ सूर्योदय से पूर्व सास द्वारा दी गई 'सरगी' ग्रहण करके होता है। संध्या काल में शिव-पार्वती, कार्तिकेय और करवा माता की पूजा की जाती है, और रात्रि में छलनी से चंद्र दर्शन एवं अर्घ्य देने के पश्चात पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है।
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Frequently asked questions
करवा चौथ में 'सरगी' का क्या महत्व है?
सरगी सास द्वारा बहू को दिया जाने वाला आशीर्वाद और भोर का भोजन (मिठाई, फल, मेवे, फेनी) है, जिसे सूर्योदय से पूर्व खाकर महिलाएं दिनभर के निर्जला व्रत के लिए ऊर्जा प्राप्त करती हैं।
करवा चौथ पर छलनी से चांद क्यों देखा जाता है?
छलनी से चांद देखने का अर्थ है कि चंद्रमा की शीतलता और पवित्रता छनकर सुहागिन तक पहुंचे और छलनी पति-पत्नी के रिश्ते से सभी प्रकार की नकारात्मकता को छान दे।
क्या कुंवारी कन्याएं भी करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?
हां, मनवांछित और सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए कन्याएं यह व्रत कर सकती हैं। वे चंद्रमा के बजाय ध्रुव तारे को देखकर अपना व्रत खोल सकती हैं।
