भगवान शिव एवं मुरुगन उत्सव
कार्तिकाई दीपम संपूर्ण मार्गदर्शिका: अरुणाचल महादीपम, अग्नि तत्व और दीप प्रज्वलन
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यह पर्व तमिल कार्तिकाई माह की पूर्णिमा तिथि को कृत्तिका नक्षत्र के समय मनाया जाता है।
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कार्तिकाई दीपम दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु व केरल) का अत्यंत प्राचीन और पावन प्रकाशोत्सव है। यह पर्व कार्तिकाई माह में पूर्णिमा तिथि और कृत्तिका नक्षत्र के पावन संयोग पर मनाया जाता है। यह दिन देवाधिदेव महादेव के ज्योतिर्लिंग (अग्नि स्तंभ) स्वरूप के प्राकट्य और भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) के छह दिव्य स्वरूपों के एकीकरण का प्रतीक है। इस दिन तिरुवन्नामलाई के पवित्र अरुणाचल पर्वत की चोटी पर टनों शुद्ध घी और कर्पूर से 'महादीपम' प्रज्वलित किया जाता है, जिसके दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के अंधकार का नाश होता है।
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Frequently asked questions
कार्तिकाई पर मिट्टी के दीपक जलाने का आध्यात्मिक संदेश क्या है?
मिट्टी का दीपक मानव शरीर, बत्ती बुद्धि, तेल प्रभु-भक्ति और प्रज्वलित ज्योति आत्म-ज्ञान का प्रतीक है, जो अहंकार रूपी अंधकार को समाप्त करती है।
कार्तिकाई दीपम का भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) से क्या संबंध है?
भगवान शिव के तीसरे नेत्र की छह दिव्य अग्नि-चिनगारियों से जन्मे बाल मुरुगन का पालन छह कृत्तिका देवियों ने किया था, जिन्हें बाद में माता पार्वती ने एक रूप प्रदान किया।
घर में कितने दीपक प्रज्वलित करने की परंपरा है?
श्रद्धालु अपने घरों में 27 नक्षत्रों के प्रतीक रूप में 27 या उससे अधिक मिट्टी के दीपकों को तेल भरकर प्रज्वलित करते हैं।
