जैन पर्व
जैन दीपावली संपूर्ण मार्गदर्शिका: निर्वाण लाडू अर्पण, दीप प्रज्वलन और मोक्ष पर्व
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भक्ति वॉइस
यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।
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जहां अधिकांश भारत में दीपावली भगवान राम के अयोध्या आगमन के रूप में मनाई जाती है, वहीं जैन समुदाय के लिए दीपावली का आध्यात्मिक महत्व सर्वथा भिन्न है। जैन दीपावली को 'निर्वाण कल्याणक' के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 527 ईसा पूर्व कार्तिक अमावस्या की भोर में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने पावापुरी से मोक्ष (जन्म-मरण के चक्र से पूर्ण मुक्ति) प्राप्त किया था। जैन धर्मावलंबी इस पर्व को पटाखों (जिससे जीवों की हिंसा होती है) के साथ नहीं, बल्कि जिनालयों और घरों में दीप जलाकर मनाते हैं। ये दीपक भगवान महावीर की भौतिक अनुपस्थिति में उनके आध्यात्मिक ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक हैं।
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Frequently asked questions
जैन दीपावली पर 'निर्वाण लाडू' क्यों चढ़ाया जाता है?
दीपावली की सुबह जैन श्रद्धालु मंदिरों में भगवान के समक्ष एक बड़ा, गोल आकार का मीठा लड्डू चढ़ाते हैं जिसे 'निर्वाण लाडू' कहते हैं। इसका गोल आकार पूर्णता, अनंतता और मोक्ष की मिठास का प्रतीक है।
दीपावली पर गौतम स्वामी को क्यों याद किया जाता है?
गौतम स्वामी भगवान महावीर के प्रथम गणधर (मुख्य शिष्य) थे। भगवान के निर्वाण पर उन्हें तीव्र शोक हुआ। जब उन्हें यह बोध हुआ कि उनका यह मोह ही मोक्ष में बाधक है, तो उन्होंने मोह का त्याग किया और उसी दीपावली की संध्या को उन्हें 'केवल ज्ञान' (सर्वज्ञता) प्राप्त हुआ।
