सूर्य एवं वैदिक महापर्व
छठ महापर्व संपूर्ण मार्गदर्शिका: नहाय-खाय से प्रात:कालीन अर्घ्य, ठेकुआ प्रसाद एवं नियम
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संध्या अर्घ्य षष्ठी की शाम को और उषा अर्घ्य सप्तमी के सूर्योदय पर दिया जाता है।
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला छठ महापर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का सबसे कठिन और पवित्र लोकपर्व है। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में नहाय-खाय, खरना, अस्ताचलगामी सूर्य को संध्या अर्घ्य और उदयगामी सूर्य को उषा अर्घ्य दिया जाता है। 36 घंटे के निर्जला उपवास और पवित्र नदियों व जलाशयों में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने से आरोग्य, संतान सुख और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
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Frequently asked questions
छठ महापर्व के चार दिनों का क्या क्रम है?
पहला दिन: नहाय-खाय (कद्दू-भात); दूसरा दिन: खरना (गुड़ की खीर का भोग); तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को नमन); चौथा दिन: उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य एवं पारण)।
छठ में अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को अर्घ्य पहले क्यों दिया जाता है?
सनातन संस्कृति केवल उगते को ही नहीं, बल्कि विश्राम की ओर जाते जीवनदायी सूर्य को भी कृतज्ञता पूर्वक नमन करना सिखाती है।
छठ पूजा का मुख्य पारंपरिक प्रसाद क्या होता है?
शुद्ध घी, गेहूं के आटे और गुड़ से बना ठेकुआ, गन्ना, कच्ची हल्दी, अदरक का पौधा और डाभ नींबू मुख्य प्रसाद होते हैं।
