स्नेह एवं सामाजिक सनातन पर्व
भाई दूज संपूर्ण मार्गदर्शिका: भाई-बहन का प्रेम, तिलक विधि और यमराज का वरदान
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यह पर्व गोवर्धन पूजा के अगले दिन द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाले 'भाई दूज' (यम द्वितीया) के साथ ही पांच दिवसीय दीपावली महापर्व का समापन होता है। रक्षाबंधन की ही तरह यह पर्व भी भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। इस पावन दिन बहनें अपने भाई के माथे पर कुमकुम और अक्षत का शुभ तिलक लगाकर उसकी दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और संकटों से रक्षा की कामना करती हैं, और भाई अपनी बहन को उपहार व रक्षा का वचन देता है।
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Frequently asked questions
भाई दूज को 'यम द्वितीया' क्यों कहा जाता है?
पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे। जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक करवाता है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
रक्षाबंधन और भाई दूज में क्या अंतर है?
रक्षाबंधन पर बहन भाई से अपनी रक्षा का वचन मांगते हुए राखी बांधती है, जबकि भाई दूज पर बहन स्वयं यमराज से अपने भाई की लंबी आयु और स्वास्थ्य की प्रार्थना करती है।
तिलक के बाद भाई को सूखा नारियल (गोला) क्यों दिया जाता है?
सूखा नारियल (गोला) शुभता और पूर्णता का प्रतीक है। इसका कठोर आवरण भाई के जीवन में सुरक्षा कवच का और भीतर की सफेदी सुख-शांति का प्रतिनिधित्व करती है।
